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सुप्रीम कोर्ट ने हिंदी को अपनी आधिकारिक अदालती भाषाओं में से एक के तौर पर इस्तेमाल करने की मांग वाली PIL खारिज कर दी

याचिकाकर्ता ने मामले की जांच के लिए एक समिति बनाने का आग्रह किया, लेकिन कहा कि ऐसे कदम के लिए संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता होगी।

Bar & Bench

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक जनहित याचिका (PIL) खारिज कर दी, जिसमें कोर्ट की आधिकारिक भाषा के तौर पर हिंदी के संभावित इस्तेमाल की जांच के लिए एक आयोग बनाने का निर्देश देने की मांग की गई थी।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने कहा कि ऐसे उपाय अदालती आदेशों के ज़रिए लागू नहीं किए जा सकते।

CJI कांत ने कहा, "ये चीज़ें अदालती आदेशों से नहीं होतीं। ये सुधारों के हिस्से के तौर पर, धीरे-धीरे और चरणों में होती हैं। हम ऐसा ही कर रहे हैं।"

CJI कांत ने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट ऐसी सेवाएँ शुरू कर रहा है जिनमें धीरे-धीरे क्षेत्रीय भाषाओं का इस्तेमाल शामिल किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, "हम अब सभी रिपोर्ट का संक्षिप्त विवरण हिंदी में दे रहे हैं। हम दूसरी क्षेत्रीय भाषाओं के साथ भी ऐसा करना शुरू करेंगे। हम अपनी संस्कृति को बनाए रखेंगे और दूसरी क्षेत्रीय भाषाओं का भी सम्मान करेंगे।"

CJI Surya Kant, Justice Joymalya Bagchi, Justice V Mohana

याचिकाकर्ता के वकील ने आग्रह किया, “कम से कम एक आयोग तो बनाइए। आयोग बनाने का निर्देश दीजिए।”

जस्टिस मोहना ने पूछा, “आप संविधान में संशोधन की मांग कर रहे हैं। अदालत ऐसा कैसे कर सकती है?”

याचिकाकर्ता के वकील ने अपनी बात पर ज़ोर देते हुए कहा, “मैं कम से कम आयोग के गठन की मांग कर रहा हूँ।”

हालाँकि, अदालत ने PIL पर विचार करने से इनकार कर दिया और उसे खारिज कर दिया।

भारत के संविधान का अनुच्छेद 348(1)(a) कहता है कि सुप्रीम कोर्ट और हर हाई कोर्ट में सभी कार्यवाही अंग्रेज़ी में होगी।

गौरतलब है कि अनुच्छेद 348(2) में यह भी कहा गया है कि किसी राज्य का राज्यपाल, राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से, हाई कोर्ट की कार्यवाही में हिंदी या किसी अन्य भाषा के इस्तेमाल की अनुमति दे सकता है। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट के लिए ऐसा कोई अपवाद नहीं रखा गया है।

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Supreme Court dismisses PIL for use of Hindi as one of its official court languages