

दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (DUSU) चुनाव के हाल ही में घोषित नतीजों को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी [विजय शंकर मीणा बनाम दिल्ली यूनिवर्सिटी और अन्य]।
यह याचिका नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ़ इंडिया (NSUI) के उम्मीदवार विजय शंकर मीणा ने दायर की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि कॉलेज के प्रोफ़ेसरों, एडमिनिस्ट्रेटर्स और चुनाव अधिकारियों ने गड़बड़ी और पक्षपात किया था।
DUSU चुनाव के नतीजे 19 सितंबर को घोषित किए गए थे, जिसमें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के तीन उम्मीदवार प्रेसिडेंट, वाइस प्रेसिडेंट और सेक्रेटरी के पदों पर जीते थे।
मीणा ने अपनी याचिका में कुछ तस्वीरें और वीडियो पेश किए, जिनमें दिल्ली यूनिवर्सिटी के कुछ कॉलेज प्रोफ़ेसर और चुनाव अधिकारी ABVP उम्मीदवारों की जीत का जश्न मनाते हुए दिख रहे थे।
जस्टिस सौरभ बनर्जी ने कहा कि नतीजे घोषित होने के बाद उम्मीदवारों के साथ तस्वीरें खिंचवाने का मतलब प्रचार करना या पक्षपात करना नहीं है।
कोर्ट ने कहा, "अगर कोई आकर तस्वीर खिंचवाता है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह प्रचार कर रहा है। चुनाव के बाद इससे क्या फ़र्क पड़ता है? चुनाव से पहले वे ऐसा नहीं कर सकते। इसमें कोई तारीख या समय नहीं है। वीडियो लिंक के बारे में, आप खुद मान रहे हैं कि यह चुनाव के बाद का है। चुनाव के बाद इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता। लिंगदोह कमेटी (जिसने कैंपस चुनावों के लिए गाइडलाइंस बनाई थीं) का नियम साफ़ है, आपके पास सबूत होना चाहिए।"
कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता की तरफ़ से जमा की गई तस्वीरों में तारीख या समय की कोई जानकारी नहीं है। कोर्ट ने यह भी देखा कि कुछ मटीरियल के बारे में कहा गया है कि वह AI-जनरेटेड कंटेंट है।
कोर्ट ने कहा, "साथ में लगाई गई तस्वीरें यह साबित करने के लिए बिल्कुल भी काफ़ी नहीं हैं कि DU का कोई व्यक्ति (जो पहले था या अभी है) चुनाव के दौरान किसी उम्मीदवार के लिए प्रचार कर रहा था।"
हालांकि, मीना के वकील का कहना था कि DUSU चुनाव के संचालन में पक्षपात को लेकर गंभीर चिंताएं थीं।
उन्होंने कहा, "अगर कोई व्यक्ति (चुनाव के बाद) खुलेआम नारे लगा रहा है, तो इस बात की संभावना बहुत कम है कि चुनाव से पहले उसने छात्रों के सामने कोई ठोस बात न कही हो।"
हालांकि, कोर्ट ने इस मामले में आगे पड़ने से इनकार कर दिया और मीना की याचिका खारिज कर दी।
कोर्ट ने आदेश दिया, "(याचिकाकर्ता) लिंगदोह समिति की रिपोर्ट का हवाला देना चाहता है। वह रिपोर्ट इस मामले में लागू नहीं होती क्योंकि याचिकाकर्ता घटनाओं की तारीख और समय नहीं बता पाया है। इसे देखते हुए, यह याचिका खारिज की जाती है।"
जज ने आगे कहा,
"आप इस तरह की याचिकाएं दायर नहीं कर सकते। इसका कोई कारण नहीं है। आप चार दिन बाद इसे दायर कर रहे हैं। हम सब इंसान हैं।"
हालांकि, कोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी को निर्देश दिया कि वह मीना की तरफ़ से चुनाव को लेकर अपनी चिंताओं के बारे में दी गई अर्ज़ी पर जल्द से जल्द फ़ैसला करे।
यह याचिका वकील विमल त्यागी और बालाजी पाठक के ज़रिए दायर की गई थी।
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