अगर आप चाहते हैं कि हम आपका केस सुनें तो भारत वापस आ जाएं: बॉम्बे हाईकोर्ट ने विजय माल्या से कहा

कोर्ट ने माल्या को चेतावनी दी कि अगर वह वापस नहीं आ सकते, तो वे 2018 के भगोड़े आर्थिक अपराधी एक्ट को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर सुनवाई नहीं करेंगे।
Vijya Mallya
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को विजय माल्या के यूनाइटेड किंगडम में भगोड़े के तौर पर रहकर भारतीय अधिकारियों से बचते हुए कोर्ट से राहत पाने की कोशिश पर एतराज़ जताया। [विजय माल्या बनाम यूनियन ऑफ़ इंडिया और अन्य]

चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंखड की बेंच ने कहा कि अगर माल्या चाहते हैं कि कोर्ट फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट 2018 (FEO एक्ट) की वैलिडिटी को चुनौती देने वाली उनकी पिटीशन पर विचार करे, तो उन्हें भारत लौट आना चाहिए।

बेंच ने चेतावनी दी, "आपको वापस आना होगा। अगर आप वापस नहीं आ सकते, तो हम इस पिटीशन पर सुनवाई नहीं कर सकते।"

यह माल्या की उस पिटीशन पर सुनवाई कर रही थी जिसमें FEO एक्ट और उन्हें फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर घोषित करने की प्रोसिडिंग्स को चुनौती दी गई थी।

कोर्ट की यह टिप्पणी 23 दिसंबर के उसके ऑर्डर के बाद आई है जिसमें माल्या को एक एफिडेविट फाइल करने का निर्देश दिया गया था जिसमें बताया गया था कि वह UK से भारत कब लौटने का इरादा रखते हैं।

कोर्ट ने उनसे यह भी साफ करने को कहा था कि FEO एक्ट के अधिकारों को लेकर उनकी चुनौती पर तब तक सुनवाई नहीं होगी जब तक वह पहले कोर्ट के जूरिस्डिक्शन में सबमिट नहीं करते।

इन निर्देशों के बावजूद, बेंच ने आज नोट किया कि माल्या भारत लौटने के अपने इरादे के बारे में एफिडेविट जमा करने में फेल रहे।

कोर्ट ने कहा, "आप (इंडियन और UK) कोर्ट के प्रोसेस से बच रहे हैं, इसलिए आप फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स (FEO) एक्ट को चुनौती देने वाली मौजूदा पिटीशन का फायदा नहीं उठा सकते।"

Chief Justice Shree Chandrashekar and Gautam Ankhad
Chief Justice Shree Chandrashekar and Gautam Ankhad
आपको वापस आना होगा। अगर आप वापस नहीं आ सकते, तो हम इस याचिका पर सुनवाई नहीं कर सकते।
बॉम्बे हाईकोर्ट

एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (EWD) की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि माल्या ने एक एफिडेविट फाइल किया था जिसमें दावा किया गया था कि बैंकों ने उनसे पैसे मांगकर गलती की और वे केस को रिकवरी प्रोसिडिंग्स में बदलने की कोशिश कर रहे थे।

उन्होंने दलील दी कि माल्या ने 2018 एक्ट को तभी चुनौती दी थी जब वे भगोड़े बन गए थे और जब भारत लंदन में एक्सट्रैडिशन प्रोसिडिंग्स के आखिरी दौर में था। उन्होंने कहा कि माल्या भारत आकर हर बात पर बहस कर सकते हैं, लेकिन उन्हें भारतीय कानून पर भरोसा नहीं करना चाहिए और फिर भी इक्विटी का दावा नहीं करना चाहिए।

मेहता ने कहा, “वह आकर एफिडेविट में लिखी हर बात पर बात कर सकते हैं। कि मैं पेमेंट करने के लिए तैयार हूं, पेमेंट करने के लिए तैयार नहीं हूं, पेमेंट करने के लिए लायबल नहीं हूं। लेकिन वह इस देश के कानून पर भरोसा नहीं कर सकते और इक्विटी जूरिस्डिक्शन का इस्तेमाल नहीं कर सकते।”

Solicitor General Tushar Mehta
Solicitor General Tushar Mehta

बेंच ने मेहता से टाइमलाइन और डिटेल्स जमा करने को कहा, जिसे वे अगली सुनवाई में अपने ऑर्डर में रिकॉर्ड करेंगे।

माल्या की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट अमित देसाई ने एक जजमेंट का हवाला देते हुए कहा कि कानून के नेचर को देखते हुए, माल्या को भारत आए बिना भी सुना जा सकता है।

Amit Desai
Amit Desai

हालांकि, बेंच ने इस बात पर ज़ोर दिया कि माल्या को यह बताने के लिए एक मौजूदा ऑर्डर है कि वह कब लौटने का इरादा रखते हैं।

चूंकि उनकी बात नहीं मानी गई है, इसलिए अब अगर वह अगली तारीख पर भी ऐसा नहीं करते हैं, तो उन्हें नॉन-कम्प्लायंस पर ऑर्डर पास करना होगा।

कोर्ट ने माल्या से कहा, “आपके साथ ईमानदारी से कहूं तो, हम इसे खारिज नहीं कर रहे हैं; हम आपको एक और मौका दे रहे हैं,” और मामले की सुनवाई अगले हफ़्ते के लिए टाल दी।

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