Supreme Court of India  
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“आपने उसका कान काटकर खा लिया, अब उसकी भरपाई कैसे करेंगे?” मारपीट के मामले में जमानत मांगने वाले व्यक्ति से सुप्रीम कोर्ट

अदालत झारखंड के एक ऐसे व्यक्ति के मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसने कथित तौर पर हाथापाई के दौरान दूसरे व्यक्ति का कान काट लिया था।

Bar & Bench

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मारपीट के एक मामले में अग्रिम ज़मानत की याचिका खारिज करते हुए एक व्यक्ति से पूछा, "तुमने उसका कान खा लिया, अब हम उसे कैसे बदलें?"

सुनवाई के दौरान जजों की बेंच (जस्टिस जेबी पारदीवाला और के विनोद चंद्रन) ने अपनी खास न्यायिक हाज़िरजवाबी दिखाते हुए साफ़ कर दिया कि सड़क पर हुई लड़ाई के दौरान पड़ोसी का कान चबाकर काट लेने के आरोपी व्यक्ति को गिरफ़्तारी से पहले सुरक्षा मिलने की उम्मीद शायद ही हो सकती है।

यह मामला सुप्रीम कोर्ट में झारखंड हाई कोर्ट के फरवरी 2026 के उस आदेश के खिलाफ अपील के तौर पर पहुंचा, जिसमें रांची में हुई हिंसक झड़प के मामले में राजीव रंजन कुमार को अग्रिम ज़मानत देने से इनकार कर दिया गया था।

कुमार के वकील ने घटना को पड़ोसियों के बीच आम झगड़े के तौर पर पेश करके मामले की गंभीरता को कम करने की कोशिश की, जो बस एक त्योहार की रात को बेकाबू हो गया था।

वकील ने कहा, "यह पड़ोसियों के बीच लंबे समय से चल रहा विवाद है। एक रात यह झगड़ा बढ़ गया और दोनों तरफ से FIR दर्ज की गईं। दूसरी पार्टी को अग्रिम ज़मानत मिल गई, जबकि मुझे इससे इनकार कर दिया गया। घटना की शुरुआत जन्माष्टमी की रात हुई थी, लोग जश्न मना रहे थे और कुछ पत्थरबाज़ी भी हुई थी..."

हालांकि, बेंच त्योहार के माहौल से प्रभावित नहीं हुई और उसने घटना में लगी चोट पर ध्यान केंद्रित किया।

कोर्ट ने टिप्पणी की, "आपने पहले बंदूक निकाली, फिर उसका कान पकड़ा और पूरा कान खा गए। और आप अग्रिम ज़मानत चाहते हैं?"

जब वकील ने कहा कि हथियार वाली बात मनगढ़ंत है, तो बेंच ने तुरंत उस बात को छोड़ दिया - लेकिन बाकी नुकसान पर ज़ोर दिया।

कोर्ट ने तंज कसते हुए कहा, "ठीक है, पिस्तौल वाली बात छोड़ देते हैं। कान का क्या करें? उसे कैसे ठीक करेंगे?"

वकील ने दावा किया कि असल में उनका क्लाइंट ही इस झगड़े का मुख्य पीड़ित था।

वकील ने कहा, "मुझे ज़मीन पर दबा दिया गया था। मेरे हाथ-पैर जकड़ दिए गए थे। मेरी छाती पर काटा गया था..."

बेंच ने बीच में टोकते हुए पूछा, "तो आप मानते हैं कि हाथापाई हुई थी?"

वकील ने जवाब दिया, "हां। मैं जांच में सहयोग करने को तैयार हूं।"

बेंच आपसी लड़ाई वाली दलील से सहमत नहीं हुई और याचिका खारिज कर दी। 2024 में अर्गोरा पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR के बाद, याचिकाकर्ता पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था - जिसमें धारा 118 (खतरनाक हथियारों या तरीकों से जान-बूझकर चोट पहुँचाना या गंभीर चोट पहुँचाना) भी शामिल है।

झारखंड हाई कोर्ट ने पहले उसकी अग्रिम ज़मानत याचिका खारिज कर दी थी, क्योंकि पुलिस रिपोर्ट से पुष्टि हुई थी कि पीड़ित के सिर और चेहरे पर कई गंभीर घाव (कटने के निशान) आए थे।

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