

तृणमूल कांग्रेस की सांसद डोला सेन ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने शीर्ष अदालत में दाखिल अपने हलफनामे में यह स्वीकार किया है कि उसने 'फॉर्म 6' के ऑनलाइन संस्करण के साथ छेड़छाड़ की है।
सेन की ओर से पेश हुईं सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ECI ने एक प्रेस रिलीज जारी की है, जिसमें कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए संशोधित 'फॉर्म 6' को मंजूरी दे दी है।
उन्होंने कहा, "कोर्ट ने ऐसा कुछ नहीं किया है। अगर कोर्ट नोटिस जारी करता है, तो इस मामले की सुनवाई बाकी याचिकाओं के साथ की जा सकती है।"
उन्होंने आगे कहा कि ECI ने अब सेन की याचिका में लगाए गए कई आरोपों को मान लिया है।
गुरुस्वामी ने कहा, "लेकिन क्या मैं कुछ कह सकती हूँ? जरा इस संस्था की हिम्मत तो देखिए, जो 'फॉर्म 6' के साथ की गई कथित छेड़छाड़ को सही ठहरा रही है। उनका कहना है कि इस कोर्ट ने 'बिहार SIR' (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को मंजूरी दी थी। यह बात सही है। लेकिन 'बिहार SIR' में जो फॉर्म था, उसका संबंध नागरिकता और जाति से था। उसका 'फॉर्म 6' से कोई लेना-देना नहीं था।"
गुरुस्वामी, ECI द्वारा कल दाखिल किए गए हलफनामे का जिक्र कर रही थीं। इसमें चुनाव आयोग ने कहा है कि केवल केंद्र सरकार ही 'फॉर्म 6' में संशोधन कर सकती है। हालांकि, आयोग ने यह माना कि 'फॉर्म 6' के साथ जुड़ा घोषणा-पत्र (डिक्लेरेशन) जिस तरह से ऑनलाइन पेश किया गया था, उससे ऐसा लग सकता है कि 'फॉर्म 6' में कोई संशोधन किया गया है।
ECI के हलफनामे में बताया गया है कि ऐसा इसलिए किया गया था ताकि आवेदकों को केवल एक OTP और ई-साइन (e-sign) की जरूरत पड़े।
ECI की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट मनिंदर सिंह ने गुरुस्वामी की दलीलों पर आपत्ति जताई।
सिंह ने कहा, "मैं चुनाव आयोग की ओर से पेश हुआ हूँ। वे किसी और मकसद से ऐसी बातें कह रहे हैं।"
कोर्ट, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के कामकाज और भारत के विभिन्न राज्यों में मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) को लागू करने में हुई कथित अनियमितताओं से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने आखिरकार मामले की सुनवाई टाल दी। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को 10 दिन का समय दिया है, ताकि वे सोमवार को ECI द्वारा दाखिल किए गए जवाब पर अपना 'रीजॉइंडर' (जवाब का जवाब) दाखिल कर सकें।
कोर्ट ने आदेश दिया, "मामले को 10 दिन बाद सूचीबद्ध किया जाए। तब तक रीजॉइंडर दाखिल कर दिया जाना चाहिए।"
याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि चूंकि ECI (चुनाव आयोग) का जवाब कल ही दाखिल किया गया है, इसलिए पक्षों को अपना जवाब (रिज़ॉइंडर) दाखिल करने के लिए एक हफ्ते का समय दिया जाना चाहिए।
CJI कांत ने इस अनुरोध को स्वीकार कर लिया।
उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि आप सही कह रहे हैं। ये जवाब (रिज़ॉइंडर) दाखिल किए जाने चाहिए।"
राकेश कुमार सिंह द्वारा दायर एक याचिका में 'को वारंटो' (अधिकार-पृच्छा) रिट की मांग की गई है। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) से यह पूछा गया है कि उन्होंने कथित तौर पर एकतरफा तरीके से कई फैसले कैसे लिए।
सिंह की याचिका के अलावा, विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित कई राजनीतिक नेताओं ने भी याचिकाएं दायर की हैं। इनमें SIR को चुनौती दी गई है और अन्य अनियमितताओं को उजागर किया गया है।
गांधी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने आज कहा,
"यह पूरा मामला निर्णय लेने की प्रक्रिया, विचार-विमर्श और इस बात पर निर्भर करता है कि फैसला सर्वसम्मति से लिया गया था या नहीं। फाइलों पर की गई टिप्पणियों (फाइल नोटिंग्स) आदि को सुरक्षित रखा जाए।"
सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने इसे एक अनुचित मांग बताया। मामले की सुनवाई टालते हुए CJI कांत ने कहा,
"हमें सब कुछ पता है, हम इस पर फैसला लेंगे।"
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ECI has accepted Form 6 tampering, now justifying it: TMC MP Dola Sen to Supreme Court