सेक्स के बाद ब्लैकमेल: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस को हनीट्रैप गिरोहों पर नकेल कसने का आदेश दिया

अदालत ने टिप्पणी की कि यदि ऐसे अपराधों को जारी रहने दिया गया, तो दुनिया में रहना मुश्किल हो जाएगा।
Allahabad High Court, UP Police
Allahabad High Court, UP Police
Published on
2 min read

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में उत्तर प्रदेश पुलिस को उन गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है, जिन पर कथित तौर पर पुरुषों को 'हनीट्रैप' में फंसाकर उनसे पैसे ऐंठने के लिए महिलाओं का इस्तेमाल करने का आरोप है [फौजिया और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य]।

जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की डिवीज़न बेंच ने कहा कि ऐसे मामले समाज में बहुत ही खतरनाक हालात को दिखाते हैं।

कोर्ट ने कहा, "यह बहुत ही गंभीर मामला है," और उस याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया जिसमें एक व्यक्ति द्वारा हनीट्रैप का आरोप लगाए जाने के बाद, कुछ पुलिसकर्मियों सहित पाँच लोगों के खिलाफ चल रहे जबरन वसूली के मामले को रद्द करने की मांग की गई थी।

कोर्ट ने कहा कि इस मामले में मेरठ ज़ोन के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस द्वारा पूरी तरह से जाँच किए जाने की ज़रूरत है। कोर्ट ने यह भी कहा कि ज़िलों के पुलिस प्रमुखों को सचेत किया जाना चाहिए ताकि वे अपने-अपने इलाकों में सक्रिय ऐसे गिरोहों के बारे में जागरूक रहें।

कोर्ट ने कहा, "उन्हें ज़ोन के सभी ज़िला पुलिस प्रमुखों को सचेत करना चाहिए कि वे कड़ी निगरानी रखें; अगर इस तरह का कोई गिरोह सक्रिय है, या कोई अन्य गिरोह भी सक्रिय है, जो महिलाओं का इस्तेमाल करके हनीट्रैप में फंसाकर या किसी अन्य तरीके से निर्दोष लोगों को ब्लैकमेल कर रहा है, और वही नतीजे ला रहा है। अगर इस तरह के अपराधों को जारी रहने दिया गया, तो एक सभ्य दुनिया में रहना मुश्किल हो जाएगा।"

Justice JJ Munir and Justice Tarun Saxena
Justice JJ Munir and Justice Tarun Saxena

बिजनौर पुलिस द्वारा दर्ज किए गए मामले में, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि बिजनौर के एक होटल में एक महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाने के बाद, आरोपी ने उसे ब्लैकमेल किया। पुलिस केस के अनुसार, महिला ने कुछ वीडियो क्लिप रिकॉर्ड कर लिए थे।

उसने बताया कि आरोपी ने मामला रफा-दफा करने के लिए 8 से 10 लाख रुपये की मांग की थी।

हालांकि, शिकायतकर्ता ने इस मामले की सूचना पुलिस को दी, जिसके बाद एक प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की गई।

इसके बाद आरोपी ने FIR रद्द करवाने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। लेकिन, कोर्ट ने इस मामले को गंभीर मानते हुए याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। तब याचिकाकर्ताओं के वकील ने याचिका वापस ले ली।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, "यह याचिका वापस लिए जाने के आधार पर खारिज की जाती है, लेकिन उन निर्देशों के साथ, जो हमने ऊपर दिए हैं।"

कोर्ट ने निर्देश दिया कि इस आदेश की जानकारी पुलिस महानिदेशक, मेरठ ज़ोन के पुलिस महानिरीक्षक और उत्तर प्रदेश सरकार (लखनऊ) के अपर मुख्य सचिव (गृह) को दी जाए।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील शशांक द्विवेदी पेश हुए।

राज्य सरकार की ओर से अपर शासकीय अधिवक्ता शशि शेखर तिवारी पेश हुए।

[आदेश पढ़ें]

Attachment
PDF
Fojiya_and_others_v_State_of_UP_and_Others
Preview

और अधिक पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें


Blackmail after sex: Allahabad High Court orders police to crack down on honeytrap gangs

Hindi Bar & Bench
hindi.barandbench.com