सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद योगेंद्र चंदोलिया की उस याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें दिल्ली के करोल बाग से आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक विशेष रवि के चुनाव को चुनौती दी गई है। यह चुनौती उनकी शैक्षणिक योग्यता के बारे में कथित तौर पर गलत जानकारी देने के आधार पर दी गई है।
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच, चंदोलिया की उस चुनौती पर सुनवाई कर रही थी जिसमें उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फ़ैसले को चुनौती दी थी, जिसने रवि की 2020 की चुनावी जीत के ख़िलाफ़ उनकी याचिका को खारिज कर दिया था।
अप्रैल 2026 में, हाईकोर्ट ने कहा था कि 2025 में नए चुनाव होने के बाद यह मामला आगे नहीं चल सकता।
चंदोलिया, जिन्होंने 2020 में करोल बाग से BJP उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था, ने रवि के चुनाव को इस आधार पर चुनौती दी कि उन्होंने अपने हलफनामे और फॉर्म 26 में अपनी शैक्षणिक योग्यता के बारे में कथित तौर पर गलत जानकारी दी थी।
रवि ने 2020 का चुनाव 67,433 वोटों से जीता था, जबकि चंदोलिया 35,686 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे थे। यह विवाद 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनावों के बाद भी जारी रहा, जब रवि को करोल बाग से दोबारा चुना गया।
24 अप्रैल, 2026 के अपने फैसले में, दिल्ली हाईकोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने कहा कि चंदोलिया की याचिका 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम' (Representation of the People Act) की धारा 123(4) के तहत भ्रष्ट आचरण (corrupt practice) नहीं मानी जा सकती। हाई कोर्ट ने कहा था कि यह प्रावधान किसी दूसरे उम्मीदवार की चुनावी संभावनाओं को नुकसान पहुंचाने के लिए उनके बारे में दिए गए गलत बयानों पर लागू होता है, जबकि चंदोलिया का आरोप रवि की अपनी शैक्षणिक योग्यता से जुड़ा था।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि नामांकन हलफनामे में किया गया कोई बयान अपने आप में इस प्रावधान के तहत "प्रकाशन" (publication) नहीं माना जा सकता। चूंकि रवि का 2020 का कार्यकाल खत्म हो चुका था और वे 2025 में दोबारा चुने गए थे, इसलिए कोर्ट ने माना कि चंदोलिया की चुनाव याचिका बेअसर (infructuous) हो गई थी।
आज सुप्रीम कोर्ट में बहस करते हुए, चंदोलिया के वकील ने बताया कि रवि ने कथित तौर पर 2013 के अपने नामांकन पत्रों में खुद को B.Com ग्रेजुएट बताया था, जबकि 2015 में कहा था कि वे ग्रेजुएशन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह मामला कानून का एक सवाल उठाता है कि क्या चुनाव हलफनामे में अपनी शैक्षणिक योग्यता के बारे में झूठ बोलना चुनावी अपराध माना जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट की तरह ही यह गौर किया कि बाद में चुनाव हो चुके हैं।
कोर्ट ने कहा, "नए चुनाव हो चुके हैं। प्रतिवादी नंबर 1 (रवि) जीत चुके हैं।"
वकील ने दिल्ली के पूर्व मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर से जुड़े चुनावी विवाद के मामले में सुप्रीम कोर्ट में लंबित एक अपील का भी ज़िक्र किया। तोमर पर भी अपने चुनाव हलफनामे में अपनी शैक्षणिक योग्यता के बारे में गलत जानकारी देने के आरोप लगे थे। यह बात सामने आई कि रवि ने अपनी पढ़ाई-लिखाई के बारे में पहले दी गई जानकारी के बावजूद, 2020 के नॉमिनेशन पेपर्स में खुद को सिर्फ़ 10वीं पास बताया था। तर्क दिया गया कि रवि ने खुद को 10वीं पास बताया था, जबकि 2015 में उन्होंने कहा था कि वे IGNOU से ग्रेजुएशन कर रहे हैं।
इस बात पर ध्यान देते हुए जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि,
"कुछ समय तक IGNOU की डिग्रियों को मान्यता नहीं थी।"
आखिरकार कोर्ट ने रवि और 2020 के करोल बाग चुनाव में लड़ने वाले दूसरे उम्मीदवारों से अपना जवाब दाखिल करने को कहा।
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