दिल्ली हाईकोर्ट ने GST अपीलीय ट्रिब्यूनल के न्यायिक और तकनीकी सदस्यो के लिए अलग-अलग ड्रेस कोड के खिलाफ दायर PIL को खारिज किया

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि ड्रेस कोड में अंतर आँखों को खटकने वाला था।
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दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को एक वकील द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। इस याचिका में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (GSTAT) में न्यायिक और तकनीकी सदस्यों के लिए ड्रेस कोड में अंतर का मुद्दा उठाया गया था [गरिमा सिंह और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य]।

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने कहा कि ऐसे मामलों का निर्णय न्यायालयों द्वारा नहीं किया जा सकता।

अदालत ने कहा “यह PIL कैसे है? ये मुद्दे न्याय-योग्य नहीं हैं।”

pChief Justice Devendra Kumar Upadhyaya and Justice Tejas Karia
pChief Justice Devendra Kumar Upadhyaya and Justice Tejas Karia

याचिकाकर्ताओं ने GSTAT के प्रेसिडेंट द्वारा जून 2025 में जारी एक ऑफिस ऑर्डर पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि उक्त आदेश में दो अलग-अलग ड्रेस कोड तय किए गए हैं—एक ट्रिब्यूनल के प्रेसिडेंट और न्यायिक सदस्यों के लिए, और दूसरा तकनीकी सदस्यों के लिए।

उन्होंने दलील दी कि ऑफिस ऑर्डर के अनुसार, ट्रिब्यूनल के प्रेसिडेंट और न्यायिक सदस्यों को वही कपड़े पहनने होंगे जो सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के लिए तय हैं, लेकिन बिना गाउन के। वहीं, तकनीकी सदस्यों को सफेद, धारीदार या काले रंग की पतलून, काला कोट, सफेद शर्ट और नेकटाई पहननी होगी।

कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ट्रिब्यूनल के प्रेसिडेंट के सामने अपनी बात रख सकते हैं।

हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा, "ट्रिब्यूनल के न्यायिक सदस्य आम तौर पर सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के जज होते हैं। किसी गैर-न्यायिक सदस्य को गाउन या बैंड पहनने की अनुमति नहीं दी जा सकती। शायद यही इसकी वजह हो। क्या आप चाहते हैं कि गैर-न्यायिक लोग भी गाउन पहनें? आप अपनी बात ट्रिब्यूनल के प्रेसिडेंट के सामने रखें।"

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि ड्रेस कोड में यह अंतर देखने में अटपटा लग रहा है।

उन्होंने तर्क दिया, "प्रेसिडेंट और सदस्यों का ड्रेस कोड तकनीकी सदस्यों से अलग है, जिससे ड्रेस कोड में एक तरह का भेदभाव पैदा हो रहा है। न्यायिक सदस्य तो जज की तरह बैठेंगे, जबकि तकनीकी सदस्य का पहनावा किसी कोर्ट मास्टर जैसा होगा। इस बात पर भी खूब चर्चा हो रही है कि क्या उनके पास कोई अधिकार भी हैं। यह स्थिति देखने में बिल्कुल भी अच्छी नहीं लग रही है। देश के किसी भी ट्रिब्यूनल में अलग-अलग ड्रेस कोड नहीं होते। यह एक तरह का भेदभाव है।"

कोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलील को रिकॉर्ड किया और उन्हें ट्रिब्यूनल के प्रेसिडेंट से संपर्क करने की अनुमति दे दी।

कोर्ट ने निर्देश देते हुए कहा, "हमारी राय में, इस मामले पर प्रेसिडेंट ही बेहतर फैसला ले सकते हैं। इसलिए, हम याचिकाकर्ता को अपनी शिकायत प्रेसिडेंट के सामने रखने की अनुमति देते हैं। यदि कोई अभ्यावेदन (representation) दिया जाता है, तो हम GSTAT के माननीय प्रेसिडेंट से अनुरोध करते हैं कि वे उस पर विचार करें और, यदि संभव हो, तो जल्द से जल्द उचित निर्णय लें।"

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Delhi HC rejects PIL against different dress codes for judicial and technical members of GST Appellate Tribunal

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