

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में एक व्यक्ति को बरी करते हुए कहा कि शादी एक विरोधाभासी और चरम स्थितियों वाली दुनिया है। इस व्यक्ति को ट्रायल कोर्ट ने अपनी पत्नी के गले में जबरदस्ती 'बेगॉन स्प्रे' (एक कीटनाशक) डालकर उसकी हत्या करने की कोशिश का दोषी ठहराया था [नाफे सिंह बनाम राज्य]।
जस्टिस विमल कुमार यादव ने कहा कि "अगर सावधानी से न संभाला जाए, तो सबसे अच्छी चीज़ भी बहुत जल्दी सबसे बुरी चीज़ बन सकती है।"
कोर्ट ने हाल के ऐसे उदाहरणों का ज़िक्र किया जिनमें पति-पत्नी ने एक-दूसरे के ख़िलाफ़ बहुत ज़्यादा हिंसा की; कुछ दशक पहले ऐसी बातें सोची भी नहीं जा सकती थीं।
कोर्ट ने ज़ोर देकर कहा, "अगर समस्याओं का समाधान जल्द से जल्द न किया जाए, तो जीवनसाथी (better-half) कड़वाहट भरा साथी (bitter-half) बन जाता है। पति-पत्नी का रिश्ता इंसानों के सबसे खूबसूरत रिश्तों में से एक है, लेकिन शादी के रिश्ते में जब चीज़ें बिगड़ती हैं, तो यही रिश्ता सबसे भयानक बन सकता है। हालांकि, समय हर ज़ख्म भर देता है और जीवन के कई दुखों को कम कर देता है, लेकिन रिश्तों के मामले में समय गुज़ारना कभी-कभी उल्टा असर भी डाल सकता है।"
कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर सावधानी से न संभाला जाए, तो रिश्ते पूरी तरह से अलग, अवांछित और अप्रत्याशित दिशा में जा सकते हैं।
बेंच ने यह टिप्पणी नाफे सिंह की अपील को मंज़ूरी देते हुए की। नाफे सिंह ने ट्रायल कोर्ट के 2004 के उस आदेश के ख़िलाफ़ अपील की थी, जिसमें उसे अपनी पत्नी की हत्या की कोशिश के लिए तीन साल की सज़ा सुनाई गई थी।
इस जोड़े की शादी 2000 में हुई थी, लेकिन एक साल के अंदर ही उनके रिश्ते खराब हो गए। 2001 में, पति-पत्नी के झगड़े के दौरान, पति नाफे सिंह ने पहले अपनी पत्नी को गिलास से 'बेगॉन' (Baygon) कीटनाशक पिलाने की कोशिश की, और जब वह नाकाम रहा, तो उसने कंटेनर से सीधे उसके गले में कीटनाशक डाल दिया।
एक FIR दर्ज की गई और सिंह तथा उसकी माँ पर दहेज के लिए उत्पीड़न (धारा 498A - क्रूरता) और हत्या की कोशिश (धारा 307) के तहत आरोप लगाए गए।
ट्रायल कोर्ट ने उन्हें धारा 498A के आरोपों से तो बरी कर दिया, लेकिन हत्या की कोशिश के लिए सिंह को तीन साल की सज़ा सुनाई।
इसके बाद हाईकोर्ट में अपील की गई।
24 अगस्त को, जस्टिस यादव ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को पलट दिया। उन्होंने इसके लिए "अस्पष्ट" फोरेंसिक सबूतों और पीड़िता के बयान में विसंगतियों का हवाला दिया।
आदेश में कहा गया कि महिला ने जिरह (cross-examination) के दौरान अपने बयानों में अहम बदलाव किए थे। इनमें "मारपीट के कारण" हुए गर्भपात वाली बात से पलटना भी शामिल था; बाद में उसने माना कि गर्भपात प्राकृतिक रूप से हुआ था।
कोर्ट ने यह भी गौर किया कि सिंह ने ही उसे अस्पताल में भर्ती कराया था और इसके लिए शुरुआती जमा राशि (डिपॉज़िट) भी भरी थी।
इस तरह, कोर्ट ने सिंह को बरी कर दिया।
आरोपी नाफे सिंह की ओर से वकील संजय सूरी, विनी शंगलू और ऋषभ रतन पेश हुए।
राज्य का प्रतिनिधित्व एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (APP) सतिंदर सिंह बावा ने किया।
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