सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की एक याचिका खारिज कर दी। इस याचिका में दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें कश्मीरी मानवाधिकार कार्यकर्ता खुर्रम परवेज़ को 'गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम' (UAPA) के तहत दर्ज एक मामले में ज़मानत दी गई थी [नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी बनाम खुर्रम परवेज़]।
न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदेश और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
यह मामला लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़ी एक कथित साजिश से जुड़ा है, जिसमें 'ओवरग्राउंड वर्कर्स' (OGW) के नेटवर्क के जरिए लोगों को भर्ती करने और आतंकवादी गतिविधियों को समर्थन देने का आरोप है।
NIA ने 22 नवंबर 2021 को परवेज़ को गिरफ्तार किया था। एजेंसी के अनुसार, उसने लोगों को भर्ती किया, सुरक्षा बलों और सैन्य ठिकानों के बारे में जानकारी जुटाई, और 2016 में आतंकी कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद विरोध-प्रदर्शनों को भड़काने में मदद की।
दिसंबर 2024 में ट्रायल कोर्ट ने उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी, क्योंकि अदालत को लगा कि उस पर लगे आरोप प्रथम दृष्टया (prima facie) सही हैं। परवेज़ ने दिल्ली हाई कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी।
दिल्ली हाई कोर्ट ने गौर किया कि परवेज़ लगभग साढ़े चार साल से हिरासत में है, और फिलहाल ट्रायल के जल्द खत्म होने की कोई उम्मीद नहीं है। कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उसके अधिकारों को, UAPA की धारा 43D(5) के तहत जमानत पर लगी पाबंदियों के साथ तौलना होगा, और हो सकता है कि उसके अधिकार इन पाबंदियों पर भारी पड़ जाएं।
मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय दिए बिना, हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया और कुछ शर्तों के साथ उसे जमानत दे दी।
NIA ने सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी, लेकिन आज सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अपील खारिज कर दी।
NIA की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) राजा ठाकरे पेश हुए।
परवेज़ की ओर से सीनियर एडवोकेट तनवीर अहमद मीर पेश हुए, जिनके साथ वकील स्वाति खन्ना, मो. यासीन, रमिंदर कौर, इरफान अली और शहज़ाद खान भी मौजूद थे।
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Supreme Court upholds bail to Kashmiri rights activist Khurram Parvez in UAPA case