सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि वह 4 नवंबर को वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करेगा; इनमें और अधिक अंतरिम राहत की मांग करने वाली याचिकाएं भी शामिल हैं।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने आज इस मामले पर संक्षिप्त सुनवाई की। इस दौरान, मामला लंबित रहने के बीच वक्फ संपत्तियों की बदलती स्थिति को लेकर चिंताएं जताई गईं।
गौरतलब है कि सितंबर 2025 में, कोर्ट की एक अन्य बेंच ने सीमित अंतरिम राहत दी थी, जिसके तहत अधिनियम के कुछ प्रावधानों पर रोक लगा दी गई थी, लेकिन कई अन्य महत्वपूर्ण प्रावधानों को लागू रहने दिया गया था।
याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता निज़ाम पाशा ने आज कोर्ट से आग्रह किया कि इस मामले की सुनवाई के लिए कोई तारीख तय की जाए, क्योंकि इस अधिनियम के लागू रहने से गंभीर परिणाम सामने आ रहे हैं।
उन्होंने कहा, "उनका कहना है कि अब 'लिमिटेशन एक्ट' (परिसीमा अधिनियम) लागू हो जाएगा। इसलिए, अगर वक्फ संपत्तियों को उस तय समय-सीमा के भीतर परिभाषित नहीं किया गया, तो उन पर तुरंत असर पड़ेगा। 'वक्फ-बाय-यूज़र' (उपयोग के आधार पर वक्फ) पर भी असर पड़ रहा है। लगभग डेढ़ साल पहले एक अंतरिम आदेश पारित किया गया था। अगर इन मामलों की सुनवाई नहीं हुई, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। मैं बस सुनवाई के लिए एक तारीख की मांग कर रहा हूँ।"
कोर्ट ने संज्ञान लिया कि इस मामले में अब कई 'इंटरवेंशन एप्लिकेशन' (हस्तक्षेप याचिकाएं) दायर की गई हैं।
पाशा ने अपने जवाब में कहा, "मौखिक वक्फ और 'वक्फ-बाय-यूज़र' को अब मान्यता न मिलने के कारण कई वक्फ संपत्तियों की स्थिति बदली जा रही है; उनकी स्थिति में होने वाला कोई भी बदलाव स्थायी और अपरिवर्तनीय हो सकता है। इसलिए, वक्फ के दायरे में आने वाली किसी भी संपत्ति के खिलाफ की जाने वाली कार्रवाई को एक 'इंटरवेंशन एप्लिकेशन' (IA) के जरिए कोर्ट के सामने लाया जा रहा है। शायद यही वजह है कि ऐसी हस्तक्षेप याचिकाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है।"
उन्होंने आगे बताया कि यह मामला अभी तक किसी विशेष बेंच को आवंटित नहीं किया गया है। पिछली बार इस मामले की सुनवाई तत्कालीन CJI बी.आर. गवई और जस्टिस ए.जी. मसीह ने की थी, जो अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
पाशा ने कोर्ट से आग्रह किया, "कोर्ट के निर्णय के अनुसार, कोई भी उपयुक्त बेंच इसकी सुनवाई कर सकती है। लेकिन इस मामले की सुनवाई होनी चाहिए। यह एक जरूरी मामला है। संपत्तियों की स्थिति बदल रही है। पहली बार 'लिमिटेशन एक्ट' को लागू किया गया है। मौजूदा विवादों में भी संपत्ति का स्वरूप बदल सकता है, क्योंकि पहले जो सुरक्षा मिली हुई थी, वह अब उपलब्ध नहीं है। यह एक रोज़मर्रा की चिंता है कि जब तक यह कानूनी चुनौती लंबित है, तब तक वक्फ संपत्ति अपना दर्जा और स्वरूप खो सकती है।"
कोर्ट ने इस मामले में शंबीर सिंह द्वारा दायर एक 'इंटरवेंशन एप्लिकेशन' को स्वीकार कर लिया और इसे वक्फ संशोधन अधिनियम को चुनौती देने वाली मुख्य याचिकाओं के साथ जोड़ दिया।
अदालत ने आगे कहा "हम इसे मंगलवार, 4 नवंबर को सूचीबद्ध कर रहे हैं।"
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