सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को छत्तीसगढ़ कैडर के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा को कथित शराब घोटाले और कस्टम राइस मिलिंग घोटाले के मामलों में मिली नियमित जमानत में दखल देने से इनकार कर दिया।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने इस मामले में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा दायर अपीलों को खारिज कर दिया है।
अदालत ने कहा कि अगर तुटेजा अपनी जमानत का गलत इस्तेमाल करते हैं, तो राज्य सरकार उनकी जमानत रद्द कराने के लिए कदम उठा सकती है।
CJI कांत ने कहा, "अगर जमानत की सुविधा का कोई गलत इस्तेमाल होता है, तो आप जमानत को तुरंत रद्द कराने के लिए हाई कोर्ट जा सकते हैं।"
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि हाई कोर्ट ने अपने आदेशों में जो टिप्पणियां की हैं, वे केवल तुटेजा की जमानत याचिकाओं पर फैसला लेने के लिए थीं और ट्रायल कोर्ट उन टिप्पणियों से बंधा नहीं होगा।
चावल मिल घोटाले के मामले में जमानत दिए जाने के खिलाफ राज्य सरकार की अपील को खारिज करते हुए अदालत ने कहा, "हाई कोर्ट के निष्कर्ष केवल जमानत देने के सीमित उद्देश्य के लिए हैं। ट्रायल कोर्ट इन टिप्पणियों से प्रभावित नहीं होगा। जहां तक जमानत देने वाले आदेशों की बात है, तो ये आदेश दिसंबर या जनवरी में दिए गए थे। अगर जमानत की सुविधा का कोई गलत इस्तेमाल होता है, तो इसे हाई कोर्ट के संज्ञान में लाया जा सकता है ताकि जमानत रद्द की जा सके।"
सुनवाई के दौरान, अदालत ने यह भी चेतावनी दी कि भले ही भ्रष्टाचार का गहरा संदेह हो, लेकिन केवल संदेह के आधार पर ट्रायल के दौरान कानूनी सबूतों की जगह नहीं ली जा सकती।
CJI ने कहा, "हम आपसे (राज्य सरकार से) सहमत हैं। इस बात का गहरा संदेह है कि वे (तुटेजा और अन्य सह-आरोपी) भ्रष्टाचार में शामिल हैं। लेकिन इस संदेह को पुख्ता सबूतों में बदलना होगा।"
राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के उन आदेशों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिनके तहत तुतेजा को शराब घोटाले और कस्टम राइस मिलिंग घोटाले के मामलों में जमानत दी गई थी।
13 जनवरी 2026 को, हाई कोर्ट ने उन्हें राइस मिल मामले में नियमित जमानत दे दी थी। इस मामले में आरोप है कि तुतेजा ने 2021-22 के कस्टम-मिलिंग सीजन के दौरान, छत्तीसगढ़ स्टेट राइस मिलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों और मार्कफेड (MARKFED) के अधिकारियों के साथ मिलकर राइस मिल मालिकों से जबरन पैसे वसूले थे।
अभियोजन पक्ष का आरोप है कि कस्टम मिलिंग के लिए राज्य सरकार का प्रोत्साहन (incentive) 40 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 120 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया था। इसके बाद, मिल मालिकों को अपने प्रोत्साहन बिल पास कराने के लिए कथित तौर पर 20 रुपये प्रति क्विंटल का अवैध कमीशन देने के लिए मजबूर किया गया। आरोप है कि तुतेजा ने इस योजना को प्रभावित किया और बिचौलियों के जरिए लगभग 20 करोड़ रुपये की अवैध रकम हासिल की।
शराब घोटाले के मामले में आरोप है कि 2019 से 2022 के बीच छत्तीसगढ़ के शराब कारोबार में चल रहे कथित भ्रष्टाचार सिंडिकेट में तुतेजा की मुख्य भूमिका थी।
हाई कोर्ट ने इस साल मार्च में उन्हें जमानत देते हुए कहा था कि तुतेजा 18 महीने से अधिक समय तक जेल में रह चुके हैं और मुकदमे के जल्द खत्म होने की संभावना नहीं है।
आज दोनों मामलों में राज्य सरकार की अपीलें खारिज कर दी गईं। हालांकि, राज्य सरकार को यह छूट दी गई है कि अगर तुतेजा जमानत पर रहते हुए अपनी आजादी का गलत इस्तेमाल करते हैं, तो वे उनकी जमानत रद्द कराने की मांग कर सकते हैं।
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Supreme Court refuses to interfere with bail to ex-IAS officer Anil Tuteja in corruption cases