

कई याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उनका आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर राष्ट्रीय राजधानी में विपक्षी पार्टियों और युवा संगठनों के प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन से पहले दिल्ली मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए हैं और दिल्ली आने वाली लंबी दूरी की ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं।
यह मामला भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच के सामने तत्काल सुनवाई के लिए रखा गया।
सांसद एम.ए. बेबी की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने कहा "सभी ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं। मेट्रो स्टेशन बंद हैं। आप कहीं आ-जा नहीं सकते। होटल लोगों के लिए बंद हैं। निज़ामुद्दीन बंद है। RWA को बताया जा रहा है कि लोग बाहर नहीं निकल सकते। मेरे देश में क्या हो रहा है? यह एक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन है। यह हमारा देश है। ऐसा कैसे हो सकता है? ऐसा कैसे हो सकता है?"
एडवोकेट प्रशांत भूषण ने भी कहा कि पूरी दिल्ली बंद कर दी गई है।
सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने आरोप लगाया कि 57 मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए हैं।
CJI कांत ने कहा, "जब हम सुबह आए थे, तब ऐसा कुछ नहीं था।"
सिब्बल ने बताया कि इंडियन यूथ कांग्रेस ने भी दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन हाई कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया।
सिब्बल ने कहा, "हमने भी याचिका दायर की है। वे हाई कोर्ट गए थे। हाई कोर्ट ने कहा है कि वह सोमवार को इस पर सुनवाई करेगा। वे हाई कोर्ट गए और उसने ऐसा आदेश दिया। आज इस कोर्ट से जो संदेश जा रहा है, वह हाई कोर्ट के संदेश से अलग है। कृपया देखें। इस देश में हमारे पास जो कुछ भी है, उसके रक्षक आप ही हैं।"
शंकरनारायणन ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार एक मौलिक अधिकार है और इसके लिए पूरे शहर को बंद नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा, "शांतिपूर्ण विरोध गैर-कानूनी नहीं है। कुछ प्रदर्शनकारियों को संभालने में असमर्थ होने के कारण पूरे शहर को बंद करने का कोई सवाल ही नहीं उठता। ये एहतियाती उपाय हैं। अभी तक कुछ हुआ नहीं है।"
जस्टिस बागची ने जवाब दिया, "संगठन बनाने के मौलिक अधिकार में कोई संदेह नहीं है। लेकिन उस अधिकार का इस्तेमाल संगठन से जुड़े कानूनों के अनुसार ही किया जाना चाहिए। आपको अनुमति के लिए आवेदन करना होगा। अगर वे अनुमति नहीं देते हैं या देरी करते हैं, तो आप कोर्ट आ सकते हैं।"
कोर्ट ने कहा कि उसे अलग-अलग हितों के बीच संतुलन बनाना होगा।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कोर्ट को किसी अंतिम नतीजे पर नहीं पहुँचना चाहिए।
इस मामले की आगे सुनवाई दोपहर 2 बजे होगी।
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