राजस्थान हाईकोर्ट ने उन रिपोर्टों का स्वतः संज्ञान लिया है जिनमें आरोप लगाया गया है कि जोधपुर में जजों के सरकारी आवास, स्कूल, कॉलेज, मंदिर और कई अन्य सार्वजनिक व निजी संपत्तियों को सरकारी रिकॉर्ड में वक्फ़ संपत्ति के तौर पर दर्ज किया गया था।
जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस प्रवीर भटनागर की डिवीज़न बेंच ने 'दैनिक भास्कर' की एक रिपोर्ट की जांच के बाद जनहित याचिका (PIL) दर्ज की। इस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि रेवेन्यू रिकॉर्ड में कुछ और होने के बावजूद, कई बड़ी संपत्तियों को वक्फ गजट में शामिल किया गया और 'उम्मीद पोर्टल' पर वक्फ संपत्ति के तौर पर अपलोड किया गया।
बेंच ने कहा, "रेवेन्यू रिकॉर्ड से साफ तौर पर अलग स्थिति होने के बावजूद, वक्फ रिकॉर्ड में शिक्षण संस्थानों, पूजा स्थलों, न्यायिक आवासों और कई रिहायशी व कमर्शियल संपत्तियों को शामिल करने का मामला पहली नज़र में चिंता पैदा करता है। यह चिंता मालिकाना हक या कब्ज़े से जुड़े व्यक्तिगत विवादों से कहीं आगे की है।"
27 जुलाई को जारी एक अंतरिम आदेश में, कोर्ट ने निर्देश दिया कि खसरा नंबर 482, 485 और 490 में आने वाली संपत्तियों और समाचार रिपोर्ट में बताई गई संपत्तियों की ओनरशिप और कानूनी स्थिति के मामले में यथास्थिति (status quo) बनाए रखी जाए।
कोर्ट ने विवादित एंट्रीज़ के आधार पर किसी भी तरह के म्यूटेशन, ट्रांसफर, लीज़, लाइसेंस, निर्माण, तोड़-फोड़ या ऐसी कोई भी कार्रवाई करने पर रोक लगा दी, जिससे उनकी भौतिक या कानूनी स्थिति में बदलाव हो।
कोर्ट ने जोधपुर के ज़िला कलेक्टर को सभी रेवेन्यू रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और फ़ोटोग्राफ़ व GPS जानकारी के साथ ज़मीन की भौतिक जांच (physical verification) करने का भी निर्देश दिया।
राजस्थान मुस्लिम वक्फ़ बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को निर्देश दिया गया है कि वे वक्फ़ गज़ट और उम्मीद पोर्टल (Umeed Portal) में इन संपत्तियों को शामिल करने से जुड़े सभी ओरिजिनल रिकॉर्ड पेश करें।
ज़िला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी से भी उम्मीद पोर्टल के लिए की गई कथित डेटा-एंट्री प्रक्रिया के बारे में स्पष्टीकरण मांगा गया है।
बताया जाता है कि दैनिक भास्कर ने 27 जून को जोधपुर (ग्रामीण) में खसरा नंबर 482, 485 और 490 का ज़िक्र करते हुए एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। ये खसरे रेवेन्यू रिकॉर्ड में संबंधित रेवेन्यू अथॉरिटी के नाम पर दर्ज थे, लेकिन कथित तौर पर वक्फ़ गज़ट और उम्मीद पोर्टल पर इन्हें वक्फ़ संपत्ति के तौर पर दिखाया गया है।
बेंच ने गौर किया कि वक्फ़ संपत्ति के तौर पर दिखाई गई संपत्तियों में सोहनलाल मनिहार स्कूल, शाह गोवर्धनलाल काबरा कॉलेज, काबरा मातृश्री कला मंदिर, अग्रवाल बगीची, अग्रवाल महावीर मंदिर, सतगुरु कबीर आश्रम, गौरीश्वर महादेव मंदिर, मारू लोहार सिकलीगर मंदिर, जूनागढ़ न्याति बगीची, दो न्याति भवन, गीता भवन और कई रिहायशी व कमर्शियल संपत्तियां शामिल हैं।
इन संपत्तियों में राजस्थान हाईकोर्ट के मौजूदा जज जस्टिस विनीत कुमार माथुर और झारखंड के पूर्व चीफ़ जस्टिस प्रकाश टाटिया के सरकारी आवास भी शामिल थे।
कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि रेवेन्यू रिकॉर्ड, कानूनी रजिस्टर और डिजिटल डेटाबेस जैसे पब्लिक रिकॉर्ड के महत्वपूर्ण कानूनी परिणाम होते हैं और एक ही संपत्ति के बारे में अलग-अलग एंट्रीज़ को बिना जांच-पड़ताल के जारी नहीं रहने दिया जा सकता।
कोर्ट ने कहा, "अगर ऐसे रिकॉर्ड में किसी सरकारी संस्था या दूसरे लोगों के नाम पर दर्ज प्रॉपर्टी को बाद में वक्फ गजट या उम्मीद पोर्टल पर वक्फ प्रॉपर्टी के तौर पर दिखाया जाता है, तो ऐसी किसी भी एंट्री का आधार कानून और वक्फ एक्ट, 1995 और दूसरे लागू कानूनों के तहत तय प्रक्रिया का पालन होना चाहिए।"
कोर्ट ने आगे कहा कि वक्फ एक्ट का पालन किए बिना और प्रभावित पक्षों को नोटिस दिए बिना प्रॉपर्टी की कानूनी स्थिति को बदलने वाली कोई भी एकतरफा एंट्री मनमानी और कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना प्रॉपर्टी से वंचित करने जैसी गंभीर चिंताएं पैदा करेगी।
कोर्ट ने यह भी कहा कि हालांकि भारत का संविधान धार्मिक अधिकारों की रक्षा करता है, लेकिन यह राज्य को केवल धार्मिक दावे के आधार पर किसी प्रॉपर्टी को मालिकाना हक देने की इजाज़त नहीं देता है।
कोर्ट ने कहा, "आर्टिकल 25 अंतरात्मा की आज़ादी और धर्म को मानने, उसका पालन करने और उसका प्रचार करने की आज़ादी की रक्षा करता है, जबकि संवैधानिक व्यवस्था न तो राज्य को केवल धार्मिक दावे के आधार पर किसी प्रॉपर्टी को मालिकाना हक देने की इजाज़त देती है और न ही कानून के अनुसार ही किसी वैध धार्मिक बंदोबस्त में दखल देने की अनुमति देती है।"
शामिल प्रॉपर्टी की प्रकृति और दायरे को देखते हुए, कोर्ट ने केंद्र सरकार, राज्य सरकार और जोधपुर के स्थानीय अधिकारियों को नोटिस जारी किया।
वकील मोती सिंह और अभिषेक मेहता को कोर्ट की मदद के लिए 'अमिकस क्यूरी' (न्याय मित्र) नियुक्त किया गया है।
इस मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को होनी है।
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