

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) और अन्य लोगों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान वकीलों पर हमले और उनकी हिरासत का मुद्दा उठाया है।
कोर्ट कल इन याचिकाओं पर सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया।
इस मामले में SCBA की ओर से दायर याचिका का ज़िक्र आज सुबह भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच के सामने किया गया।
एक वकील ने भी इसी तरह की याचिका दायर की है।
बेंच ने आज ज़ोर देकर कहा कि विरोध-प्रदर्शनों की वजह से सुप्रीम कोर्ट का कामकाज नहीं रुकना चाहिए।
CJI कांत ने कहा, "आपको यह भी देखना होगा कि सभी लोकतांत्रिक गतिविधियां सुचारू रूप से चलें। इसमें कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन कम से कम सुप्रीम कोर्ट का कामकाज प्रभावित नहीं होना चाहिए। हमने यही कहा है। हम किसी राजनीतिक पार्टी के पक्ष में नहीं हैं। यह संस्थान अपने संस्थागत कर्तव्यों का पालन कर रहा है। मैंने प्रदर्शनकारियों से भी अपील की है। वे किसी भी राजनीतिक पार्टी से जुड़े हो सकते हैं, और हमें उससे कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन कोर्ट को किसी भी तरह की राजनीतिक गतिविधि में नहीं घसीटा जाना चाहिए। कोर्ट के कामकाज, वकीलों, कोर्ट के कर्मचारियों या मुकदमों से जुड़े लोगों की आवाजाही में कोई उकसावा या रुकावट नहीं होनी चाहिए। उन्हें अपना काम करने दिया जाना चाहिए। हम कल इस मामले की सुनवाई करेंगे।"
सीनियर एडवोकेट प्रदीप राय ने SCBA का पक्ष रखा।
खास बात यह है कि आज चल रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कथित ज्यादतियों का भी ज़िक्र किया गया, जबकि कोर्ट ने निर्देश दिया था कि पुलिस शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को मनमाने ढंग से हिरासत में लेने से बचे। रविवार (11 अक्टूबर) को जारी एक आदेश में, सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को चेतावनी भी दी थी कि वे दिल्ली में इंटरनेट सेवाओं में रुकावट न डालें और न ही पत्रकारों, वकीलों और अन्य पेशेवरों के काम में बाधा डालें।
सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने आज आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस इन निर्देशों का लगातार उल्लंघन कर रही है। उन्होंने कोर्ट से आग्रह किया कि वह दिल्ली पुलिस को अपनी गतिविधियों में संयम बरतने की चेतावनी दे।
उन्होंने कहा, "ऐसे समय में जब हमारे सीनियर एडवोकेट को सड़कों पर घसीटा जा रहा है - मिस्टर फरासत (सीनियर एडवोकेट) को सड़कों पर घसीटा गया - यह बहुत ही अशोभनीय था। ऐसा कभी नहीं होना चाहिए था। कोर्ट ने बार-बार कहा है कि हमें (प्रदर्शनकारियों, नागरिकों को) सहयोग करना चाहिए और संयम बरतना चाहिए। मुझे उम्मीद है कि कोर्ट पुलिस से भी यही कहेगा। इस बेंच की ओर से अब तक ऐसा नहीं कहा गया है। मुझे उम्मीद है कि ऐसा होगा, क्योंकि पुलिस की ज्यादतियां हो रही हैं और गुंडे लाठी-डंडे लेकर घूम रहे हैं।"
कोर्ट इस मामले पर भी कल सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया है।
CJI कांत ने कहा कि वकीलों को भी तय जगहों पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है।
उन्होंने कहा, "हर वकील, बार के हर सदस्य को शांतिपूर्ण गतिविधियों में शामिल होने का अधिकार है, चाहे वे तय जगहें कहीं भी हों।"
उन्होंने कोर्ट से अपील की कि वह पुलिस को इस तरह के भेदभावपूर्ण रवैये के खिलाफ कड़ा संदेश दे।
SCBA की याचिका में बताया गया है कि 10 अक्टूबर को जो वकील सुप्रीम कोर्ट के आस-पास घूम रहे थे, उनके साथ कथित तौर पर बदसलूकी की गई और उन्हें ज़बरदस्ती हिरासत में लेकर कई किलोमीटर दूर ले जाया गया। यह कार्रवाई पुलिस द्वारा एंटी-CEC प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ की गई सख़्त कार्रवाई का हिस्सा थी। बाद में, CJI को शिकायत करने के बाद हिरासत में लिए गए वकीलों को रिहा कर दिया गया।
SCBA ने अपनी याचिका में कहा है, "भले ही उन्हें रिहा कर दिया गया, लेकिन वकीलों और अन्य नागरिकों के साथ पुलिस के बर्ताव में जवाबदेही की कमी गंभीर चिंता का विषय है... दुर्भाग्य से, जिन लोगों को सुरक्षा करनी चाहिए, वही कानून के शासन का उल्लंघन कर रहे हैं।"
बार एसोसिएशन ने कोर्ट से पुलिस की कार्रवाई पर स्टेटस रिपोर्ट मांगी है, जिसमें पुलिस द्वारा की गई हिरासत और इसमें शामिल पुलिस अधिकारियों की पहचान की जानकारी शामिल हो। साथ ही, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत जारी निषेधाज्ञा (prohibitory orders) के दायरे, ऐसे आदेशों के कारणों, उनकी शर्तों और बैरिकेडिंग व अन्य प्रतिबंधों के आधार के बारे में भी जानकारी मांगी गई है, जिनसे दिल्ली में कोर्ट तक पहुँचने में रुकावट आ सकती है।
अन्य मांगों में CCTV फुटेज, हिरासत के रिकॉर्ड, बॉडी कैम फुटेज (यदि कोई हो) को सुरक्षित रखने; इंटरनेट सेवाएँ बाधित न हों, यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश; और वकीलों व नागरिकों के लिए कोर्ट तक पहुँचने की उचित व्यवस्था करने की मांगें शामिल हैं।
यह याचिका वकील दीपक कंसल ने तैयार की है और इसे वकील प्रज्ञा बघेल के ज़रिए दायर किया गया है।
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Delhi Protests: SCBA, others move Supreme Court over detention, assault on lawyers