Vijay and Supreme Court  Facebook
समाचार

सुप्रीम कोर्ट ने करूर भगदड़ पीड़ित परिवारो को सरकारी नौकरी देने के फैसले को रद्द करने वाले मद्रास HC के आदेश पर रोक लगायी

हाईकोर्ट ने फ़ैसला सुनाया था कि ये नियुक्तियाँ अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन करती हैं, क्योंकि इनमें सरकारी नौकरी का इंतज़ार कर रहे उम्मीदवारों को नज़रअंदाज़ किया गया था।

Bar & Bench

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मद्रास हाईकोर्ट के उस हालिया फ़ैसले पर रोक लगा दी, जिसमें सितंबर 2025 में करूर में मची भगदड़ में मारे गए 41 लोगों के परिवार के सदस्यों को मानवीय आधार पर नौकरी देने के राज्य सरकार के फ़ैसले को रद्द कर दिया गया था।

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने राज्य सरकार की याचिका पर यह अंतरिम आदेश दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "नोटिस जारी किया जाए। हाईकोर्ट के फैसले पर रोक जारी रहेगी।"

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना के कारण सरकार को पीड़ित परिवारों को नौकरी देने का फैसला करना पड़ा।

बेंच ने टिप्पणी की, "भगदड़ मची थी। एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई थी। सरकार ने उन्हें मुआवज़ा देने का फ़ैसला किया है। क्या सरकार को नौकरी नहीं देनी चाहिए?"

Justice JB Pardiwala and Justice Vinod Chandran

सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व किया।

Abhishek Singhvi

पिछले महीने, हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया था कि इन नियुक्तियों को बरकरार नहीं रखा जा सकता क्योंकि सरकारी नौकरी संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के अनुसार ही दी जानी चाहिए।

बेंच ने कहा कि कई अन्य लोग, जिनके परिवार के सदस्य सरकारी नौकरी के दौरान मारे गए थे, वे पहले से ही अनुकंपा के आधार पर नौकरी का इंतज़ार कर रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार उन दावों को नज़रअंदाज़ करके भगदड़ में मारे गए लोगों के परिवारों को नौकरी नहीं दे सकती।

हाईकोर्ट ने यह फैसला उन याचिकाओं पर सुनाया जिनमें सरकार के उस फ़ैसले को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत करूर में 'तमिलगा वेट्री कज़गम' (TVK) की रैली में सितंबर 2025 में हुई भगदड़ में मारे गए 41 लोगों के परिवारों को नौकरी देने की पेशकश की गई थी।

इस दुखद घटना की जांच अभी सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) कर रही है।

अप्रैल 2026 में हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के बाद जब मुख्यमंत्री सी. जोसेफ़ विजय के नेतृत्व वाली TVK सत्ता में आई, तो राज्य सरकार ने भगदड़ में मारे गए लोगों के परिजनों को नौकरी देने का फ़ैसला किया।

हाईकोर्ट में दायर याचिकाओं में तर्क दिया गया कि अनुकंपा के आधार पर नियुक्तियां आम तौर पर उन सख़्त नियमों से नियंत्रित होती हैं जो नौकरी के दौरान मरने वाले सरकारी कर्मचारियों के आश्रितों पर लागू होते हैं।

यह भी तर्क दिया गया कि परिवारों को पहले ही अनुग्रह राशि (ex-gratia compensation) मिल चुकी है और CBI की जांच लंबित रहने के दौरान नौकरी देने से मामले से जुड़े अहम गवाह प्रभावित हो सकते हैं।

और अधिक पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें


Supreme Court stays Madras HC order scrapping government jobs to Karur stampede victims’ families