The Indian Express, The New Indian Express  
वादकरण

न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने दक्षिण भारत के बाहर अपने कार्यक्रमो पर रोक लगाने के बॉम्बे HC के आदेश को सुप्रीम कोर्ट मे चुनौती दी

यह मामला इस विवाद से जुड़ा है कि क्या 'द न्यू इंडियन एक्सप्रेस' ने मुंबई में एक कार्यक्रम आयोजित करके 'द इंडियन एक्सप्रेस' के साथ हुए ट्रेडमार्क समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया है।

Bar & Bench

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के प्रकाशक, एक्सप्रेस पब्लिकेशन (मदुरै) ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है, जिसने उसे पांच दक्षिणी राज्यों और कुछ केंद्र शासित प्रदेशों के बाहर प्रचार गतिविधियों के लिए न्यू इंडियन एक्सप्रेस ट्रेडमार्क का उपयोग करने से रोक दिया था।

सोमवार को जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने हाई कोर्ट के फैसले में दखल देने से अनिच्छा जताई। बेंच ने कहा कि हाई कोर्ट ने एक विस्तृत आदेश पारित किया है।

हालांकि, 'न्यू इंडियन एक्सप्रेस' की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकीलों के अनुरोध पर कोर्ट ने मामले की सुनवाई दिवाली की छुट्टियों के बाद तक के लिए टाल दी। वकीलों ने अपने पक्ष के समर्थन में कुछ अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने की अनुमति मांगी थी।

Justices Pardiwala and Manmohan

इन दो समाचार पत्र समूहों के बीच विवाद की शुरुआत 1991 में समाचार पत्र जगत के दिग्गज रामनाथ गोयनका के निधन के बाद हुई। इसके चलते उनके दत्तक पुत्र विवेक गोयनका और पोते मनोज कुमार सोंथालिया के बीच 'इंडियन एक्सप्रेस' के कारोबार पर नियंत्रण को लेकर मतभेद पैदा हो गए।

अंततः, 5 फरवरी 1995 को एक 'मेमोरेंडम ऑफ सेटलमेंट' (MOS) के जरिए इस विवाद को सुलझाया गया। 16 अप्रैल 1997 को मद्रास उच्च न्यायालय ने इसे एक 'सहमति डिक्री' (consent decree) के रूप में दर्ज किया।

इस समझौते के तहत, 'इंडियन एक्सप्रेस' शीर्षक (title) का स्वामित्व 'इंडियन एक्सप्रेस' समूह के पास रहा। वहीं, मदुरै स्थित समूह को दक्षिण के पांच राज्यों और कुछ केंद्र शासित प्रदेशों में अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्र प्रकाशित करने के लिए 'द न्यू इंडियन एक्सप्रेस' (The New Indian Express) नाम का उपयोग करने की अनुमति दी गई।

बाद में, कुछ पूरक समझौतों (supplemental agreements) के जरिए इस समझौते में बदलाव किए गए। इनमें अगस्त 2005 में हुआ एक समझौता भी शामिल था, जिसने मदुरै समूह को समाचार प्रसारित करने के लिए इंटरनेट पर 'द न्यू इंडियन एक्सप्रेस' नाम का उपयोग करने की अनुमति दी।

कानूनी विवाद का नया दौर तब शुरू हुआ, जब सितंबर 2024 में 'द न्यू इंडियन एक्सप्रेस' ने 'मुंबई डायलॉग्स' (Mumbai Dialogues) नाम से एक कार्यक्रम आयोजित किया।

'इंडियन एक्सप्रेस' समूह ने आरोप लगाया कि मुंबई में इस कार्यक्रम का आयोजन और प्रचार करना, समझौते के तहत तय की गई क्षेत्रीय पाबंदियों का उल्लंघन है।

इसके बाद, उन्होंने मदुरै स्थित प्रकाशक के खिलाफ रोक (injunction) लगाने की मांग करते हुए बॉम्बे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

13 नवंबर 2025 को, जस्टिस आर.आई. छागला ने 'इंडियन एक्सप्रेस' समूह के पक्ष में एक अंतरिम रोक (interim injunction) आदेश जारी किया।

इस आदेश को बॉम्बे उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ (Division Bench) के समक्ष चुनौती दी गई।

15 जून 2026 को, जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजूषा देशपांडे की खंडपीठ ने इस रोक को बरकरार रखा और 'एक्सप्रेस पब्लिकेशन्स (मदुरै) प्राइवेट लिमिटेड' द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया।

खंडपीठ ने माना कि मदुरै स्थित प्रकाशक के पास 'द न्यू इंडियन एक्सप्रेस' नाम का उपयोग करने के केवल सीमित अधिकार हैं। वे समझौते में तय किए गए क्षेत्रों के बाहर अपने प्रकाशन के प्रचार के लिए किसी स्वतंत्र अधिकार का दावा नहीं कर सकते।

न्यायालय ने प्रकाशक के उस तर्क को भी खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि समझौते में केवल तय क्षेत्रों के बाहर समाचार पत्र प्रकाशित करने पर रोक थी, न कि प्रचार गतिविधियों पर। अदालत ने इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी अपीलेट बोर्ड (IPAB) के जून 2015 के एक आदेश का भी हवाला दिया, जिसने 'न्यू इंडियन एक्सप्रेस' ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन के क्षेत्रीय दायरे को सीमित कर दिया था।

डिवीजन बेंच ने इस दलील को भी खारिज कर दिया कि दिल्ली हाई कोर्ट में पहले चली कार्यवाही के कारण 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप अपने दावों को आगे नहीं बढ़ा सकता।

अदालत ने कहा कि पिछली कार्यवाही के अंतरिम निष्कर्षों को 'रेस ज्यूडिकाटा' (res judicata) नहीं माना जा सकता, क्योंकि पक्षों के अधिकारों पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ था।

मदुरै स्थित प्रकाशक ने अब डिवीजन बेंच के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

सुप्रीम कोर्ट में 'न्यू इंडियन एक्सप्रेस' की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी और श्याम दीवान पेश हुए।

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The New Indian Express moves Supreme Court against Bombay HC barring its events outside South India