Supreme Court and Election Commission of india  
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सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर ECI नियुक्ति कानून की वैधता पर आए खंडित फैसले को वापस लेने की मांग

CJI कांत ने एप्लीकेशन को लिस्ट करने की मांग वाली रिक्वेस्ट पर कहा, "हम इसकी जांच करेंगे और फैसला लेंगे।"

Bar & Bench

सुप्रीम कोर्ट में एक अर्ज़ी दायर की गई है, जिसमें 'मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023' को चुनौती देने वाली याचिकाओं को बड़ी बेंच के पास भेजने के मामले में हाल ही में आए बंटे हुए फ़ैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की गई है।

सीनियर वकील गोपाल शंकरनारायणन ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच के सामने यह अर्ज़ी पेश की।

अर्ज़ी पर सुनवाई के लिए उसे लिस्ट करने की मांग पर CJI कांत ने कहा, "हम इसकी जांच करेंगे और इस पर फ़ैसला लेंगे।"

CJI Surya Kant, Justice Joymalya Bagchi, Justice V Mohana

शंकरनारायणन ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने पहले जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने इस अर्ज़ी का ज़िक्र किया था।

सीनियर वकील ने कहा, "मुख्य चुनाव आयुक्त के मामले पर बंटा हुआ फ़ैसला आया है। हमने फ़ैसले को वापस लेने के लिए एक अर्ज़ी का ज़िक्र किया है। मैंने जस्टिस दीपांकर दत्ता की अगुवाई वाली बेंच के सामने इस मामले का ज़िक्र किया था। उन्होंने हमसे कहा कि हम इस मामले का ज़िक्र यहाँ करें क्योंकि यह मामला उनकी बेंच से हटा दिया गया है।"

Gopal Sankaranarayanan

जस्टिस दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने 23 सितंबर को 2023 के कानून की धारा 7 और 8 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अलग-अलग राय दी थी। इस कानून के तहत सिलेक्शन पैनल में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं। एक जुड़ी हुई याचिका में ज्ञानेश कुमार (जो अब मुख्य चुनाव आयुक्त हैं) और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू की नियुक्तियों को चुनौती दी गई थी।

केंद्र सरकार का कहना था कि इस मामले को बड़ी बेंच के पास भेजा जाना चाहिए क्योंकि इसमें संवैधानिक सवाल शामिल है। जस्टिस दत्ता ने इस अनुरोध को खारिज कर दिया, लेकिन जस्टिस शर्मा इससे सहमत थे।

राय में अंतर होने के बावजूद, बेंच ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) से आग्रह किया कि वे इस मामले की सुनवाई के लिए संविधान पीठ (Constitution Bench) गठित करने पर विचार करें।

Justice Dipankar Datta and Justice Satish Chandra Sharma

डॉ. जया ठाकुर की ओर से दायर एक अलग क्यूरेटिव याचिका भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

इसमें कहा गया है कि जस्टिस शर्मा, जिन्होंने मामले को बड़ी बेंच को भेजने की केंद्र सरकार की मांग का समर्थन किया था, को हितों के टकराव (conflict of interest) के कारण इस मामले की सुनवाई नहीं करनी चाहिए थी।

ठाकुर ने तर्क दिया है कि "पक्षपात और औचित्य को लेकर उचित आशंका" थी क्योंकि जस्टिस शर्मा के बेटे, सिद्धार्थ शर्मा, जुलाई 2024 से मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में भारत के चुनाव आयोग (ECI) के लिए स्टैंडिंग काउंसिल हैं।

ठाकुर ने पहले रिव्यू याचिका दायर करने से छूट मांगी है, यह तर्क देते हुए कि इसे उसी बेंच के सामने लिस्ट किया जाएगा और इस तरह "कोई उपयोगी उद्देश्य पूरा नहीं होगा"।

सीनियर एडवोकेट विजय हंसारिया, जिन्होंने याचिका तैयार की और इसे क्यूरेटिव अधिकार क्षेत्र के लिए उपयुक्त प्रमाणित किया, ने लिखा कि उन्हें "कोई संदेह नहीं है कि माननीय न्यायाधीश ने मामले का फैसला उसके गुण-दोष के आधार पर किया है।"

उन्होंने आगे कहा, "हालांकि, इस सिद्धांत पर कि न्याय न केवल होना चाहिए बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए, यह उचित होता कि माननीय जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा खुद को इन याचिकाओं की सुनवाई से अलग कर लेते।"

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Plea in Supreme Court seeks recall of split judgment on validity of ECI appointments law