Calcutta High Court  
वादकरण

TMC नेता के वकील पर जज के चैंबर में घुसने की कोशिश का आरोप; कलकत्ता HC के चीफ जस्टिस से जांच की मांग की, खुद को बेगुनाह बताया

तृणमूल कांग्रेस नेता सुजीत बोस की ज़मानत याचिका पर जस्टिस सुव्रा घोष के सामने एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड के तौर पर पेश हुईं मौसमी भौवाल ने CCTV फ़ुटेज को सुरक्षित रखने की भी मांग की है।

Bar & Bench

कलकत्ता हाईकोर्ट की जस्टिस सुव्रा घोष के इस आरोप के बाद कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक नेता के वकील और जज के निजी सचिव ने मिलीभगत करके उनके चैंबर से केस के रिकॉर्ड तक पहुँचने की कोशिश की, उस वकील ने अब हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर जाँच की माँग की है।

जिन वकील की बात हो रही है, मौसमी भौवाल, उन्होंने जस्टिस घोष के सामने तृणमूल कांग्रेस नेता सुजीत बोस की ज़मानत अर्ज़ी के लिए एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड के तौर पर पेश हुईं। उन्होंने जज के चैंबर के सामने वाले कमरे के CCTV फ़ुटेज को सुरक्षित रखने की भी मांग की है।

Justice Suvra Ghosh

जस्टिस घोष ने 17 अगस्त को बोस की ज़मानत अर्ज़ी पर फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था। बोस हाई कोर्ट में सेशंस कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दे रहे थे, जिसमें म्युनिसिपल भर्ती घोटाले से जुड़े एक मामले में उनकी ज़मानत अर्ज़ी खारिज कर दी गई थी। इस मामले की जांच एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) कर रही है।

17 अगस्त को मामले में फ़ैसला सुरक्षित रखने के बाद, जस्टिस घोष ने 19 अगस्त को खुद को मामले से अलग कर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि बोस के वकील और जज के प्राइवेट सेक्रेटरी ने उनके चैंबर से केस के रिकॉर्ड तक पहुँचने की कोशिश की थी। जज के मुताबिक, जब वह कोर्टरूम में थीं, तो बोस की तरफ़ से पेश होने वाले वकीलों में से एक और जज के प्राइवेट सेक्रेटरी 18 अगस्त को जज के चैंबर में गए और उनके स्टाफ़ से केस के रिकॉर्ड लाने को कहा। स्टाफ़ ने मना कर दिया, जिसके बाद दोनों ने कथित तौर पर चैंबर में घुसने और रिकॉर्ड देखने की ज़िद की।

उन्होंने आगे कहा कि बोस के रिकॉर्ड तक पहुँचने की "जानबूझकर की गई कोशिश" को देखते हुए, उन्होंने मामले को अपनी बेंच से हटाना सही समझा।

हालांकि जज ने किसी वकील का नाम नहीं लिया, लेकिन भौवाल ने चीफ़ जस्टिस को लिखे अपने पत्र के साथ लगे एक हलफ़नामे में 18 अगस्त को हुई घटना के बारे में अपना पक्ष रखा है।

हलफ़नामे के मुताबिक, उस दिन दोपहर करीब 2:25 बजे उन्हें एडवोकेट नाहिद अहमद ने बताया - जो सीनियर एडवोकेट सब्यसाची बनर्जी के जूनियर हैं और बोस की तरफ़ से पेश हुए थे - कि कोर्टरूम नंबर 15 में तैनात कोर्ट ऑफ़िसर चाहती हैं कि वह वहाँ आकर फ़ैसलों की कॉपी ले लें। कहा जाता है कि अहमद ने यह बात फ़ोन कॉल और WhatsApp मैसेज के ज़रिए बताई थी।

हलफ़नामे में कोर्ट ऑफ़िसर की पहचान जस्टिस घोष की पर्सनल सेक्रेटरी शिखा मुखर्जी के तौर पर की गई है। वह दोपहर करीब 2:35 बजे कोर्टरूम नंबर 15 में भौवाल से मिलीं और उनसे सेस्कुइसेन्टेनरी बिल्डिंग (Sesquicentenary Building) साथ चलने को कहा, ताकि वह बता सकें कि कौन से फ़ैसले चाहिए।

भौवाल ने बताया है कि इसके बाद मुखर्जी उन्हें जजों के कॉरिडोर और 18 अगस्त को दोपहर 2:40 से 2:42 बजे के बीच जस्टिस घोष के चैंबर के सामने वाले कमरे में ले गईं। वहाँ कोर्ट के दो स्टाफ़ सदस्य मौजूद थे। हलफ़नामे में कहा गया है कि इसके बाद मुखर्जी ने कोर्ट स्टाफ़ से केस का रिकॉर्ड लाने को कहा। भोवाल ने अपने बर्ताव के बारे में बताते हुए हलफनामे में कहा, "मैंने एक शब्द भी नहीं कहा।" बताया जाता है कि ड्यूटी पर मौजूद कोर्ट स्टाफ ने मुखर्जी से कहा कि फाइल जस्टिस घोष के पास है और उन्हें नहीं दिखाई जा सकती।

हलफनामे के अनुसार, भोवाल "बिना कुछ कहे तुरंत उस जगह से चली गईं।"

भोवाल का दावा है कि बाद में मुखर्जी ने सेस्क्यूसेंटेनरी बिल्डिंग के कॉरिडोर में उनसे उन दो फैसलों की कॉपी मांगी, जिनका ज़िक्र सीनियर एडवोकेट बनर्जी ने सुनवाई के दौरान किया था। भोवाल का कहना है कि उन्होंने फिर जस्टिस घोष द्वारा 16 दिसंबर, 2024 और 19 दिसंबर, 2025 को दोपहर 3:10 बजे पारित आदेशों की कॉपी उन्हें सौंप दीं।

भोवाल ने हलफनामे में कहा है, "मैंने कभी भी किसी गलत मकसद से केस का रिकॉर्ड बाहर निकालने के लिए कोर्ट ऑफिसर के साथ मिलीभगत नहीं की। मैंने कभी भी 18 अगस्त, 2026 को दोपहर 2:40 बजे से 2:42 बजे के बीच माननीय जस्टिस सुव्रा घोष के चैंबर में घुसने की कोशिश नहीं की।"

उन्होंने आगे कहा कि उन्हें बाद में अहमद से पता चला कि मुखर्जी ने 18 अगस्त को बनर्जी के रजिस्टर्ड क्लर्क को फोन करके फैसलों की कॉपी मांगी थी। अपनी बात के समर्थन में अहमद के साथ हुई व्हाट्सएप बातचीत और कॉल लॉग के स्क्रीनशॉट हलफनामे के साथ लगाए गए हैं।

चीफ जस्टिस को लिखे अपने पत्र में भोवाल ने कहा है कि यह मामला अचानक 19 अगस्त को जस्टिस घोष के सामने "टू बी मेंशन्ड" (ज़िक्र किए जाने वाले मामलों) की लिस्ट में आया और जज ने उनकी मौजूदगी में कुछ ऐसी बातें कहीं जिनसे उनके करियर पर बुरा असर पड़ सकता था।

भोवाल ने लिखा है, "ऊपर बताई गई बातों और हालात को देखते हुए, मैं आपसे विनम्रतापूर्वक जांच करने का अनुरोध करती हूं, ताकि मैं अपनी बेगुनाही साबित कर सकूं। माननीय जस्टिस सुव्रा घोष के चैंबर के सामने वाले कमरे का सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखा जाए।"

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