दिल्ली हाईकोर्ट ने SC/ST एक्ट मामले में अजीत भारती की अग्रिम ज़मानत याचिका खारिज कर दी

भारती ने ट्रायल कोर्ट के 7 सितंबर के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया गया था।
Ajeet Bharti
Ajeet Bharti
Published on
3 min read

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को यूट्यूबर अजीत भारती को अग्रिम ज़मानत देने से इनकार कर दिया। उन पर सांसद चंद्रशेखर आज़ाद रावण के बारे में की गई टिप्पणियों को लेकर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (SC/ST एक्ट) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

जस्टिस सौरभ बनर्जी ने कहा कि भारती के खिलाफ़ SC/ST एक्ट की धारा 3(1)(r) और 3(1)(s) के तहत अपराध प्रथम दृष्टया बनता है और अग्रिम ज़मानत देने पर कानूनी रोक है।

धारा 3(1)(r) SC/ST समुदाय के सदस्यों को अपमानित करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करने या डराने-धमकाने से संबंधित है। धारा 3(1)(s) SC/ST समुदाय के किसी सदस्य को जातिसूचक नाम से गाली देने से संबंधित है।

कोर्ट ने कहा कि याचिका सुनवाई योग्य नहीं है और इसलिए इसे खारिज किया जा रहा है।

विस्तृत आदेश का इंतज़ार है।

Justice Saurabh Banerjee
Justice Saurabh Banerjee

भारती ने ट्रायल कोर्ट के 7 सितंबर के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उन्हें अग्रिम ज़मानत (anticipatory bail) देने से इनकार कर दिया गया था।

उनके ख़िलाफ़ 23 अगस्त को दिल्ली के नॉर्थ एवेन्यू पुलिस स्टेशन में SC/ST एक्ट, IT एक्ट की धारा 67 और भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(1)(c) और 351(3) के तहत FIR दर्ज की गई थी।

यह शिकायत आज़ाद समाज पार्टी (कांशी राम) के दिल्ली राज्य अध्यक्ष बालकराम बौद्ध ने दर्ज कराई थी। शिकायत भारती के सोशल मीडिया हैंडल पर पब्लिश हुए 'SB79: Reservation Hatao Andolan Nautanki & More | Saptahik Bakaiti' टाइटल वाले एक वीडियो को लेकर की गई थी।

शिकायत के अनुसार, भारती ने जाति-आधारित और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया, दलित नेता और सांसद चंद्रशेखर आज़ाद रावण और डॉ. बी.आर. अंबेडकर के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक बातें कहीं, महिलाओं के बारे में यौन रूप से अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया और धमकियाँ दीं।

हालाँकि, भारती ने सार्वजनिक रूप से अपना बचाव करते हुए कहा है कि उनके वीडियो पर उनकी माँ/बहन के बारे में की गई अपमानजनक टिप्पणी से उकसावे में आकर उन्होंने ये बातें कहीं थीं।

आज भारती की तरफ़ से पेश हुए वकील जय अनंत देहाद्रई ने कहा कि भारती जाति के आधार पर भेदभाव के ख़िलाफ़ हैं।

देहाद्रई ने दलील दी कि इस मामले में SC/ST एक्ट के प्रावधान लागू नहीं होते। उन्होंने कहा कि यूट्यूबर ने आरक्षण के मुद्दे पर एक संतुलित राय रखी थी।

उन्होंने कहा कि भारती ने चंद्रशेखर आज़ाद को उनकी जाति की पहचान की वजह से निशाना नहीं बनाया था। उन्हें अपनी बहन के ख़िलाफ़ की गई टिप्पणियों से उकसाया गया था।

उन्होंने कहा, "सोशल मीडिया फ़ीड पर मेरी बहन के साथ बदसलूकी की गई, मैंने उसका जवाब दिया। कुछ लोगों को यह पसंद नहीं आ सकता है, लेकिन मेरा मकसद बदनाम करना नहीं था... मैंने मिस्टर आज़ाद की जाति का नाम तक नहीं लिया है। मुख्य बात यही है।"

दिल्ली पुलिस के वकील ने ज़मानत अर्ज़ी का विरोध किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि तथ्यों से यह साफ़ है कि भारती ने अपने बयानों में एक ख़ास जाति का अपमान किया है।

उन्होंने कहा, "ये सभी बातें सोशल मीडिया पर कही गई हैं। तीसरी बात यह है कि वह उसी जाति से नहीं हैं। SC/ST एक्ट लागू करने के लिए ये तीनों बातें मौजूद हैं।"

शिकायतकर्ता की तरफ़ से पेश वकील ने कहा कि भारती ने जानबूझकर एक ख़ास जाति को निशाना बनाया। उन्होंने यह भी कहा कि चूंकि भारती के ख़िलाफ़ प्रथम दृष्टया मामला बनता है, इसलिए उन्हें अग्रिम ज़मानत नहीं दी जा सकती।

वकील ने आगे कहा कि भारती "आदतन अपराधी" हैं और उन्होंने पहले भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) के बारे में भी आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।

और अधिक पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें


Delhi High Court denies anticipatory bail to Ajeet Bharti in SC/ST Act case

Hindi Bar & Bench
hindi.barandbench.com