राज्य सरकार ने बुधवार को कर्नाटक हाई कोर्ट को भरोसा दिलाया कि वह सिनेमा टिकटों की कीमत पर हाल ही में लागू किए गए 2% सेस (उपकर) को वसूल न कर पाने के मामले में अभी सिनेमा ऑपरेटरों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं करेगी [मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया और अन्य बनाम कर्नाटक राज्य]।
जस्टिस एचटी नरेंद्र प्रसाद उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे थे जिनमें 'कर्नाटक सिने एंड कल्चरल एक्टिविस्ट्स (वेलफेयर) एक्ट, 2024', 2026 में इस एक्ट में किए गए संशोधनों और सिनेमा टिकट की कमाई पर सेस (उपकर) लगाने और वसूलने के नियमों की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी।
इस सेस का इस्तेमाल सिनेमा वर्कर्स के कल्याण के लिए किया जाना है। यह कानून आज (30 सितंबर) से लागू होने वाला था।
आज की सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने सुझाव दिया कि अभी सिनेमा ऑपरेटरों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई न की जाए। कोर्ट ने ध्यान दिलाया कि कानून की धारा 9 में सेस के संबंध में हर महीने नियमों का पालन करने की बात कही गई है।
जज ने राज्य के वकील से कहा, "एक्ट की वैधता को चुनौती दी गई है। तब तक (अगली सुनवाई तक) कोई सख्त कार्रवाई न करें।"
इसके जवाब में, राज्य ने भरोसा दिलाया कि सेस वसूली के संबंध में अगली सुनवाई तक सिनेमा ऑपरेटरों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी।
आज जारी अपने आदेश में कोर्ट ने दर्ज किया, "AAG ने आपत्ति दर्ज कराने के लिए दो हफ़्ते का समय मांगा और कहा कि तब तक वे याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं करेंगे।"
कोर्ट में ये याचिकाएं मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (MAI), PVR INOX लिमिटेड, PVR INOX के शेयरहोल्डर प्रतीक चौहान और सिनेमा थिएटर 'विनायका चित्रमंदिरा' ने दायर की हैं।
विनायका चित्रमंदिरा की ओर से पेश वकील KV धनंजय ने आज कहा कि 'कर्नाटक सिने एंड कल्चरल एक्टिविस्ट्स (वेलफेयर) एक्ट, 2024' में साफ़ तौर पर यह नहीं कहा गया है कि याचिकाकर्ताओं को सेस (उपकर) देना होगा।
उन्होंने बताया कि यह कानून आज से लागू हो गया है और याचिकाकर्ताओं को अगले महीने अपना स्टेटमेंट जमा करना होगा।
वकील ने यह भी कहा कि इस कानून के तहत रजिस्ट्रेशन के लिए कोई तय फ़ॉर्म भी नहीं है। उन्होंने इस कानून के लागू होने पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की।
राज्य की ओर से पेश एडिशनल एडवोकेट जनरल भानु प्रकाश ने कहा कि सेस वसूली के सिलसिले में याचिकाकर्ताओं को पहले भेजे गए नोटिस राज्य सरकार वापस ले रही है।
AAG ने कहा, "हमें चार-पांच दिन का समय दें। मैं आपत्तियां (objections) दाखिल करूंगा और उस पर सुनवाई करके मामला निपटाया जा सकेगा। हम कोई कार्रवाई नहीं करेंगे।"
उन्होंने कोर्ट से यह भी अनुरोध किया कि वे कानून पर रोक लगाने का आदेश न दें।
इसलिए, कोर्ट ने कानून पर साफ़ तौर पर रोक तो नहीं लगाई, लेकिन राज्य सरकार के इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया कि सेस वसूल न कर पाने की स्थिति में अभी सिनेमा ऑपरेटरों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी।
इस मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर को होगी।
मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया की ओर से सीनियर एडवोकेट उदय होल्ला पेश हुए।
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