पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने गुरुवार को पंजाब सरकार से राज्य में रेगुलर डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (DGP) की नियुक्ति की प्रक्रिया में तेज़ी लाने को कहा [निखिल थम्मन बनाम पंजाब राज्य और अन्य]।
चीफ़ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की डिवीज़न बेंच ने वकील निखिल थम्मन की याचिका पर यह आदेश दिया। थम्मन ने कहा था कि राज्य में 2022 से पुलिस फ़ोर्स का कोई रेगुलर हेड नहीं है।
कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, DGP का चयन राज्य सरकार को उन तीन सबसे सीनियर अधिकारियों में से करना होता है, जिन्हें UPSC ने पुलिस फ़ोर्स की कमान संभालने के लिए उनके सर्विस के समय, बहुत अच्छे रिकॉर्ड और अनुभव के आधार पर प्रमोशन के लिए चुना है।
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि कम से कम दो साल का कार्यकाल पुलिस लीडरशिप में स्थिरता और निरंतरता लाने और सबसे ऊँचे पद पर मनमाने और बार-बार होने वाले बदलावों को कम करने के लिए तय किया गया था।
हालाँकि, याचिका में यह भी कहा गया कि जब से DGP गौरव यादव को स्पेशल DGP (एडमिनिस्ट्रेशन, पंजाब) के तौर पर अपनी ज़िम्मेदारियों के अलावा पुलिस फ़ोर्स के प्रमुख का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है, तब से पंजाब में इस पद के लिए अतिरिक्त चार्ज वाली व्यवस्था चल रही है।
याचिका में कहा गया, "सालों तक ऐसी व्यवस्था का चलना, अचानक खाली हुई जगह के कारण की गई थोड़े समय की और ज़रूरी 'स्टॉप-गैप' व्यवस्था से बिल्कुल अलग है।"
थम्मन ने कोर्ट को यह भी बताया कि राज्य सरकार को DGP के चयन के लिए अधिकारियों का एक पैनल पहले ही मिल चुका है, लेकिन रेगुलर नियुक्ति करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया।
राज्य की ओर से हाई कोर्ट में दायर एक हलफनामे से पता चला कि सरकार इस पैनल पर गंभीरता से विचार कर रही है। इसे ध्यान में रखते हुए, कोर्ट ने राज्य को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने और 13 अक्टूबर तक अनुपालन हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया।
राज्य का प्रतिनिधित्व एडिशनल एडवोकेट जनरल चंचल के. सिंगला ने किया।
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Punjab and Haryana High Court asks Punjab to take steps to appoint regular DGP