

केरल हाईकोर्ट ने मोटर वाहन विभाग (MVD) को निर्देश दिया है कि दुर्घटनाओं में शामिल वाहनों में किए गए अवैध बदलावों की तस्वीरें और वीडियो, इलेक्ट्रॉनिक डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट (e-DAR) पोर्टल पर अपलोड की जाने वाली दुर्घटना रिपोर्ट का हिस्सा होने चाहिए [Suo Motu v Union of India & Ors]।
जस्टिस अनिल के. नरेंद्रन और मुरली कृष्णा एस. ने 8 अक्टूबर, 2026 को केरल में सड़क सुरक्षा और गाड़ियों में गैर-कानूनी बदलाव से जुड़े एक 'सुओ मोटो' (खुद से संज्ञान लेने वाले) मामले पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिए।
कोर्ट ने कहा, "हमारा मानना है कि संबंधित डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर के ज़रिए (ट्रांसपोर्ट कमिश्नर को) यह निर्देश देना सही है कि वे सुनिश्चित करें कि दुर्घटनाओं में शामिल गाड़ियों में किए गए बदलावों की जानकारी, साथ ही उनकी तस्वीरें और वीडियो, संबंधित जांच अधिकारियों द्वारा e-DAR पोर्टल (www.irad.parivahan.gov.in) पर अपलोड किए जाएं।"
कोर्ट ने आगे कहा कि जांच अधिकारियों को सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की जानकारी भी अपलोड करनी चाहिए, जिनसे ऐसी गाड़ियों की बॉडी से टकराने या रगड़ खाने वाले व्यक्ति को चोट लगने का खतरा हो।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड की जाने वाली जानकारी में खास तौर पर गाड़ी के इंजन की परफॉर्मेंस बढ़ाने के लिए किए गए गैर-कानूनी बदलाव और ब्रेकिंग सिस्टम में किए गए किसी भी तरह के बदलाव शामिल होने चाहिए।
कोर्ट ने यह आदेश तब दिया जब उसने देखा कि ट्रांसपोर्ट कमिश्नर ने 17 सितंबर, 2026 को ही ट्रांसपोर्ट अधिकारियों को दुर्घटनाग्रस्त वाहनों की जांच और उनकी तस्वीरें व वीडियो अपलोड करने के बारे में विस्तृत निर्देश जारी कर दिए थे।
निर्देशों में कहा गया था कि e-DAR पोर्टल पर वाहन में किए गए बदलावों (मॉडिफिकेशन) की जानकारी दर्ज करने और दुर्घटनाग्रस्त वाहनों की तस्वीरें व वीडियो अपलोड करने के लिए खास जगह (फील्ड) दी गई है।
हालांकि, यह पाया गया कि कुछ जांच अधिकारी तस्वीरें अपलोड करने की प्रक्रिया को नजरअंदाज कर रहे थे। इसलिए, कमिश्नर ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि वे जांच के दौरान पाए गए अनधिकृत बदलावों की रंगीन तस्वीरें अपलोड करें।
कमिश्नर ने कोर्ट को यह भी बताया कि हालांकि e-DAR पर अपलोड की गई तस्वीरें ऑनलाइन देखी और डाउनलोड की जा सकती हैं, लेकिन वे दुर्घटना जांच रिपोर्ट की प्रिंटेड कॉपी पर दिखाई नहीं देती हैं।
इस तरह, कोर्ट ने इस तकनीकी समस्या को हल करने के लिए नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) को मामले में शामिल किया और राज्य पुलिस प्रमुख को सड़क सुरक्षा और वाहनों में बदलाव से जुड़े अपने पहले के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने का आदेश दिया।
अपने पिछले आदेशों में, कोर्ट ने उन वाहनों की ओर ध्यान दिलाया था जिनमें तेज रोशनी वाली लाइटें लगी होती हैं, जिनसे सामने से आने वाले ड्राइवरों और पैदल चलने वालों को कुछ समय के लिए देखने में दिक्कत हो सकती है।
अपने ताजा आदेश में, कोर्ट ने फिर से कहा कि ऐसे हर अनधिकृत बदलाव के लिए ₹5,000 का जुर्माना लगाया जाना चाहिए, जिसमें वाहनों पर गैर-कानूनी LED लाइटें, नियॉन लाइटें, लेजर लाइटें, स्ट्रोब लाइटें आदि लगाना शामिल है।
[आदेश पढ़ें]
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