सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। यह याचिका 'इंडियन एक्सप्रेस' की उस रिपोर्ट के आधार पर दायर की गई है, जिसमें कहा गया था कि भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने मतदाता सूची के 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) को लेकर कई फैसले लिए थे, जबकि तीन में से दो चुनाव आयुक्तों ने इन फैसलों पर आपत्ति जताई थी।
वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दायर याचिका में मांग की गई है कि चुनाव आयुक्तों के बहुमत की सहमति के बिना ECI द्वारा लिए गए सभी फैसलों को गैर-कानूनी और शून्य घोषित किया जाए।
याचिका में मांग की गई है, "प्रतिवादी नंबर 3 (CEC ज्ञानेश कुमार) के तहत पूरे आयोग की सहमति के बिना या चुनाव आयुक्तों की बहुमत राय के खिलाफ (CEC और अन्य EC अधिनियम, 2023 की धारा 18 के तहत) शुरू किए गए, मंजूर किए गए या लागू किए गए सभी फैसलों, दिशानिर्देशों, आदेशों और सॉफ्टवेयर में बदलावों को असंवैधानिक, अधिकार क्षेत्र से बाहर और शुरू से ही शून्य घोषित किया जाए।"
याचिकाकर्ता ने CEC ज्ञानेश कुमार, सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर मनीष गर्ग और ECI की डायरेक्टर जनरल (सूचना प्रौद्योगिकी) सीमा खन्ना के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है।
याचिका में अनुरोध किया गया है, "सक्षम कानूनी प्राधिकरण को उचित निर्देश जारी किए जाएं कि वे प्रतिवादी नंबर 3, 5, 6 और आधिकारिक कर्तव्य का जानबूझकर उल्लंघन करने के दोषी पाए गए अन्य सभी अधिकारियों के खिलाफ 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950' की धारा 32 के तहत शिकायतें दर्ज करें और मुकदमा शुरू करें।"
याचिका के अनुसार, आधिकारिक फाइलों से पता चला है कि 10 महीने की अवधि (नवंबर 2025 – अगस्त 2026) के दौरान, दो चुनाव आयुक्तों—डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी—ने आयोग के नाम पर लिए गए और लागू किए गए एकतरफा, अनधिकृत और गैर-कानूनी फैसलों के खिलाफ कम से कम 14 अलग-अलग मौकों पर (जिसमें एक ही दिन में चार बार शामिल है) औपचारिक रूप से लिखित असहमति और आपत्तियां दर्ज कराईं
याचिकाकर्ता ने SIR के दौरान मतदाता सूची से 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने की न्यायिक जांच आयोग या विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने की भी मांग की है।
खास बात यह है कि याचिका में 'मतदाता पंजीकरण नियम, 1960' के तहत निर्धारित कानूनी फॉर्म 6 को बहाल करने और सभी पात्र वयस्कों को मूल कानूनी आवश्यकताओं के आधार पर मतदाता के रूप में पंजीकरण करने की अनुमति देने की भी मांग की गई है।
यह याचिका वकील चांद कुरैशी के माध्यम से दायर की गई थी।
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