उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर की एक अदालत ने सोमवार को विपक्ष के नेता राहुल गांधी को मानहानि के एक मामले में बरी कर दिया। यह मामला 2018 में राहुल गांधी की उस टिप्पणी से जुड़ा था, जिसमें उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक हत्या के मामले में आरोपी बताया था।
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा द्वारा फैसला सुनाए जाने के समय गांधी अदालत में मौजूद थे।
अदालत ने आज कहा कि गांधी की टिप्पणी मानहानि की श्रेणी में नहीं आती है।
भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 499 और 500 के तहत गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का यह मामला भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता विनय मिश्रा ने 2018 में दर्ज कराया था। शिकायतकर्ता के अनुसार, कर्नाटक चुनाव के दौरान दिए गए एक बयान में गांधी ने शाह को हत्या का आरोपी बताया था। गांधी ने बेंगलुरु में यह बयान दिया था:
"भारत के लोग भूल जाते हैं कि BJP के अध्यक्ष हत्या के आरोपी हैं। यही सच है। जो पार्टी ईमानदारी और शालीनता की बात करती है, उसके अध्यक्ष पद पर एक ऐसा व्यक्ति है जिस पर हत्या का आरोप है।"
गांधी का इशारा सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले की ओर था, जिसमें 2014 में एक विशेष CBI अदालत ने शाह को आरोपमुक्त कर दिया था।
2023 में, एक अन्य मानहानि मामले में गुजरात की एक अदालत ने गांधी को दोषी ठहराते हुए दो साल की जेल की सजा सुनाई थी। यह मामला उनके उस बयान से जुड़ा था जिसमें उन्होंने कहा था कि "सभी चोरों का सरनेम मोदी क्यों होता है?" प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नीरव मोदी और ललित मोदी जैसे भगोड़ों से जोड़ने वाला यह बयान 2019 में कर्नाटक के कोलार निर्वाचन क्षेत्र में एक चुनावी रैली के दौरान दिया गया था।
उस समय वायनाड से सांसद रहे गांधी को इस मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद संसद सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया गया था। हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस सजा पर रोक लगा दी - इस अंतरिम आदेश के चलते वे सांसद बने रहे।
वरिष्ठ अधिवक्ता आरएस चीमा ने अधिवक्ता काशी शुक्ला, तरन्नुम चीमा, प्रसन्ना एस और आकाश सिंह के साथ गांधी का प्रतिनिधित्व किया।
और अधिक पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें
UP court acquits Rahul Gandhi in defamation case over remarks against Amit Shah