गुजरात हाई कोर्ट ने बुधवार को एक कपड़ा व्यापारी के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला रद्द कर दिया। व्यापारी पर आरोप था कि उसने ऐसी साड़ियाँ बेचीं जिनके पल्लू पर गौतम बुद्ध की तस्वीरें बनी थीं, जिससे धार्मिक भावनाएँ आहत हुईं [भरतभाई हिरजीभाई शंकर बनाम गुजरात राज्य]।
जस्टिस पीएम रावल ने फैसला सुनाया कि किसी देवता की कलात्मक तस्वीर वाले कपड़े बेचे जाने को अपने आप जानबूझकर की गई दुर्भावनापूर्ण हरकत नहीं माना जा सकता।
कोर्ट ने कहा, "किसी देवता या पूजनीय प्रतीक की कलात्मक तस्वीर वाले कपड़ों को छापना या बेचना - भले ही वे तस्वीर कपड़े के निचले हिस्से या पल्लू के पास हों - अपने आप में जानबूझकर की गई दुर्भावनापूर्ण हरकत या सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने की सोची-समझी कोशिश नहीं मानी जा सकती।"
सिर्फ़ ऐसे टेक्सटाइल मटीरियल को बेचना जिन पर किसी देवता की कलात्मक तस्वीर बनी हो—भले ही वह तस्वीर निचले किनारे या पल्लू के पास हो—इसे अपने-आप जान-बूझकर की गई दुर्भावनापूर्ण हरकत नहीं माना जा सकता।गुजरात उच्च न्यायालय
कोर्ट ने कहा कि ऐसी कमर्शियल गतिविधियों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 295A के तहत धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का अपराध मानना, बिना किसी साबित हो सकने वाले इरादे के, जायज़ नहीं है।
कोर्ट ने भरतभाई हिरजीभाई शंकर की याचिका पर यह फ़ैसला सुनाया। शंकर ने 2018 में कोर्ट में याचिका दायर करके सूरत पुलिस द्वारा 2017 में दर्ज किए गए एक आपराधिक मामले को रद्द करने की मांग की थी। यह मामला 'समस्त युवा अंबेडकर समाज' के अध्यक्ष की शिकायत पर दर्ज किया गया था।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सूरत में व्यापारी भगवान गौतम बुद्ध की छपी हुई तस्वीरों वाली साड़ियाँ और अन्य कपड़े बेच रहे थे।
शिकायत में कहा गया था कि ऐसी साड़ियों की बिक्री से देवता का अपमान होता है और अंबेडकर समुदाय के लोगों की धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुँचती है।
हालाँकि, कोर्ट का मानना था कि ऐसा कुछ भी नहीं था जिससे किसी धर्म या किसी खास वर्ग की धार्मिक मान्यताओं का अपमान करने की कोशिश का संकेत मिले।
कोर्ट ने कहा, "याचिकाकर्ता एक कमर्शियल व्यापारी है जो बाज़ार के मौजूदा ट्रेंड और डिज़ाइन के आधार पर साड़ियों और ड्रेस मटीरियल के व्यापार का सामान्य काम करता है।"
कोर्ट ने फ़ैसला सुनाया कि इस मामले में IPC की धारा 295A के मुख्य तत्व - खासकर धार्मिक भावनाओं को भड़काने का "जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण इरादा" - पूरी तरह से नदारद हैं।
इसलिए, कोर्ट ने आरोपी के ख़िलाफ़ आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।
याचिकाकर्ता (आरोपी व्यापारी) की ओर से वकील राजेश के. कनानी पेश हुए।
राज्य की ओर से एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के.एम. अंतानी पेश हुए। एक अन्य प्रतिवादी की ओर से वकील एन.के. मजूमदार पेश हुए।
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