PMLA with Delhi High Court  
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SFIO को जांच ट्रांसफर करने से PMLA के तहत पैरेलल कार्रवाई पर रोक नहीं लगती: दिल्ली हाईकोर्ट

कोर्ट ने कहा कि SFIO का अधिकार सिर्फ़ कंपनीज़ एक्ट के तहत आने वाले अपराधों तक ही है और यह दूसरी एजेंसियों को दूसरे कानूनों के तहत अलग अपराधों की जांच करने से नहीं रोकता है।

Bar & Bench

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में माना कि कंपनीज़ एक्ट 2013 के तहत सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) को जांच ट्रांसफर करने से प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 के तहत पैरेलल कार्रवाई पर रोक नहीं लगती [संजय अग्रवाल बनाम यूनियन ऑफ़ इंडिया और अन्य]।

जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और हरीश वैद्यनाथन शंकर की डिवीजन बेंच ने कहा कि SFIO का अधिकार सिर्फ़ कंपनीज़ एक्ट के तहत होने वाले अपराधों तक ही है और यह दूसरी एजेंसियों को दूसरे कानूनों के तहत अलग अपराधों की जांच करने से नहीं रोकता है।

कोर्ट ने कहा, “इसके अलावा, कानूनी व्यवस्था का एक मकसद और तालमेल से बनाया गया तरीका यह कन्फर्म करता है कि [कंपनीज़] एक्ट 2013 सिर्फ़ कंपनियों से जुड़े अपराधों पर लागू होता है और PMLA समेत दूसरे कानूनों के तहत होने वाले अपराधों तक नहीं फैलता है। हालांकि [कंपनीज़ एक्ट का] सेक्शन 212 एक सेल्फ-कंटेन्ड कोड है जो कंपनी मामलों में SFIO की जांच को कंट्रोल करता है, लेकिन इसकी स्कीम दूसरी एजेंसियों को, अपने दायरे में, अलग कानूनों के तहत अपराधों की जांच करने से नहीं रोकती है।”

बेंच ने यह बात उन बिजनेसमैन की कई पिटीशन को खारिज करते हुए कही, जिन्होंने शेल कंपनियों और गलत ट्रेड डॉक्यूमेंट्स से जुड़े कथित ₹6,000 करोड़ के फॉरेन एक्सचेंज रेमिटेंस स्कैम के सिलसिले में एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) द्वारा उनकी प्रॉपर्टीज़ की प्रोविजनल अटैचमेंट को चुनौती दी थी।

पिटीशनर्स ने यह तर्क दिया कि अक्टूबर 2015 में जब केंद्र सरकार ने केस SFIO को सौंप दिया, तो CBI और ED दोनों को पैरेलल जांच जारी रखने से रोक दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि उनके खिलाफ कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर (CrPC) के तहत कोई चार्जशीट फाइल नहीं की गई थी, जिससे उनकी प्रॉपर्टीज़ की अटैचमेंट गैर-कानूनी हो गई।

केस पर विचार करने के बाद, कोर्ट ने इन तर्कों को खारिज कर दिया और यह भी फैसला सुनाया कि PMLA के तहत अटैचमेंट से पहले चार्जशीट ज़रूरी नहीं है।

इसलिए, उसने पिटीशन्स खारिज कर दीं।

पिटीशनर्स की ओर से एडवोकेट नवीन मल्होत्रा, ऋत्विक मल्होत्रा, नीलांश मल्होत्रा, आरके हांडू, योगिंदर हांडू, आदित्य चौधरी, अश्विन कटारिया, गर्वित सोलंकी, फतेह सिंह, गौरव विश्वकर्मा और आदित्य अग्रवाल पेश हुए।

ED की ओर से स्पेशल काउंसल अनुपम एस शर्मा, एडवोकेट विवेक गुरनानी, हरप्रीत कलसी, अभिषेक बत्रा, रिपुदमन शर्मा, वशिष्ठ राव, रिया सचदेवा, विशेष जैन और अनंत मिश्रा पेश हुए।

CGSC रिपुदमन भारद्वाज, वकील कुशाग्र कुमार और अमित कुमार राणा के साथ केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए।

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Transfer of probe to SFIO doesn't bar parallel proceedings under PMLA: Delhi High Court