

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को तिहाड़ जेल प्रशासन और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा। यह जवाब JNU स्कॉलर और दिल्ली दंगों के आरोपी शरजील इमाम की उस याचिका पर मांगा गया है, जिसमें उन्होंने पेन ड्राइव में मौजूद रिसर्च मटीरियल को एक्सेस करने और अपनी PhD के काम के लिए जेल के कंप्यूटर का इस्तेमाल करने की इजाज़त मांगी है।
जस्टिस संजीव नरूला ने निर्देश दिया कि जवाब चार हफ़्ते में दाखिल किए जाएं।
इमाम की ओर से वकील अहमद इब्राहिम पेश हुए और उन्होंने दलील दी कि इमाम जनवरी 2020 से हिरासत में हैं।
इब्राहिम ने कहा, "गिरफ्तारी के समय, वह अपनी पीएचडी के आखिरी साल में थे। उनके सिनॉप्सिस को यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) और यूनिवर्सिटी [JNU] ने मंज़ूरी दे दी है। मैं मांग कर रहा हूं कि उन्हें अपना रिसर्च मटीरियल इस्तेमाल करने की इजाज़त दी जाए।"
उन्होंने आगे कहा कि इमाम इंटरनेट का एक्सेस नहीं मांग रहे थे, बल्कि सिर्फ़ जेल में मौजूद कंप्यूटर सिस्टम का इस्तेमाल करना चाहते थे।
जब बेंच ने उनसे पूछा कि इमाम को स्टडी मटीरियल की फिजिकल कॉपी क्यों नहीं दी जा सकतीं, तो इब्राहिम ने कहा कि इसमें लाखों पन्ने लग जाएंगे।
जनवरी 2020 में गिरफ्तारी से पहले इमाम ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में मॉडर्न हिस्ट्री में डॉक्टोरल स्कॉलर के तौर पर दाखिला लिया था।
उन्होंने हाई कोर्ट से अपने वकीलों से पेन ड्राइव में रिसर्च का मटीरियल लेने और अपनी PhD का काम जारी रखने के लिए जेल के अंदर मौजूद कंप्यूटर सुविधाओं का इस्तेमाल करने की इजाज़त मांगी है। उन्होंने कहा कि यह मटीरियल भारत सरकार द्वारा न तो प्रतिबंधित था और न ही इस पर कोई रोक थी।
इमाम के मुताबिक, ट्रायल कोर्ट ने अप्रैल 2026 में जेल सुपरिटेंडेंट को इसी तरह की एक अर्ज़ी पर विचार करने का निर्देश दिया था। उस समय के सुपरिटेंडेंट ने इमाम को अपने वकीलों से पेन ड्राइव लेने की इजाज़त दे दी थी।
हालांकि, मटीरियल मिलने से पहले ही सुपरिटेंडेंट का तबादला हो गया।
बाद में नए सुपरिटेंडेंट ने यह कहते हुए अर्ज़ी ठुकरा दी कि इमाम कोर्ट के खास आदेश के बिना रिसर्च मटीरियल या जेल के कंप्यूटर का इस्तेमाल नहीं कर सकते।
जुलाई में, ट्रायल कोर्ट ने इमाम को रिसर्च मटीरियल का इस्तेमाल करने की इजाज़त देने से इनकार कर दिया। जज ने यह फैसला जेल सुपरिटेंडेंट की मर्ज़ी पर छोड़ दिया कि इमाम को मटीरियल का इस्तेमाल करने की इजाज़त दी जाए या नहीं।
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