

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) की उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें पार्टी के बागी गुट के एक सदस्य की शिकायत पर पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा उसके चार बैंक खातों को फ्रीज़ करने के कदम को चुनौती दी गई थी।
जस्टिस एमएम सुंदरेश और पीबी वराले की बेंच ने कलकत्ता हाई कोर्ट से कहा कि वह बैंक अकाउंट्स से जुड़े लंबित मामलों की कार्यवाही में तेज़ी लाए।
कोर्ट ने कहा कि भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने एक अंतरिम आदेश में पार्टी के चुनाव चिह्न को फ्रीज़ कर दिया है, इसलिए यह बड़ा मुद्दा अभी भी लंबित है कि TMC का कौन सा गुट अकाउंट्स में जमा पैसे का इस्तेमाल करने का हकदार होगा।
कोर्ट ने कहा, "हम मामले के गुण-दोष पर नहीं जा रहे हैं। हम अनुच्छेद 136 के तहत अपने अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं करना चाहते। हम हाई कोर्ट से अनुरोध करते हैं कि वह सुनवाई में तेज़ी लाए।"
इससे पहले, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी-लॉन्ड्रिंग की जांच के सिलसिले में TMC के HDFC बैंक के तीन खातों को भी फ्रीज़ कर दिया था।
11 अगस्त को, सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट की उस अंतरिम व्यवस्था में दखल देने से इनकार कर दिया, जिसके तहत पार्टी के रोज़मर्रा के खर्चों के लिए उन खातों को चलाने की इजाज़त दी गई थी।
मौजूदा मामले से जुड़े इन तीन खातों के संबंध में, कलकत्ता हाई कोर्ट ने पहले TMC को राहत देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की गई।
TMC की तरफ से पेश हुए सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि राज्य की पुलिस पार्टी के बैंक अकाउंट्स को इसलिए फ्रीज़ कर रही है क्योंकि वह पार्टी के खिलाफ है और उसकी राजनीतिक गतिविधियों को रोकना चाहती है।
उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट के आदेश में पहले के तीन अकाउंट्स (जिन्हें एक एडमिनिस्ट्रेटर की देखरेख में चलाने का आदेश दिया गया था) और इन चार अकाउंट्स को एक जैसा समझ लिया गया।
सिंघवी ने कहा, "वह इजाज़त रोज़मर्रा के खर्चों के लिए थी। HDFC के 3 अकाउंट्स फ्रीज़ और फिर डी-फ्रीज़ किए गए थे। आज जिन अकाउंट्स की बात हो रही है, वे इंडियन बैंक के 4 अकाउंट्स हैं। काम इसलिए रुक गया है क्योंकि मेरे ऑडिटेड अकाउंट्स में रोज़मर्रा के खर्चे दिखते हैं, कोई राजनीतिक खर्चा नहीं। हर दिन एक राजनीतिक पार्टी की 'ऑक्सीजन' (कामकाज) ठप हो रही है। उपचुनाव आने वाले हैं। आज यह कहकर कि वे समय आने पर हमारी बात सुनेंगे, मुझे ठप कर दिया गया है।"
कोर्ट ने कहा कि वह कोर्ट द्वारा नियुक्त एडमिनिस्ट्रेटर से इन अकाउंट्स को भी संभालने के लिए कह सकता है। सिंघवी ने कोर्ट के सुझाव पर सहमति जताई।
उन्होंने कहा कि TMC को अपना कामकाज चलाने के लिए हर महीने कम से कम ₹12.15 करोड़ की ज़रूरत होती है।
उन्होंने आगे कहा, "AITC देश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है। ₹12.15 करोड़ की रकम रोज़मर्रा के खर्चों के अलावा है। यह उपचुनाव या कानूनी फीस वगैरह के लिए नहीं है। आप सिर्फ़ रोज़मर्रा के खर्चों के भरोसे राजनीतिक पार्टी नहीं चला सकते। आधिकारिक तौर पर मान्यता प्राप्त विपक्ष, सत्ताधारी पार्टी का समर्थन करता है। मेरी गुज़ारिश है कि जब तक अंतिम सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक आप जल्द सुनवाई करें।"
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पार्टी के अंदर के मतभेदों का ज़िक्र किया और कहा कि कोर्ट को इस मामले में ECI को फैसला लेने देना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा, "एक शिकायत की गई थी और हमें पता चला कि TMC के उनके गुट के एक PA ने उन अकाउंट्स में ₹35 करोड़ नकद जमा किए थे। उसने अग्रिम ज़मानत (anticipatory bail) के लिए अर्ज़ी दी थी, लेकिन हाई कोर्ट और यहाँ भी हार गया। हम इसकी जाँच कर रहे हैं। आरोप है कि पिछली सरकार के समय वह सरकारी ज़मीन को निजी ज़मीन में बदलकर बेच देता था।"
शिकायतकर्ता की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट के. परमेश्वर ने कहा कि रोज़मर्रा के खर्चों की इजाज़त पहले ही दी जा चुकी है। सिंघवी ने जवाब दिया कि ECI की कार्यवाही में बैंक खातों का कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि यह सिर्फ़ चुनाव चिह्न से जुड़ी है।
उन्होंने आगे कहा, "कमिश्नर के पास पहले से ही HDFC के खाते हैं। ये भारतीय बैंक खाते हैं। मिस्टर मेहता मनी लॉन्ड्रिंग वगैरह की बात कर रहे हैं, जिसका इस मामले से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। 'भारी मात्रा में कैश' वगैरह जैसे बुरे और पूर्वाग्रह वाले बयानों के लिए पुलिस कोई वजह नहीं बता रही है।"
हालांकि, कोर्ट उनकी दलीलों से सहमत नहीं हुआ और उसने कोई भी आदेश पारित करने से इनकार कर दिया।
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