

मुंबई की एक स्पेशल कोर्ट ने बुधवार को आरोपी वर्नोन गोंसाल्वेस और अरुण फरेरा को निर्देश दिया कि वे नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की उन याचिकाओं का जवाब दें, जिनमें भीमा कोरेगांव मामले में ज़मानत की शर्तों के कथित उल्लंघन के आधार पर उनकी ज़मानत रद्द करने की मांग की गई है।
स्पेशल जज चकोर एस. बाविस्कर ने आरोपियों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया।
NIA ने कोर्ट में अर्ज़ी देकर आरोप लगाया कि गोंसाल्वेस और फरेरा 19 जनवरी को मुंबई प्रेस क्लब में हुई एक सभा में शामिल हुए थे, जहाँ दूसरे आरोपी भी मौजूद थे। यह ज़मानत के आदेश में तय शर्तों का उल्लंघन था।
इससे पहले NIA ने इसी आधार पर वकील-एक्टिविस्ट सुधा भारद्वाज और तेलुगु कवि वरवर राव की ज़मानत रद्द करने के लिए भी ऐसी ही कार्रवाई शुरू की थी। वह अर्ज़ी भी कोर्ट में लंबित है।
इस बीच, बुधवार को जज ने NIA की उन अर्जियों को भी मंज़ूरी दे दी जिनमें दो फरार आरोपियों - प्रकाश उर्फ नवीन उर्फ रितुपण गोस्वामी और गणपति उर्फ मुपल्ला लक्ष्मण राव - के खिलाफ उद्घोषणा जारी करने की मांग की गई थी।
मामले की सुनवाई 19 जून तक के लिए टाल दी गई। उस दिन कोर्ट कई लंबित अर्जियों पर सुनवाई करेगा, जिनमें कई डिस्चार्ज अर्जियां (आरोप हटाने की मांग), ज़मानत की शर्तों में बदलाव की मांग, और जेल की सुविधाओं, इलेक्ट्रॉनिक सबूतों व यात्रा की अनुमति से जुड़ी अर्जियां शामिल हैं।
भीमा कोरेगांव मामला 1 जनवरी 2018 को पुणे के पास हुई हिंसा के पीछे माओवादी संबंधों और एक बड़ी साज़िश के आरोपों से जुड़ा है।
इस मामले में 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया था - नौ को शुरू में 2018 में पुणे पुलिस ने और सात को बाद में NIA ने गिरफ्तार किया, जब उसने जांच अपने हाथ में ली।
इन 16 लोगों में से, जेसुइट पादरी और एक्टिविस्ट फादर स्टेन स्वामी की 2021 में हिरासत में मौत हो गई थी।
सभी आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट से ज़मानत मिल चुकी है।
इस मामले में अभी आरोप तय होने बाकी हैं और ट्रायल भी शुरू नहीं हुआ है क्योंकि आरोपियों की डिस्चार्ज अर्जियों पर सुनवाई चल रही है।
और अधिक पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें