सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) को निर्देश दिया कि 'थ्री-लैंग्वेज फ़ॉर्मूला' के तहत 7वीं, 8वीं और 9वीं कक्षा के छात्रों को दी गई छूट को 6वीं कक्षा के छात्रों के लिए भी बढ़ाया जाए [यशिका भंडारी जैन और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य]।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस जोयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने छूट के खिलाफ़ केंद्र सरकार के रुख को खारिज कर दिया। सरकार ने कहा था कि CBSE के तहत आने वाले लगभग 99 प्रतिशत स्कूल इस नीति को लागू करने के लिए तैयार हैं।
कोर्ट के तय किए गए अंतरिम ढांचे के तहत, छात्र अपने पाठ्यक्रम के हिस्से के तौर पर तीसरी भाषा की पढ़ाई जारी रखेंगे, लेकिन उन्हें इस विषय में अनिवार्य कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी, और न ही इसकी वजह से उन्हें अगली कक्षा में प्रमोट करने या सर्टिफ़िकेट देने में कोई रुकावट आएगी।
यह निर्देश माता-पिता और शिक्षकों की ओर से दायर याचिकाओं पर दिया गया, जिसमें 15 मई, 2026 को जारी CBSE के एक सर्कुलर को चुनौती दी गई थी।
इस सर्कुलर में CBSE की पढ़ाई की योजना को 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020' (NEP) और 'स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचा 2023' (NCF-SE) के अनुरूप बनाया गया था। इसमें यह अनिवार्य किया गया था कि कक्षा 6 से 9 तक के छात्र तीन भाषाएं पढ़ें, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल हों।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि इस अचानक आए आदेश ने CBSE के 9 अप्रैल, 2026 के उस पुराने सर्कुलर को पलट दिया, जिसमें तीसरी भाषा की अनिवार्यता को 2029-30 तक के लिए टाल दिया गया था।
उन्होंने कहा कि बीच सत्र में यह आदेश लागू करने से पढ़ाई-लिखाई में भारी दिक्कतें आईं, क्योंकि प्रशिक्षित भाषा शिक्षकों और पाठ्यपुस्तकों की भारी कमी थी। उन्होंने यह भी कहा कि इससे सेकेंडरी बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के साथ अनुचित व्यवहार हुआ।
मई में नोटिस जारी करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने इस अचानक लागू किए गए आदेश से जुड़ी प्रशासनिक और लॉजिस्टिकल दिक्कतों की ओर इशारा किया था।
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Three-language policy: Supreme Court directs CBSE to grant class 6 same exemption allowed to class 7