सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस शील नागू ने शुक्रवार को पंजाब सरकार की उस अपील पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया, जिसमें पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के ऑफ़िस से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया गया था [पंजाब राज्य बनाम निखिल सराफ़]।
यह मामला जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच के सामने आया, जब जस्टिस नागू ने खुद को इस केस से अलग करने का फ़ैसला किया।
हालांकि बेंच ने अलग होने की वजह नहीं बताई, लेकिन पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ़ जस्टिस के तौर पर जस्टिस नागू ने इस केस के प्रतिवादी (रेस्पॉन्डेंट) एडवोकेट निखिल सराफ़ द्वारा दायर कुछ अन्य मामलों की सुनवाई की थी और उन पर आदेश भी दिए थे।
हालांकि सीनियर एडवोकेट जयदीप गुप्ता ने कोर्ट से कहा कि वे उन फ़ैसलों का हवाला नहीं देंगे, फिर भी बेंच ने कहा कि जस्टिस नागू इस मामले की सुनवाई नहीं करेंगे।
जस्टिस दत्ता ने कहा, "नहीं, नहीं। मिस्टर गुप्ता, हम बहुत मुश्किल दौर से गुज़र रहे हैं। कोई नहीं जानता कि हमला कहाँ से हो जाए। 17 और बेंच हैं। हम इस मामले को CJI के सामने रखने के आदेश पर दस्तख़त कर देंगे, आप इस बारे में बता दीजिएगा।"
हम बहुत मुश्किल दौर से गुज़र रहे हैं। पता नहीं, हमला कहाँ से हो जाए।सुप्रीम कोर्ट
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने CBI को मुख्यमंत्री के OSD (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) राजबीर सिंह घुमन के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का निर्देश दिया, जिसके बाद पंजाब सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची।
हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की बेंच ने 5 अक्टूबर को CBI से अपनी जांच पर दो महीने के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था।
इससे पहले, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पंजाब पुलिस से घुमन के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए FIR दर्ज करने को कहा था।
ED के अनुसार, नितिन गोहल नाम का एक व्यक्ति सरकार से फायदा चाहने वाले लोगों और घुमन के बीच बिचौलिए का काम करता था। ये आरोप ट्रांसफर, गोपनीय सरकारी दस्तावेजों तक पहुंच, हथियारों के लाइसेंस दिलाने और अन्य फायदों से जुड़े हैं।
पुलिस द्वारा FIR दर्ज न करने पर, वकील निखिल सराफ ने इस निष्क्रियता को चुनौती देते हुए जनहित याचिका (PIL) दायर की।
PIL पर फैसले में, हाई कोर्ट ने 5 अक्टूबर को कहा कि ED द्वारा साझा की गई जानकारी से प्रथम दृष्टया यह पता चलता है कि उच्च सार्वजनिक पद पर रहते हुए संज्ञेय अपराध किए गए हैं, जिनसे जनहित को खतरा हो सकता है।
कोर्ट ने पाया कि 3 अगस्त को ED द्वारा जानकारी साझा किए जाने के बाद से पंजाब ने केवल एक तरह की "प्रारंभिक जांच" की थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि हालांकि कई लोगों को नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन मान के OSD को जांच में शामिल होने के लिए नहीं कहा गया था।
कोर्ट ने कहा कि ED द्वारा भेजी गई सामग्री में दोषी ठहराने लायक सबूत थे और उम्मीद थी कि राज्य पुलिस इस पर जिम्मेदार प्रतिक्रिया देगी।
कोर्ट ने कहा, "ED द्वारा साझा की गई सामग्री से प्रथम दृष्टया भ्रष्टाचार के कृत्यों में उच्च सार्वजनिक अधिकारियों की संलिप्तता का संकेत मिलता है और कम से कम FIR दर्ज करने की आवश्यकता थी ताकि मामले की उचित जांच हो सके। पंजाब पुलिस की प्रतिक्रिया ऐसी नहीं रही है।"
आदेश के बाद, CID ने घुमन, गोहल और अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण (PC) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के प्रावधानों के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया। यह मामला दिल्ली में दर्ज किया गया है।
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