Delhi High Court  
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बरामद ड्रग्स की मात्रा कमर्शियल मात्रा से मामूली अधिक होने पर NDPS एक्ट की जमानत संबंधी कठोर शर्ते अनिवार्य नही: दिल्ली HC

अदालत ने 259.3 ग्राम मॉर्फिन मिलने के आरोप में गिरफ्तार एक व्यक्ति को ज़मानत दे दी।

Bar & Bench

दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में कहा कि जब किसी आरोपी से बरामद ड्रग्स की मात्रा 'कमर्शियल क्वांटिटी' (व्यावसायिक मात्रा) की सीमा से बहुत थोड़ी ही ज़्यादा हो, तो नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट (NDPS एक्ट) की धारा 37 के तहत ज़मानत की सख़्त शर्तों को पूरी सख्ती से लागू करने की ज़रूरत नहीं है [सनी बनाम दिल्ली राज्य]।

जस्टिस अमित बंसल ने यह टिप्पणी जुलाई 2025 में 259.3 ग्राम मॉर्फिन मिलने के आरोप में गिरफ्तार एक व्यक्ति की ज़मानत याचिका पर सुनवाई के दौरान की।

मॉर्फिन के लिए कमर्शियल मात्रा 250 ग्राम है।

कोर्ट ने कहा, "ऐसे हालात में, NDPS एक्ट के कड़े प्रावधानों को सख्ती से लागू करना शायद सही न हो और इस मामले पर ज़्यादा बारीकी से विचार करने की ज़रूरत है।"

Justice Amit Bansal

अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी सनी को नियमित पुलिस गश्त के दौरान पकड़ा गया था। उसकी जानकारी के आधार पर पुलिस एक सह-आरोपी तक पहुँची, जिसके पास से 114 ग्राम मॉर्फिन बरामद हुई थी। सह-आरोपी को इस साल मई में सेशन कोर्ट से ज़मानत मिल गई थी।

सनी के वकील ने तर्क दिया कि उसे झूठे मामले में फँसाया गया है और तलाशी के दौरान किसी स्वतंत्र गवाह को शामिल नहीं किया गया, जबकि उस जगह पर लोग मौजूद थे। उन्होंने यह भी कहा कि आरोप तो तय हो गए हैं, लेकिन अभी तक किसी गवाह से पूछताछ नहीं हुई है।

राज्य ने इस याचिका का विरोध करते हुए कहा कि धारा 37 लागू होती है और आरोपी समानता का दावा नहीं कर सकता क्योंकि सह-आरोपी के पास 'इंटरमीडिएट' (मध्यम) मात्रा में नशीला पदार्थ मिला था। उन्होंने उसके खिलाफ पहले दर्ज एक FIR का भी ज़िक्र किया।

सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि धारा 37 की शर्तें ट्रायल पूरा होने में बहुत ज़्यादा देरी के आधार पर ज़मानत देने से नहीं रोकतीं। कोर्ट ने यह भी कहा कि सबूत पेश करने की प्रक्रिया अभी शुरू होनी बाकी है और इसमें "काफी समय लगेगा।"

इस प्रकार कोर्ट ने आरोपी को ज़मानत दे दी।

आरोपी की ओर से वकील शान उल इस्लाम, एस इस्लाम और दिनेश चंद्र पेश हुए।

राज्य की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक मुकेश कुमार और क्राइम ब्रांच के सब-इंस्पेक्टर अरविंद कुमार पेश हुए।

[आदेश पढ़ें]

Sunny_vs_State_of_NCT.pdf
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Strict NDPS Act bail conditions not a must if recovered drug only marginally above commercial quantity: Delhi High Court