दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार रात उन 17 छात्रों और फ्रीलांस पत्रकारों को ज़मानत दे दी, जिन्हें दिल्ली पुलिस ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन के दौरान गिरफ़्तार किया था।
पटियाला हाउस कोर्ट के ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास (JMFC) अनिमेष कुमार ने रात 9 बजे से 9:25 बजे के बीच जारी चार अलग-अलग आदेशों में, कोर्ट में पेश किए गए 17 आरोपियों को ज़मानत दे दी।
दिल्ली पुलिस ने कोर्ट से उन्हें दो हफ़्ते के लिए ज्यूडिशियल रिमांड पर भेजने की मांग की थी।
कोर्ट ने कहा कि उन पर लगे आरोप गंभीर हैं और एक पुलिस अधिकारी घायल भी हुआ है। कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि हालांकि किसी भी व्यक्ति को शांतिपूर्ण विरोध करने का अधिकार है, लेकिन "ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों पर हमला करना एक गंभीर मामला है, जिसे शांतिपूर्ण विरोध की आड़ में मंज़ूरी नहीं दी जा सकती"।
हालांकि, जज कुमार ने कहा कि मौजूदा मामले में शामिल सभी अपराध - भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 132 (सरकारी कर्मचारी को उसके आधिकारिक कर्तव्य का पालन करने से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल का प्रयोग) के तहत सज़ा-योग्य अपराध को छोड़कर - ज़मानत के योग्य हैं।
कोर्ट ने यह भी गौर किया कि आरोपी युवा हैं और आदतन अपराधी नहीं हैं।
कोर्ट ने हर मामले में आदेश दिया, "यहां तक कि BNS की धारा 132 के तहत सज़ा-योग्य अपराध में भी अधिकतम 2 साल की ही सज़ा का प्रावधान है। आरोपी युवा हैं और आदतन अपराधी नहीं लगते। उनका पूरा करियर अभी बाकी है। इसलिए, मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, आरोपियों को 15,000 रुपये का ज़मानत बॉन्ड और उतनी ही राशि की एक ज़मानत (श्योरिटी) जमा करने की शर्त पर ज़मानत दी जाती है।"
आरोपी कम उम्र के हैं और आदतन अपराधी नहीं लगते। उनका पूरा करियर अभी बाकी है।पटियाला हाउस कोर्ट
दिल्ली पुलिस ने 5 अक्टूबर को अंशिका गुप्ता, करिश्मा मेहता, संजू, कुंजल, रुद्र प्रताप सिंह, रोहित, आदर्श, सनी देओल, ब्रजेश पांडे, अदनान बरमारे, अनुज भगत, बुद्धशील ठवरे, गजेंद्र सिंह, धर्मेंद्र, समर्थ सिंह, शेख यूनुस और अमन अग्रवाल को गिरफ़्तार किया था।
उन पर BNS की अलग-अलग धाराओं और 'पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाने से रोकने वाले कानून' की धारा 3 (सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाली शरारत) के तहत मामला दर्ज किया गया था।
बताया गया कि आरोपी एक गैर-कानूनी भीड़ का हिस्सा थे, जिसने ऐसी सार्वजनिक जगह को ब्लॉक कर दिया था जहाँ BNSS की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा (prohibitory order) लागू थी। हिरासत में लिए जाने के दौरान, उन्होंने कथित तौर पर पुलिस अधिकारियों के साथ बदसलूकी और मारपीट की, जिससे एक महिला कॉन्स्टेबल घायल हो गईं, और उन्होंने एक बस की खिड़की और पीछे का शीशा तोड़कर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाया।
उन्होंने कथित तौर पर सहयोग करने से भी इनकार किया और अपनी पहचान, माता-पिता और उम्र के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी।
आरोपियों की ओर से वकील साइमन फारूकी पेश हुए और कहा कि इन सभी अपराधों में सात साल से कम की सज़ा का प्रावधान है, इसलिए गिरफ़्तारी की ज़रूरत नहीं थी।
उन्होंने कहा कि किसी की भी व्यक्तिगत भूमिका नहीं बताई गई और लगभग 50 प्रदर्शनकारियों में से केवल 17 को ही गिरफ़्तार किया गया। अदालत को यह भी बताया गया कि कोई CCTV फुटेज पेश नहीं किया गया, आरोपी ज़्यादातर युवा छात्र थे जो असहमति जताने के अपने अधिकार का इस्तेमाल कर रहे थे, और हिरासत में रखने से उनके करियर को नुकसान पहुँचेगा।
मामले पर विचार करने के बाद, अदालत ने उन्हें ज़मानत दे दी।
अदालत ने निर्देश दिया कि ज़मानत पर रहने के दौरान वे कोई अपराध न करें, सही पता दें और अपने मोबाइल फ़ोन चालू रखें। जज ने कहा कि उन्हें अदालत में हर सुनवाई में शामिल होना होगा और अदालत की अनुमति के बिना भारत नहीं छोड़ना होगा।
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Protest against CEC Gyanesh Kumar: Delhi court grants bail to 17 students, journalists