

कर्नाटक हाईकोर्ट ने मंगलवार को केंद्र और राज्य सरकारों से एक याचिका पर जवाब मांगा। इस याचिका में निर्देश देने की मांग की गई है कि मौजूदा कमी के संकट के बीच बेंगलुरु के होटलों और रेस्टोरेंट को लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) सिलेंडर बिना किसी रुकावट के मिलते रहें [बैंगलोर होटल एसोसिएशन बनाम भारत संघ]।
न्यायमूर्ति सचिन शंकर मगदुम की अध्यक्षता वाली पीठ ने, आज पहले इस मामले का ज़िक्र किए जाने के बाद, केंद्र और राज्य को नोटिस जारी किया। इस मामले की अगली सुनवाई 23 जून को होगी।
बेंगलुरु होटल एसोसिएशन और उसके कुछ सदस्यों द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि इज़राइल, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब भारत की रसोई तक भी पहुँच गया है, क्योंकि इस भू-राजनीतिक संघर्ष के कारण भारत में LPG सिलेंडरों की आपूर्ति में कमी आ गई है।
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि होटलों और रेस्तरां को LPG सिलेंडरों की आपूर्ति में कोई भी अचानक रुकावट मनमानी है और किसी भी व्यक्ति के अपना पेशा चुनने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।
याचिका के अनुसार, होटल और रेस्तरां भोजन पकाने के लिए ईंधन के मुख्य स्रोत के रूप में LPG सिलेंडरों की नियमित आपूर्ति पर निर्भर रहते हैं। इसलिए, LPG आपूर्ति में अचानक आई कमी होटलों और रेस्तरां के कामकाज को ठप कर सकती है। याचिका में कहा गया कि मौजूदा संकट ने रेस्तरां को अपने मेनू में कटौती करने, काम के घंटे कम करने और यहाँ तक कि उन्हें बंद करने पर भी मजबूर कर दिया है।
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि LPG सिलेंडरों की कमी के कारण होटलों के बंद होने से उन पर निर्भर आम जनता के साथ-साथ अकेले बेंगलुरु में 6 लाख मज़दूरों पर भी असर पड़ सकता है।
यह याचिका वकील सतीश के. के माध्यम से दायर की गई थी।
LPG संकट से जुड़ी एक याचिका हाल ही में बॉम्बे हाईकोर्ट में भी दायर की गई थी, जिसमें छह लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) डीलरों ने दावा किया था कि मौजूदा कमी के बीच घरेलू आपूर्ति के बजाय निर्यात को प्राथमिकता दी जा रही है।
मंगलवार को केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि वह इस संकट से निपटने के लिए सुधारात्मक कदम उठा रही है, ताकि ईरान-इज़राइल युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई LPG की कमी का भारत में आपूर्ति पर कोई असर न पड़े। सरकार की इस दलील को देखते हुए, बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस मामले को बंद कर दिया।
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