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वादकरण

सुप्रीम कोर्ट ने सावरकर को अंग्रेजों का सहयोगी बताने पर राहुल गांधी के खिलाफ नफरत भरे भाषण की शिकायत को खारिज कर दिया

अदालत ने आज इस मामले में जारी शिकायत और समन को रद्द कर दिया। अदालत ने पाया कि गांधी पर मुकदमा चलाने के लिए कानून के तहत ज़रूरी मंज़ूरी इस आपराधिक कार्यवाही में नहीं ली गई थी।

Bar & Bench

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को विपक्ष के नेता (LoP) और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ़ आपराधिक शिकायत और समन को रद्द कर दिया। यह मामला हिंदुत्व विचारक विनायक दामोदर सावरकर के बारे में उनकी कुछ टिप्पणियों से जुड़ा था।

गांधी ने सावरकर को अंग्रेजों का सहयोगी बताया था और यह भी कहा था कि सावरकर को अंग्रेजों से पेंशन मिलती थी। उनके खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज होने के बाद, उत्तर प्रदेश के एक मजिस्ट्रेट ने गांधी को समन जारी किया था।

आखिरकार गांधी ने इस समन को रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने आज उनकी याचिका स्वीकार कर ली। बेंच ने पाया कि इस मामले में गांधी पर मुकदमा चलाने के लिए कानून के तहत जरूरी खास मंज़ूरी (सैंक्शन) नहीं ली गई थी।

कोर्ट ने कहा, "हमने दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलें सुनीं। प्रतिवादी उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा दाखिल हलफनामे में मंज़ूरी मिलने का कोई ज़िक्र नहीं है। इसे देखते हुए, मजिस्ट्रेट द्वारा जारी आदेश रद्द किए जाते हैं।"

विस्तृत आदेश का इंतज़ार है।

Justices Dipankar Datta and Sheel Nagu

वकील नृपेंद्र पांडे की शिकायत पर गांधी पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 153A (दुश्मनी को बढ़ावा देना) और 505 (सार्वजनिक उपद्रव) के तहत आरोप लगाए गए थे।

पांडे ने शुरू में सावरकर पर गांधी की टिप्पणियों के लिए उनके खिलाफ FIR दर्ज करने की अर्जी के साथ एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) से संपर्क किया था।

पांडे ने 17 नवंबर, 2022 को अपनी 'भारत जोड़ो यात्रा' के दौरान राहुल गांधी द्वारा की गई टिप्पणियों पर आपत्ति जताई थी, जिसमें उन्होंने सावरकर को अंग्रेजों का सहयोगी बताया था।

पांडे का दावा था कि ये टिप्पणियां समाज में नफरत फैलाने के इरादे से की गई थीं। पांडे की शिकायत में यह भी कहा गया था कि महात्मा गांधी ने पहले सावरकर को देशभक्त माना था।

जून 2023 में, ACJM ने पांडे की शिकायत खारिज कर दी, जिसके बाद पांडे ने सेशंस कोर्ट में इसे चुनौती दी।

सेशंस कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली और मामले को वापस मजिस्ट्रेट कोर्ट भेज दिया। इसके बाद, दिसंबर 2024 में, लखनऊ की मजिस्ट्रेट कोर्ट ने मामले के सिलसिले में गांधी को समन भेजा।

मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पाया कि गांधी ने कहा था कि सावरकर अंग्रेजों के नौकर थे और उन्हें पेंशन मिलती थी। ट्रायल कोर्ट ने माना कि इन टिप्पणियों से समाज में नफरत और दुर्भावना फैली। इसलिए, ट्रायल कोर्ट ने गांधी के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला पाया और उन्हें कोर्ट के सामने पेश होने का निर्देश दिया।

4 अप्रैल, 2025 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में गांधी को कोई राहत देने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट के जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने कहा कि गांधी के पास हाईकोर्ट जाने के बजाय क्रिमिनल प्रोसीजर कोड की धारा 397 (निचली अदालत के रिकॉर्ड की समीक्षा) के तहत याचिका के साथ सेशंस जज के पास जाने का विकल्प है।

इसके बाद गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले गांधी को जारी समन पर रोक लगा दी थी, लेकिन उनकी टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई थी। कोर्ट ने उस समय कहा था कि स्वतंत्रता सेनानी के खिलाफ गांधी के बयान गैर-जिम्मेदाराना थे और अगर उन्होंने ऐसे ही बयान दिए तो कोर्ट स्वतः संज्ञान (suo motu) लेते हुए कार्रवाई करेगा।

कोर्ट ने कहा था, "कानून के नज़रिए से आपकी बात सही है और आपको स्टे (रोक) मिल जाएगा। लेकिन अगर उन्होंने आगे कोई और बयान दिया, तो उस पर स्वतः संज्ञान (suo motu) लिया जाएगा। हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में ऐसी बातें नहीं होनी चाहिए। उन्होंने हमें आज़ादी दिलाई और हम उनके साथ ऐसा बर्ताव करते हैं?"

बेंच ने यह भी बताया था कि गांधी की दादी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सावरकर की तारीफ़ करते हुए उन्हें पत्र लिखा था।

हालांकि, आज गांधी पर लगाए गए आरोपों के लिए उन पर मुक़दमा चलाने के लिए कानून के तहत ज़रूरी मंज़ूरी न होने की वजह से सुप्रीम कोर्ट ने उनके ख़िलाफ़ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।

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Supreme Court quashes hate speech complaint against Rahul Gandhi for calling Savarkar British collaborator