पश्चिम बंगाल सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ याचिका दायर की, जिसमें कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव लड़ने के लिए अंतरिम ज़मानत दी गई थी।
राज्य की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच के सामने इस मामले को जल्द सुनवाई के लिए लिस्ट करने की मांग की।
मेहता ने कहा, "वह धारा 302 (हत्या) के मामले में आरोपी हैं। उन्हें चुनाव के लिए ज़मानत दी गई है। क्या मैं कल रिस्क ले सकता हूँ? बस यही कह रहा हूँ।"
हालाँकि, CJI कांत ने गुरुवार के लिए मामले को लिस्ट करने से इनकार कर दिया और कहा कि कोर्ट का बोर्ड पहले से ही बहुत लंबा है।
खास बात यह है कि CJI ने यह भी संकेत दिया कि कोर्ट राज्य की चुनौती पर विचार करने के पक्ष में नहीं है और सुनवाई के लिए आने पर अपील को खारिज कर देगा।
उन्होंने कहा, "हमारा बोर्ड बहुत लंबा है। हम इसे ज़रूर खारिज करेंगे, लेकिन सोमवार को करेंगे, कल नहीं।"
जब मेहता ने फिर से अनुरोध किया कि मामले को गुरुवार को लिस्ट किया जाए, तो CJI कांत ने जवाब दिया,
"नहीं। सोमवार को।"
प्रधान के खिलाफ़ छह मामले 2007 में नंदीग्राम ज़मीन अधिग्रहण के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा से जुड़े हैं और इनमें दंगा करने और हत्या के आरोप शामिल हैं। राज्य सरकार ने अपराधों की गंभीरता का हवाला देते हुए ज़मानत याचिकाओं का विरोध किया था।
नंदीग्राम उपचुनाव की ज़रूरत तब पड़ी जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता और पश्चिम बंगाल के मौजूदा मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने यह सीट छोड़ दी। अधिकारी ने विधानसभा चुनावों में नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटें जीती थीं, लेकिन उन्होंने भवानीपुर सीट अपने पास रखने का फ़ैसला किया, जिससे नंदीग्राम में सीट खाली हो गई।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने 29 सितंबर को प्रधान को छह आपराधिक मामलों में अंतरिम ज़मानत दे दी थी, जिससे उन्हें 6 अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम उपचुनाव में हिस्सा लेने की इजाज़त मिल गई।
हाई कोर्ट ने यह राहत इस बात को ध्यान में रखते हुए दी कि प्रधान ने अपनी गिरफ़्तारी से पहले ही नामांकन दाखिल कर दिया था और ये मामले लगभग 19 साल पुराने थे।
हाई कोर्ट ने पाया कि पुलिस के पास इन मामलों में कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के मौके थे, लेकिन उन्होंने प्रधान को उनके नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद ही गिरफ़्तार किया। कोर्ट ने कहा कि प्रधान को चुनाव लड़ने का मौका दिया जा सकता है और इसी मकसद से उन्हें अंतरिम ज़मानत पर रिहा कर दिया।
यह अंतरिम ज़मानत कुछ शर्तों के साथ दी गई है, जिसके तहत प्रधान को 21 अक्टूबर को ट्रायल कोर्ट के सामने सरेंडर करना होगा।
प्रधान को अंतरिम ज़मानत देने वाले हाई कोर्ट के इस आदेश को अब पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
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