सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राज्यसभा सांसद नागेंद्र राय उर्फ अनंत महाराज द्वारा नेताजी सुभाष चंद्र बोस के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज करने से इनकार कर दिया।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने मामला उठाने वाले वकील से कहा कि वे इसके बजाय याचिका दायर करें।
वकील ने कहा, "क्या मैं आपकी बेंच का ध्यान एक बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना की ओर दिला सकता हूँ, जिस पर स्वतः संज्ञान (suo motu cognizance) लिया जा सके? राज्यसभा सांसद नागेंद्र राय, जो खुद को अनंत महाराज बताते हैं, नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बारे में अपमानजनक टिप्पणियाँ कर रहे हैं।"
CJI ने पूछा, "आप स्वतः संज्ञान क्यों चाहते हैं? आप याचिका क्यों दायर नहीं कर सकते?"
वकील ने कहा कि कोर्ट ने एक ऐसे मामले पर संज्ञान लिया था जो न्यायपालिका की छवि खराब करने वाला था।
उन्होंने कहा, "यह भी छवि खराब करने वाला है।"
CJI ने पूछा, "स्वतः संज्ञान (suo motu) तभी लिया जाता है जब कोई गंभीर मामला हो। पर्यावरण या जंगलों के मामले में, जंगल तो खुद बोल नहीं सकते। हमें ही उनका ध्यान रखना होता है, इसलिए हमने कार्रवाई की। समाज के हाशिए पर रहने वाले लोग, गरीब और सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े लोग होते हैं जो कोर्ट तक नहीं आ पाते। एक 83 साल की महिला और उनके अंधे बेटे का मामला था; हमें स्वतः संज्ञान लेना पड़ा क्योंकि अगर हम नहीं करते तो उनकी देखभाल कौन करता? लेकिन यहाँ तो एक काबिल वकील मौजूद हैं। आप सब कुछ जानते हैं, फिर भी आप चाहते हैं कि स्वतः संज्ञान लिया जाए?"
जस्टिस बागची ने अपनी बात रखते हुए कहा, "चाहे स्वतः संज्ञान हो या याचिका, आपकी चिंता यह है कि कोई व्यक्ति 'हेट स्पीच' (नफ़रत फैलाने वाली बात) जैसी टिप्पणी कर रहा है। आपको अभिव्यक्ति की आज़ादी और उस पर उचित प्रतिबंधों के स्थापित सिद्धांतों के आधार पर इसकी जांच करनी होगी। इसलिए कृपया याचिका दायर करें।"
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Supreme Court refuses suo motu action against MP Nagendra Ray for remarks about Subhas Chandra Bose