Supreme Court, Punjab  
वादकरण

सुप्रीम कोर्ट ने DA मामले में पंजाब के मुख्य सचिव के खिलाफ अवमानना ​​मामले पर रोक लगाई, सरकार से भुगतान योजना मांगी

3 अगस्त को, HC ने राज्य को निर्देश दिया था कि वह सभी कर्मचारियो और पेंशनभोगियो को उनका बकाया महंगाई भत्ता/महंगाई राहत उसी दर से जारी करे जिस दर से अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों को भुगतान किया जाता है

Bar & Bench

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा पंजाब के मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा और अन्य अधिकारियों के खिलाफ शुरू की गई आपराधिक अवमानना ​​(क्रिमिनल कंटेंप्ट) की कार्यवाही पर रोक लगा दी। यह मामला कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) देने के संबंध में हाई कोर्ट के फैसले को लागू न किए जाने से जुड़ा है।

3 अगस्त को, हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह अपने सभी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को महंगाई भत्ता/महंगाई राहत (DA/DR) की सभी लंबित किस्तों का भुगतान करे। यह भुगतान उसी दर पर किया जाना था, जिस दर पर पंजाब में तैनात अखिल भारतीय सेवाओं (IAS/IPS/IFS) के अधिकारियों को किया जाता है।

इस फैसले में सरकार को यह भी निर्देश दिया गया था कि जब तक बकाया राशि का भुगतान नहीं हो जाता, तब तक वह कोई भी अनुत्पादक खर्च (जैसे प्रिंट या सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर विज्ञापन अभियान) नहीं करेगी। राज्य सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

चूंकि सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया और अपने विभागों को इसे लागू न करने के लिए कहा, इसलिए हाई कोर्ट में सिविल और आपराधिक अवमानना ​​(contempt) की कार्यवाही शुरू की गई।

जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने आज हाई कोर्ट में चल रही आपराधिक अवमानना ​​की कार्यवाही पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है।

कोर्ट ने निर्देश दिया, "हमने 12/10/2026 और 30/10/2026 के आदेशों को देखा है। बाद वाले आदेश में, पंजाब के मुख्य सचिव (CS) को आज हाई कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था, जो प्रतिवादियों द्वारा शुरू की गई आपराधिक अवमानना ​​के मामले से जुड़ा है। हमें दोनों पक्षों के बीच उस विवाद की पृष्ठभूमि के बारे में भी बताया गया है, जिसके कारण आपराधिक अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू हुई। अगले आदेश तक आपराधिक अवमानना ​​की कार्यवाही पर रोक रहेगी।"

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि सिविल अवमानना ​​के मामले में कोई भी कठोर कदम (coercive steps) नहीं उठाया जाएगा।

Justice BV Nagarathna and Justice R Mahadevan

अदालत ने राहत देते हुए पंजाब सरकार को निर्देश दिया कि वह मार्च 2027 तक या उससे पहले बकाया राशि के भुगतान के लिए एक योजना तैयार करे।

अदालत ने यह भी गौर किया कि वर्तमान में महंगाई भत्ता (DA) 53 प्रतिशत की दर से मिल रहा है।अदालत ने मामले की सुनवाई दिसंबर तक टालते हुए कहा, "आपको कुछ समय (राहत) मिल गया है। अब कोई सकारात्मक जवाब लेकर आएं। आप कितनी राशि जारी करेंगे?"

सुनवाई के दौरान, अदालत ने टिप्पणी की कि असंगठित और कॉर्पोरेट क्षेत्रों के कर्मचारियों की तुलना में सरकारी कर्मचारी एक विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग हैं।

अदालत ने सवाल किया, "सरकारी कर्मचारियों को अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) के आधार पर रखा जाना चाहिए। तभी वे जवाबदेह होंगे। वे हाई कोर्ट या जिला अदालतों में भर्ती होते हैं, फिर सचिवालय चले जाते हैं और वहां दिन भर में बस 3 पेज टाइप करते हैं। अगर सरकारी कर्मचारी ईमानदार होते, तो देश में मुकदमों की संख्या कम हो जाती। सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद भी उनके परिवारों को पेंशन मिलती रहती है। ऐसे में सरकारी कर्मचारियों की जवाबदेही कहां है?"

12 अक्टूबर को, हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव को 'अदालत की अवमानना' (contempt of court) का नोटिस जारी किया था। यह नोटिस सुप्रीम कोर्ट में पंजाब सरकार की अपील दायर करने के संबंध में तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने के कारण दिया गया था।

अदालत ने वित्त सचिव द्वारा जारी उस निर्देश पर भी संज्ञान लिया, जिसमें विभाग प्रमुखों से कहा गया था कि वे 3 अगस्त के फैसले को लागू न करें।

12 अक्टूबर को अदालत ने आदेश दिया, "हमारी राय है कि आवेदकों ने प्रथम दृष्टया ऐसे दस्तावेज पेश किए हैं जो इस मामले को 'आपराधिक अवमानना' (criminal contempt) के दायरे में लाते हैं। हालांकि, प्रतिवादियों (जिन पर अवमानना ​​का आरोप है) का पक्ष सुनने से पहले, उन्हें औपचारिक नोटिस दिया जाना आवश्यक है। इसलिए, आपराधिक अवमानना ​​मामले में प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया जाता है।"

आज, हाई कोर्ट ने आपराधिक अवमानना ​​मामले की सुनवाई टाल दी, क्योंकि अदालत को सूचित किया गया कि सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार की उस चुनौती पर सुनवाई चल रही है, जो अवमानना ​​कार्यवाही के आदेशों के खिलाफ दायर की गई थी।

सिविल अवमानना ​​मामले में, हाई कोर्ट ने 3 अगस्त के फैसले के अनुसार अनुपालन रिपोर्ट (compliance report) दाखिल न करने पर मुख्य सचिव पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था।

इन दोनों कार्यवाहियों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। आज अदालत ने सिविल और आपराधिक अवमानना, दोनों ही मामलों में अंतरिम राहत प्रदान कर दी।

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Supreme Court stays contempt case against Punjab Chief Secretary in DA case, seeks payment plan from government