शहर को साफ़ रखने की ज़िम्मेदारी नागरिकों की भी बराबर है: बॉम्बे हाईकोर्ट ने बेहतर नागरिक बोध की अपील की

कोर्ट ने कहा कि जो लोग सार्वजनिक सड़कों पर बेझिझक कचरा फेंकते हैं, वे विदेश जाने पर ऐसी हरकतें नहीं करते। कोर्ट ने नागरिकों की सख्त जवाबदेही की बात कही।
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि सार्वजनिक जगहों को साफ़-सुथरा रखना एक सामूहिक संवैधानिक ज़िम्मेदारी है, न कि सिर्फ़ म्युनिसिपल अथॉरिटीज़ की ही ज़िम्मेदारी [कन्नमवार नगर को-ऑप. हाउसिंग सोसाइटी बनाम भारत संघ और अन्य]।

जस्टिस जीएस कुलकर्णी और नीला गोखले की बेंच ने मुंबई में सॉलिड वेस्ट (ठोस कचरे) से होने वाले प्रदूषण से जुड़ी चिंताओं वाले एक मामले पर विचार करते हुए यह बात कही।

कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि कचरा-मुक्त शहर का लक्ष्य हासिल करने के लिए नागरिकों को बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (BMC) की सक्रिय रूप से मदद करनी चाहिए।

कोर्ट ने 27 अगस्त के अपने आदेश में कहा, "हम इस बात पर भी ज़ोर देना चाहते हैं कि मुंबई जैसे बड़े शहरों में हर इलाके—चाहे वह रिहायशी हो, कमर्शियल हो, झुग्गी-बस्ती हो, गली-मोहल्ले हों, फुटपाथ, सड़कें, खुली जगहें, बगीचे, समुद्र के किनारे या बीच (beaches) हों—वहाँ गंदगी, कूड़ा-कचरा वगैरह न हो; यह जनहित के लिहाज़ से बहुत ज़रूरी है।"

Justices GS Kulkarni and Neela Gokhale
Justices GS Kulkarni and Neela Gokhale

कोर्ट ने कहा कि नागरिकों का यह मौलिक कर्तव्य है कि वे पर्यावरण की रक्षा और सुधार करें और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा करें।

कोर्ट ने कहा, "समाज के प्रति नागरिकों की ऐसी जिम्मेदारियों को न तो भुलाया जा सकता है और न ही उनसे समझौता किया जा सकता है... नगरपालिका तंत्र की मदद करके सार्वजनिक स्वच्छता बनाए रखना 'हम नागरिकों' का सामूहिक कर्तव्य है।"

यह बहुत ज़रूरी है कि मुंबई जैसे बड़े शहर गंदगी, कचरे आदि से मुक्त हों।
बॉम्बे हाईकोर्ट

बेंच ने इस बात पर ज़ोर दिया कि कचरे का गलत तरीके से निपटारा करने से समुदाय की सेहत और पर्यावरण की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ता है। कोर्ट ने कहा कि नागरिक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए समाज के सभी वर्गों को युद्ध स्तर पर समर्पित प्रयास करने की ज़रूरत है।

कोर्ट ने कहा, "मौजूदा हालात और नगरपालिका तंत्र द्वारा किए जा रहे भारी प्रयासों को देखते हुए, ऐसे लक्ष्यों को हासिल करना निश्चित रूप से केवल नगरपालिका निगम की ही ज़िम्मेदारी और कर्तव्य नहीं है, क्योंकि एक स्वच्छ और साफ़-सुथरे शहर के आदर्शों को हासिल करने में आम नागरिक भी बराबर के हिस्सेदार हैं।"

बेंच ने आगे कहा कि लापरवाही से कचरा फेंकने से पूरे शहर में गंभीर बीमारियों का खतरा पैदा होता है।

आदेश में कहा गया, "कचरा निपटान के तय तंत्र की अनदेखी करके हर तरह का कचरा लापरवाही से फेंकने से मच्छर, चूहे और आवारा जानवर पनपते हैं, जिससे डेंगू, मलेरिया, लेप्टोस्पायरोसिस, हैजा जैसी बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है।"

कोर्ट ने कहा कि जब तक निवासी खुद अपनी लापरवाह आदतों को नहीं सुधारते और नागरिक के तौर पर अपनी बुनियादी ज़िम्मेदारियों को नहीं निभाते, तब तक नगर पालिका अधिकारी सफ़ाई से जुड़ी ऐसी समस्याओं को हल नहीं कर सकते।

कोर्ट ने इस बात पर भी ध्यान दिलाया कि जो लोग सार्वजनिक सड़कों पर बेझिझक कचरा फेंकते हैं, वे विदेश जाने पर ऐसी हरकतें नहीं करते।

कोर्ट ने आगे कहा कि ऐसी प्रवृत्तियों से निपटने के लिए निवासियों की जवाबदेही तय करने के लिए सख़्त रवैया अपनाना ज़रूरी है।

BMC की तरफ़ से सीनियर एडवोकेट अनिल सखारे ने पिछले हफ़्ते एक हलफ़नामा (affidavit) जमा किया, जिसमें BMC के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट बाय-लॉज़ 2025 के तहत उठाए गए अहम कदमों की जानकारी दी गई। BMC ने कोर्ट को बताया कि गैर-कानूनी तरीके से कचरा फेंकने से रोकने के लिए 'कचरा फेंकने की संवेदनशील जगहों' (garbage vulnerable points) पर CCTV कैमरे लगाए जा रहे हैं।

कोर्ट को बताया गया कि सिविक बॉडी ने झुग्गी-बस्तियों से कचरा इकट्ठा करने के लिए NGO को काम पर लगाया है, तीन-शिफ़्ट वाले कचरा कलेक्शन रूट बनाए हैं और नागरिकों की शिकायतों के लिए 'MyBMC Marg' ऐप लॉन्च किया है।

साफ़-सुथरे वार्डों को इनाम देने के लिए 'मुंबई क्लीन लीग 2026' पहल भी शुरू की गई है।

याचिकाकर्ता-सोसायटी की तरफ़ से पेश हुए एडवोकेट अभिजीत राणे ने विक्रोली ईस्ट में प्लास्टिक कचरे से भरी बंद खुली नालियों की तस्वीरें दिखाईं। उन्होंने एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग रिपोर्ट में हवा की खराब गुणवत्ता की ओर भी इशारा किया।

कोर्ट ने वार्ड अधिकारियों को बंद नालियों की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने BMC को एयर क्वालिटी पैरामीटर के बारे में स्पष्टीकरण मांगने के लिए समय दिया।

बेंच ने यह उम्मीद भी जताई कि समय के साथ हालात बेहतर होंगे और कहा कि "कभी भी बहुत देर नहीं होती।"

बेंच ने आगे कहा, "एक बार जब समुदाय ऐसे लक्ष्यों को हासिल करने की इच्छाशक्ति बना लेता है, तो इस मामले में सफलता बहुत दूर नहीं होती। साथ ही, जैसा कि म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की तरफ़ से बताया गया, 'क्लीन मुंबई, ग्रीन मुंबई' सिर्फ़ कागज़ी नारा नहीं रहेगा, बल्कि एक ऐसा विज़न बनेगा जो हकीकत में बदलेगा।"

इस मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026 को होगी।

यूनियन ऑफ़ इंडिया की तरफ़ से एडवोकेट अनिल डी यादव पेश हुए।

राज्य की तरफ़ से एडिशनल सरकारी वकील ज्योति चव्हाण पेश हुईं।

BMC की तरफ़ से सखारे के साथ एडवोकेट रोहन मीरपुरी, पुष्पा यादव और कोमल पंजाबी पेश हुए।

कोस्टल ज़ोन अथॉरिटी और पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की तरफ़ से एडवोकेट जया बागवे पेश हुईं।

एंथनी लारा एनवायरो सॉल्यूशंस की तरफ़ से एडवोकेट साकेत मोने, सुबित चक्रवर्ती, श्रेय शाह, मिताली धोबले (विधि पार्टनर्स द्वारा ब्रीफ़ किए गए) पेश हुए।

एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया की तरफ़ से एडवोकेट राधा एच भंडारी (MV किनी एंड कंपनी द्वारा ब्रीफ़ किए गए) पेश हुईं।

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