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वादकरण

‘नो कास्ट, नो रिलीजन’ सर्टिफिकेट चाहिए? पहले धर्म छोड़ो: मद्रास हाईकोर्ट

पिटीशनर ने कहा कि हालांकि उसके माता-पिता हिंदू धर्म के हैं, लेकिन वह अधिकारियों से ऐसा सर्टिफिकेट चाहता है जिसमें जाति या धर्म का ज़िक्र न हो।

Bar & Bench

मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने कहा है कि “नो कास्ट, नो रिलीजन” सर्टिफिकेट चाहने वाले व्यक्ति को पहले फॉर्मली अपना धर्म छोड़ना होगा। [चेल्लामणिकम बनाम प्रिंसिपल सेक्रेटरी]

जस्टिस कृष्णन रामास्वामी ने कहा,

"जब तक पिटीशनर हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार अपना धर्म नहीं छोड़ देता, तब तक रेस्पोंडेंट पिटीशनर की रिक्वेस्ट पर विचार नहीं कर सकते। जब ऐसी स्थिति हो, तो ऐसा सर्टिफिकेट जारी करने का कोई मतलब नहीं बनता।"

Justice Krishnan Ramasamy

कोर्ट ने यह ऑर्डर चेल्लामनिकम की फाइल की गई पिटीशन में दिया, जिसमें 9 जुलाई, 2025 को थिरुप्पथुर तालुक के तहसीलदार के ऑर्डर को चैलेंज किया गया था, जिसमें सर्टिफिकेट जारी करने से मना कर दिया गया था।

पिटीशनर ने कहा कि हालांकि उसके माता-पिता हिंदू धर्म के हैं, लेकिन वह अधिकारियों से ऐसा सर्टिफिकेट चाहता था जिसमें जाति या धर्म का ज़िक्र न हो। उसकी एप्लीकेशन इस आधार पर रिजेक्ट कर दी गई कि ऐसे सर्टिफिकेट जारी करने की इजाज़त देने वाला कोई सरकारी ऑर्डर (GO) मौजूद नहीं है।

इस मामले की जांच करते हुए, कोर्ट ने पिटीशनर से पूछा कि क्या उसने अपना धर्म छोड़ दिया है। पिटीशनर ने 'नहीं' में जवाब दिया।

जस्टिस रामासामी ने कहा कि जब तक पिटीशनर हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार अपना धर्म नहीं छोड़ता, तब तक जाति और धर्म को छोड़कर सर्टिफिकेट की रिक्वेस्ट पर विचार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे धर्म छोड़ने का कोई सबूत पेश नहीं किया गया था।

इसे देखते हुए, कोर्ट ने तहसीलदार के ऑर्डर को रद्द करने से मना कर दिया और रिट पिटीशन खारिज कर दी। साथ ही, कोर्ट ने पिटीशनर को अपना धर्म छोड़ने और अधिकारियों के सामने सबूत जमा करने की आज़ादी दी। जज ने कहा कि अगर धर्म छोड़ने के सबूत के साथ नई एप्लीकेशन दी जाती है, तो अधिकारी उस पर विचार कर सकते हैं।

पिटीशनर की तरफ से एडवोकेट पी सुरेंद्रन ने पैरवी की।

राज्य की तरफ से एडवोकेट एस जयप्रिया ने पैरवी की।

[जजमेंट पढ़ें]

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Want ‘no caste, no religion’ certificate? Relinquish religion first: Madras High Court