दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की कस्टडी मे मौत के मामले में कुलदीप सिंह सेंगर को ज़मानत देने से इनकार कर दिया

उन्नाव रेप पीड़िता के पिता को सेंगर के कहने पर गिरफ्तार किया गया था और 9 अप्रैल, 2018 को पुलिस की बर्बरता के कारण हिरासत में उनकी मौत हो गई थी।
Kuldeep Singh Sengar, Delhi HC
Kuldeep Singh Sengar, Delhi HC
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दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की कस्टडी में मौत से जुड़े मामले में पूर्व भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को ज़मानत देने से इनकार कर दिया [कुलदीप सिंह सेंगर बनाम सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन]।

जस्टिस रविंदर डुडेजा ने कहा कि सेंगर ने 10 साल की कुल सज़ा में से करीब 7.5 साल हिरासत में बिताए हैं और इस मामले में दोषसिद्धि के खिलाफ़ उसकी अपील पर फ़ैसला होने में देरी हुई है, लेकिन यह देरी कुछ हद तक सेंगर की वजह से हुई, जिसने कई एप्लीकेशन दायर कीं।

इसलिए, उन्होंने ज़मानत और सज़ा को निलंबित करने की याचिका खारिज कर दी।

विस्तृत आदेश का इंतज़ार है।

Justice Ravinder Dudeja
Justice Ravinder Dudeja

उन्नाव रेप पीड़िता के पिता को सेंगर के कहने पर गिरफ्तार किया गया था और 9 अप्रैल, 2018 को पुलिस की बर्बरता के कारण हिरासत में उनकी मौत हो गई थी। मार्च 2020 में दिल्ली की एक अदालत ने उनकी मौत के लिए सेंगर और अन्य को दोषी ठहराया और 10 साल जेल की सज़ा सुनाई।

खास बात यह है कि जून 2024 में हाईकोर्ट ने सेंगर की इसी तरह की याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने तब कहा था कि जब अपराध की गंभीरता, अपराध की प्रकृति, दोषी के आपराधिक रिकॉर्ड और न्यायपालिका में जनता के विश्वास पर पड़ने वाले प्रभाव जैसे कारकों पर विचार किया जाता है, तो सेंगर सज़ा निलंबित करने का हकदार नहीं है।

उन्नाव रेप पीड़िता, जो नाबालिग थी, का कथित तौर पर 11 जून से 20 जून, 2017 के बीच सेंगर ने अपहरण कर रेप किया था। इसके बाद उसे ₹60,000 में बेच दिया गया था। इसके बाद पीड़िता को सेंगर के निर्देश पर पुलिस अधिकारियों द्वारा लगातार धमकी दी गई और बोलने के खिलाफ चेतावनी दी गई।

यह मामला तब विवादों में आ गया जब एक बिना नंबर प्लेट वाली लॉरी ने उस कार को टक्कर मार दी जिसमें पीड़िता यात्रा कर रही थी। पीड़िता और उसके वकील गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि उसकी दो चाचियों की मौत हो गई।

अगस्त 2019 में, सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव रेप केस से जुड़े चार मामलों की सुनवाई दिल्ली ट्रांसफर कर दी और आदेश दिया कि सुनवाई रोज़ाना के आधार पर हो और 45 दिनों के भीतर पूरी की जाए।

दिसंबर 2019 में सेंगर को नाबालिग पीड़िता के रेप के साथ-साथ पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के लिए दोषी ठहराया गया था। उसे रेप केस में आजीवन कारावास और हिरासत में मौत के मामले में 10 साल जेल की सज़ा सुनाई गई थी।

हाल ही में, दिल्ली हाईकोर्ट ने सेंगर को रेप केस में ज़मानत दे दी। हालांकि, सीबीआई द्वारा अपील दायर करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगा दी।

वरिष्ठ वकील मनीष वशिष्ठ के साथ वकील ऐश्वर्या सेंगर, वेदांश वशिष्ठ, स्वपन सिंघल, कन्हैया सिंघल, अवंतिका शंकर और शताक्षी सिंह कुलदीप सिंह सेंगर की ओर से पेश हुए।

सीबीआई की ओर से स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (SPP) अनुभा भारद्वाज और वकील अनन्या शमशेरी पेश हुईं। वकील महमूद पारचा, क्षितिज सिंह और कुमैल अब्बास ने पीड़िता का प्रतिनिधित्व किया।

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Delhi High Court denies bail to Kuldeep Singh Sengar in custodial death case of Unnao rape survivor's father

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