Punjab and Haryana High Court  
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कर्मचारियो और पेंशनभोगियो को DA का भुगतान होने तक सरकार को बड़े पैमाने पर विज्ञापन करने से रोक दिया

अदालत ने दोनों वरिष्ठ अधिकारियों को 24 अगस्त को सुनवाई की अगली तारीख पर व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया।

Bar & Bench

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सोमवार को पंजाब सरकार को बड़े पैमाने पर विज्ञापन अभियान चलाने से रोक दिया। यह रोक तब तक लागू रहेगी जब तक सरकार सिंगल-बेंच के हालिया फ़ैसले के मुताबिक़ कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को महंगाई भत्ता (DA) जारी नहीं कर देती।

एक्टिंग चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की बेंच ने पंजाब सरकार और पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL) की अपील को खारिज करते हुए यह निर्देश दिया। इन अपीलों में सिंगल-जज के फैसले को चुनौती दी गई थी।

सिंगल-जज ने 8 अप्रैल को राज्य और PSPCL को निर्देश दिया था कि वे अपने सभी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को DA या महंगाई राहत (DR) की सभी बकाया किस्तों का भुगतान 30 जून तक करें। यह भुगतान उसी दर पर किया जाना था जिस दर पर पंजाब में काम कर रहे ऑल इंडिया सर्विसेज़ (IAS/IPS/IFS) के सदस्यों को भुगतान किया गया है।

आज डिवीजन बेंच ने कहा कि भुगतान दो हफ़्ते के अंदर किया जाए और अगर ऐसा नहीं होता है, तो बकाया राशि पर सालाना 6 प्रतिशत का साधारण ब्याज लगेगा।

कोर्ट ने कहा कि इस महीने के आखिर तक अनुपालन रिपोर्ट (compliance report) दाखिल की जाए।

बेंच ने आदेश दिया, "जब तक ऐसे सभी बकाये का भुगतान नहीं हो जाता, पंजाब राज्य प्रिंट या सोशल मीडिया में बड़े पैमाने पर विज्ञापन अभियान जैसे किसी भी अनुत्पादक खर्च का सहारा नहीं लेगा, क्योंकि इन खर्चों के आधार पर राज्य कर्मचारियों के देय बकाये के भुगतान से इनकार को सही नहीं ठहराया जा सकता है।"

Justice Ashwani Kumar Mishra and Justice Rohit Kapoor

2021 में, पंजाब सरकार ने छठे वेतन आयोग की उस सिफारिश को मंज़ूरी दी थी जिसके तहत राज्य के कर्मचारियों को केंद्र सरकार की तर्ज़ पर DA/DR दिया जाना था।

हालांकि, मंज़ूरी मिलने के बावजूद, सरकार यह रकम जारी नहीं कर पाई।

इसके बाद, बकाया राशि जारी करवाने के लिए कई याचिकाएँ दायर की गईं। अदालत को बताया गया कि राज्य के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को 'ऑल इंडिया सर्विस' के अधिकारियों की तुलना में 16% कम DA दिया जा रहा था।

इसके जवाब में, पंजाब सरकार ने आर्थिक तंगी का हवाला दिया। सरकार ने एक 'लिक्विडेशन प्लान' (भुगतान योजना) का भी ज़िक्र किया, जिसके तहत पेंशनभोगियों की उम्र के आधार पर पेंशन का भुगतान अलग-अलग चरणों में किया जाता था। PSPCL ने भी अपने पेंशनभोगियों के लिए इसी योजना को अपनाया था।

अप्रैल में, जस्टिस हरप्रीत सिंह बरार ने फ़ैसला सुनाया कि यह योजना संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करती है, क्योंकि यह पेंशनभोगियों के एक ही वर्ग के भीतर अनुचित भेदभाव पैदा करती है।

इसके बाद जज ने PSPCL को निर्देश दिया कि वह अपने सभी पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशनभोगियों को छठे पंजाब वेतन आयोग के अनुसार संशोधित पेंशन/पारिवारिक पेंशन (जिसमें DR का बकाया भी शामिल है) का बकाया भुगतान करे।

राज्य सरकार और PSPCL ने इस फ़ैसले को चुनौती दी। आज, उन अपीलों को खारिज कर दिया गया।

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P&H High Court bars Punjab government from large-scale advertising till payment of DA to employees, pensioners