

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को रेसलर विनेश फोगाट की उस याचिका पर रेसलिंग फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (WFI) का पक्ष जानना चाहा, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ़ जारी 'शो-कॉज़ नोटिस' और अनुशासनात्मक कार्रवाई को चुनौती दी है।
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कहा कि वह इस मामले में कोई औपचारिक नोटिस जारी नहीं कर रही हैं। कोर्ट ने WFI के वकील से कहा कि वे 29 सितंबर तक निर्देश ले लें, जब इस मामले की अगली सुनवाई होगी।
फोगाट का कहना है कि 9 मई और 17 जून को उन्हें जारी किए गए दो नोटिस, WFI की मनमानी और दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई के सिलसिले का हिस्सा हैं, जिसने मैटरनिटी के बाद कॉम्पिटिटिव रेसलिंग में उनकी वापसी में बाधा डाली है।
उन्होंने तर्क दिया है कि इंटरनेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा 1 जनवरी, 2026 से प्रतिस्पर्धा करने की मंजूरी दिए जाने के बावजूद WFI ने उनके खिलाफ कार्रवाई की।
फोगाट ने अपनी याचिका में कहा, "कारण बताओ नोटिस और उसके बाद की कार्यवाही याचिकाकर्ता की एलीट प्रतियोगिताओं में वापसी में लगातार बाधा डालती है और आने वाली प्रतियोगिताओं में उनकी पात्रता, नामांकन और भागीदारी पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।"
आज कोर्ट ने ओलंपियन की एक और याचिका पर सुनवाई की। इस याचिका में WFI से मांग की गई थी कि वह महिला एथलीटों के लिए प्रेग्नेंसी, बच्चे के जन्म और उसके बाद ठीक होने के समय के बाद कॉम्पिटिटिव स्पोर्ट्स में वापसी के लिए एक निष्पक्ष, पारदर्शी और व्यवस्थित तरीका लागू करे।
फोगाट ने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि बच्चे के जन्म के बाद जब उन्होंने अपना रेसलिंग करियर फिर से शुरू किया, तो उन्हें बिना किसी रियायत के सीधे कॉम्पिटिशन में उतरना पड़ा, जबकि प्रेग्नेंसी की वजह से वह उस दौरान कॉम्पिटिशन में हिस्सा नहीं ले पाई थीं।
याचिका के अनुसार, योग्यता का तरीका प्रेग्नेंसी के दौरान हुए टूर्नामेंट में किए गए प्रदर्शन पर आधारित था। इससे उन्हें कॉम्पिटिशन में वापसी का कोई दूसरा रास्ता मिलने के बजाय, अनुपस्थिति के लिए एक तरह से सज़ा मिली।
जस्टिस शर्मा ने आज इस याचिका पर WFI, केंद्र सरकार और इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) को नोटिस जारी किया और कहा कि इस मामले की अगली सुनवाई नवंबर में होगी।
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Delhi High Court seeks WFI's stand on Vinesh Phogat's plea against disciplinary action