बम की धमकी के मामले में संदिग्ध के WhatsApp कॉन्टैक्ट्स की जानकारी मांगने पर दिल्ली HC ने निजता संबंधी चिंताओं को उठाया

दिल्ली पुलिस WhatsApp यूज़र के सेव किए गए कॉन्टैक्ट्स के बारे में जानकारी मांग रही जिसने पिछले साल दिल्ली में पेट्रोलियम मंत्रालय को बम से उड़ाने की झूठी धमकी दी।कोर्ट ने WhatsApp से इस पर जवाब मांगा
Delhi High Court, WhatsApp
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दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को इस बात पर चिंता जताई कि अगर वह दिल्ली पुलिस की उस याचिका को मंज़ूरी दे देता है, जिसमें जून 2025 में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय को बम से उड़ाने की झूठी धमकी देने के आरोपी व्यक्ति के WhatsApp पर सेव किए गए कॉन्टैक्ट्स की जानकारी मांगी गई है, तो इससे निजता के अधिकार पर असर पड़ सकता है।

जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने इस मामले में WhatsApp से जवाब मांगा है।

हालांकि, जज ने दिल्ली पुलिस की अर्जी पर कुछ आपत्तियां भी जताईं। खास तौर पर, उन्होंने यह सवाल उठाया कि क्या WhatsApp पर संदिग्ध द्वारा सेव किए गए कॉन्टैक्ट्स की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।

कोर्ट ने इस बात की ओर इशारा किया कि संदिग्ध ऐसे लोगों के नंबर भी सेव कर सकता है, जिन्हें यह पता भी नहीं होता कि उनका कॉन्टैक्ट सेव किया गया है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे नंबरों में सरकारी अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं, जिनसे संदिग्ध ने शायद कभी संपर्क भी न किया हो।

कोर्ट ने सवाल किया कि क्या ऐसे लोगों की अधिकारियों द्वारा बेवजह जांच की जानी चाहिए।

कोर्ट ने कहा, “कोई भी किसी सरकारी विभाग की डायरेक्टरी उठाकर WhatsApp में कुछ नंबर सेव कर सकता है। फिर आप कहेंगे, 'ओह, वह फलां-फलां व्यक्ति के संपर्क में है।' इसका कोई मतलब नहीं है। फिर आप उस व्यक्ति की डिटेल्स मांगेंगे। आप कहेंगे, 'अब मुझे वह डेटा चाहिए।' आप किसी और के नंबर की जांच-पड़ताल शुरू कर देंगे। तब तो कोई प्राइवेसी ही नहीं बचेगी।”

Anup Jairam Bhambhani
Anup Jairam Bhambhani

कोर्ट ने आगे कहा कि दिल्ली पुलिस को इस संभावना पर भी विचार करना चाहिए कि हो सकता है कि आरोपी को उन जजों, मंत्रियों और सीनियर अधिकारियों के कॉन्टैक्ट नंबर सेव करने की आदत हो, जिनका उससे या उसके कामों से कोई लेना-देना नहीं है।

दिल्ली पुलिस की यह याचिका एक चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (CJM) के उस फैसले से जुड़ी है, जिसमें उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति के नंबर से जुड़े एसिमेट्रिकल WhatsApp डेटा (एन्क्रिप्टेड डेटा) को जारी करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया था, जिस पर बम की झूठी धमकी देने का आरोप है।

CJM के आदेश की वैधता पर सवाल उठाने वाली एक पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद, दिल्ली पुलिस ने अपनी याचिका लेकर हाईकोर्ट का रुख किया।

कल जारी किए गए आदेश में, हाईकोर्ट ने इस बात का ज़िक्र किया कि CJM ने यह टिप्पणी की थी कि एसिमेट्रिकल डेटा की माँग को मंज़ूरी नहीं दी जा सकती, क्योंकि इससे तीसरे पक्षों की निजता का उल्लंघन हो सकता है।

सुनवाई के दौरान, राज्य के एडिशनल स्टैंडिंग काउंसिल (ASC) ने यह तर्क दिया कि पुलिस को WhatsApp से एसिमेट्रिकल डेटा की ज़रूरत इसलिए है, ताकि यह जाँच की जा सके कि क्या आरोपी किसी तीसरे पक्ष के साथ संपर्क में था।

ASC ने आगे बताया कि आरोपी ने WhatsApp पर कुल चौदह कॉन्टैक्ट सेव किए थे। आरोपी पर यह भी आरोप है कि उसने खुद को गृह मंत्रालय का अधिकारी बताकर गलत पहचान पेश की थी, और 'ड्रोन फेडरेशन इंडिया' से संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश की थी।

कोर्ट द्वारा निजता को लेकर जताई गई चिंताओं के जवाब में, ASC ने यह भी आश्वासन दिया कि जो लोग आरोपी नहीं हैं, उनकी कोई जाँच नहीं की जाएगी।

इस मामले की अगली सुनवाई 26 मई को होगी।

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Delhi HC flags privacy concerns after police seek info on WhatsApp contacts of suspect in bomb threat case

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