कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मंगलवार को स्वतः संज्ञान लेते हुए एक जनहित याचिका (PIL) दर्ज करने का निर्देश दिया। इस याचिका में अन्य मुद्दों के साथ-साथ, निजी पक्षों के बीच चल रहे दीवानी विवादों में पुलिसकर्मियों के कथित हस्तक्षेप की जांच की जाएगी।
जस्टिस डी.के. सिंह और जस्टिस एच. शांति भूषण की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि पुलिस थानों का इस्तेमाल दीवानी अधिकारों (सिविल राइट्स) के फैसले लेने या दीवानी विवादों को सुलझाने के लिए नहीं किया जा सकता है।
अदालत ने कहा, "पुलिस थाने को दीवानी अधिकारों के फैसले लेने या संपत्ति, कब्जे, संविदागत दायित्वों (कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े वादों) या अन्य दीवानी दावों से जुड़े विवादों को सुलझाने की जगह नहीं बनाया जा सकता। पुलिस अधिकारियों को अपने कानूनी अधिकार क्षेत्र की सीमाओं के भीतर ही काम करना चाहिए।"
खंडपीठ ने जोर देकर कहा कि पुलिसकर्मियों को पुलिस थानों के भीतर ऐसी गतिविधियों को तुरंत बंद कर देना चाहिए।
अदालत ने यह निर्देश 'एडवोकेट्स एसोसिएशन, बेंगलुरु' (AAB) और 'कर्नाटक स्टेट बार काउंसिल' (KSBC) की ओर से दी गई जानकारी के बाद जारी किया। इसमें वकीलों - श्रीराम वी और मंजूनाथ की हाल ही में हुई हत्याओं, और वरिष्ठ वकील वेंकटरमनप्पा सन्नाक्की की हत्या के कथित प्रयास का जिक्र किया गया था।
AAB द्वारा उठाए गए मुद्दों में से एक यह था कि पुलिसकर्मी निजी पक्षों के बीच चल रहे दीवानी (सिविल) विवादों में दखल दे रहे हैं।
इस मुद्दे पर ध्यान देते हुए, पीठ ने कहा कि इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
अदालत ने कहा, "निजी पक्षों के बीच दीवानी विवादों में पुलिसकर्मियों का शामिल होना एक गंभीर मामला है। इस पर ध्यान देने और निर्देश जारी करने की जरूरत है, ताकि पुलिस थानों में हो रही ऐसी गैर-कानूनी गतिविधियों को तुरंत रोका जा सके।"
अदालत ने इस बात पर भी चिंता जताई कि उच्च पुलिस अधिकारियों द्वारा जारी निर्देशों और मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) का पालन नहीं किया जा रहा है।
पीठ ने कहा, "ऐसा लगता है कि उच्च पुलिस अधिकारियों द्वारा जारी निर्देशों और SOPs का पालन नहीं हो रहा है। बार-बार दिए गए निर्देश केवल कागजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए। यह सुनिश्चित करने के लिए उचित निगरानी होनी चाहिए कि इन निर्देशों को लागू किया जाए, और जो अधिकारी इनका उल्लंघन करते हैं, उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।"
हाई कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि राज्य सरकार और पुलिस विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए जाने चाहिए, ताकि पुलिस थानों में दीवानी विवादों को न लिया जाए।
अदालत ने कहा, "राज्य सरकार और पुलिस विभाग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी पुलिस थानों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं कि वे निजी पक्षों के बीच दीवानी विवादों को न लें और न ही उन्हें सुलझाने की कोशिश करें। ऐसा केवल तभी किया जा सकता है जब कोई ऐसा आपराधिक मामला सामने आए, जिसमें कानून के अनुसार कार्रवाई करना जरूरी हो।"
राज्य सरकार और पुलिस विभाग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी पुलिस थानों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं कि वे निजी पक्षों के बीच दीवानी विवादों को न लें और न ही उन्हें सुलझाने की कोशिश करें।कर्नाटक हाई कोर्ट
पीठ ने कहा कि पुलिसकर्मियों को दीवानी विवादों में दखल देने या पुलिस थानों में दीवानी मुकदमों को सुलझाने से रोकने वाले मौजूदा निर्देशों और SOPs को सख्ती से लागू करने के मामले पर अदालत को विचार करने की जरूरत है।
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Police stations should not entertain or settle civil disputes: Karnataka High Court