

गुवाहाटी की कामरूप (मेट्रो) कोर्ट ने कांग्रेस नेताओं गौरव गोगोई, भूपेश भागल और दूसरों को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ उनके और उनके परिवार के सदस्यों के कथित ज़मीन के मालिकाना हक के संबंध में बदनाम करने वाले बयान देने से रोक दिया है।
सिविल जज (सीनियर जज) नयन ज्योति सरमा ने मुख्यमंत्री द्वारा तीन कांग्रेस नेताओं और दो लोकल अखबारों के खिलाफ फाइल किए गए केस पर यह ऑर्डर पास किया।
जज ने कहा, "कोर्ट का मानना है कि अगर अंतरिम रोक का ऑर्डर पास नहीं किया जाता है, जैसा कि मांगा गया है, तो इससे न्याय खत्म हो जाएगा और कार्रवाई के कई होने की पूरी संभावना है।"
कोर्ट ने कांग्रेस नेताओं को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया और उनसे पूछा कि अंतरिम रोक को पूरी तरह से लागू क्यों न कर दिया जाए। मामले की अगली सुनवाई 09 मार्च को होगी।
मुख्यमंत्री सरमा ने अपने केस में कहा कि कांग्रेस नेताओं की हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद अखबारों में रिपोर्ट छपी थीं, जिसमें आरोप लगाया गया था कि असम के मुख्यमंत्री ने अपनी पत्नी और परिवार के सदस्यों के नाम पर बड़ी मात्रा में जमीन खरीदी है।
कोर्ट को बताया गया कि ऐसी टिप्पणियां बहुत बदनाम करने वाली हैं। यह भी कहा गया कि अखबारों ने नेचुरल जस्टिस के सिद्धांतों का पालन किए बिना रिपोर्ट छापी।
मुख्यमंत्री की हाल ही में X पर की गई पोस्ट के अनुसार, सरमा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके खिलाफ "झूठे, दुर्भावनापूर्ण और बदनाम करने वाले" आरोप लगाने के लिए कांग्रेस नेताओं से ₹500 करोड़ का हर्जाना मांगा है।
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