Punjab and Haryana High Court, Chandigarh  
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ट्वीट के ज़रिए फ़ैसले को चुनौती नहीं दी जा सकती: DA मामले में P&H हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को फटकार लगाई

मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्र ने कहा कि राज्य सरकार अदालत के साथ लुका-छिपी का खेल खेल रही है।

Bar & Bench

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने सोमवार को कहा कि पंजाब सरकार, राज्य कर्मचारियों को बकाया महंगाई भत्ता (DA) देने के हाई कोर्ट के हालिया आदेश के खिलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने के बारे में तथ्यों को गलत तरीके से पेश कर रही है।

3 अगस्त को, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया था कि वह अपने सभी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को महंगाई भत्ता/महंगाई राहत (DA/DR) की सभी बकाया किश्तें उसी दर पर जारी करे, जिस दर पर पंजाब में काम कर रहे ऑल इंडिया सर्विस (IAS/IPS/IFS) अधिकारियों को भुगतान किया गया है।

इस फैसले में सरकार को बकाया राशि का भुगतान होने तक प्रिंट या सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर विज्ञापन अभियान जैसे किसी भी गैर-ज़रूरी खर्च से भी रोका गया है। राज्य सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की डिवीज़न बेंच ने आज गौर किया कि राज्य की स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) एक महीने से ज़्यादा समय से सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में कमियों (डिफेक्ट्स) के कारण अटकी हुई है।

बेंच ने पाया कि बार-बार मौका दिए जाने के बावजूद, राज्य सरकार इन कमियों को दूर करने में नाकाम रही है। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार सिर्फ़ समय खींच रही है और कमियों को दूर नहीं कर रही है।

कोर्ट ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट में फैसले को चुनौती देना आपका अधिकार है, लेकिन अगर आपको संविधान और संवैधानिक व्यवस्था में भरोसा है, तो आप बस यह नहीं कह सकते कि 'हम आदेश लागू नहीं करेंगे, हम अपील दायर नहीं करेंगे' और फिर ट्वीट और सोशल मीडिया के ज़रिए फैसले को चुनौती देने का नया तरीका अपनाएं। अगर आप ऐसा करने जा रहे हैं, तो हम इसे पसंद नहीं करेंगे।"

चीफ जस्टिस मिश्रा ने कहा कि राज्य सरकार कोर्ट से सख़्त कार्रवाई को न्योता दे रही है।

बेंच ने कहा, "हम यहाँ किसी एक सरकार या दूसरी सरकार के ख़िलाफ़ नहीं हैं। हम यहाँ रिटायर हो चुके लोगों के हक़ की रक्षा के लिए हैं। वे आपके ही लोग हैं, वे रिटायर कर्मचारी हैं। वे सालों से अपने बकाया पैसे का इंतज़ार कर रहे हैं।"

Chief Justice Ashwani Kumar Mishra and Justice Rohit Kapoor
हम यहां किसी एक सरकार या दूसरी सरकार के विरोध में नहीं हैं।
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने कर्मचारियों के DA मामले में पंजाब सरकार को निर्देश दिया

आज हाई कोर्ट उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था जिनमें राज्य सरकार द्वारा 3 अगस्त के फैसले का पालन न करने का मुद्दा उठाया गया था। एक निर्देश में मुख्य सचिव को 31 अगस्त तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा गया था।

मुख्य सचिव केपी सिन्हा आज कोर्ट में मौजूद थे और उन्होंने बताया कि हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक और SLP (विशेष अनुमति याचिका) दाखिल की गई है।

हालांकि, कोर्ट ने पूछा कि राज्य ने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री द्वारा बताई गई कमियों को अभी तक क्यों दूर नहीं किया है।

बेंच ने कहा, "अगर आप ऐसा नहीं कर रहे हैं, तो आप हमें सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर कर रहे हैं। या तो आप किसी खास योजना या मकसद के तहत ऐसा कर रहे हैं - हमें नहीं पता क्योंकि कोई वजह नहीं है कि तीन मौकों के बावजूद आपने अपनी अपील को [लिस्टिंग के लिए मंज़ूरी] क्यों नहीं दिलाई।"

इसके बाद कोर्ट ने अपने कर्मचारियों से सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपील की स्थिति देखने को कहा। कोर्ट ने एडवोकेट जनरल मनिंदरजीत सिंह बेदी से यह भी पूछा कि क्या राज्य चाहता है कि कोर्ट मुख्य सचिव के खिलाफ हलफनामे पर गलत बयान देने के लिए कार्रवाई करे।

बेंच ने कहा, "मिस्टर एडवोकेट जनरल, आप अपने मुख्य सचिव को किस तरह की सलाह दे रहे हैं?"

यह बताए जाने के बाद कि केवल ई-फाइलिंग की गई थी, कोर्ट ने अपनी रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि वह पंजाब सरकार द्वारा दाखिल SLP के बारे में सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से स्टेटस रिपोर्ट मांगे।

मामले की सुनवाई मंगलवार तक टालने से पहले कोर्ट ने कहा, "बहुत हो गया यह लुका-छिपी का खेल।"

आज पारित आदेश में कोर्ट ने कहा,

"यह एक असामान्य मामला है... कोर्ट के सामने तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने में कोई राज्य किस हद तक जा सकता है, यह हमारे सामने स्पष्ट है।"

कोर्ट ने यह भी कहा कि पंजाब सरकार के इरादों को समझने की कोशिश में वह "पूरी तरह उलझन में" है।

कोर्ट ने आगे कहा, "ऐसा लगता है कि सुप्रीम कोर्ट में कानूनी उपाय करने के बहाने केवल समय निकालने की कोशिश की जा रही है।"

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You cannot challenge judgment through tweets: P&H High Court raps Punjab government in DA case