मुंबई के पूर्व मेयर ने गलत जाति प्रमाण पत्र के कारण अयोग्य ठहराए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

कोर्ट ने विशाखा राउत की याचिका पर राज्य से जवाब मांगा और आदेश दिया कि उनके जाति प्रमाण-पत्र की वैधता को लेकर किसी कानूनी अथॉरिटी के सामने उनकी अपील का नतीजा आने तक उनकी सीट खाली रखी जाए।
Vishakha Raut
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मुंबई की पूर्व मेयर और शिवसेना (UBT) नेता विशाखा राउत की याचिका पर नोटिस जारी किया। इस याचिका में उनके OBC जाति प्रमाण पत्र को अमान्य घोषित किए जाने के बाद बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) पार्षद के तौर पर उनकी अयोग्यता को चुनौती दी गई थी [विशाखा शरद राउत बनाम महाराष्ट्र राज्य और अन्य]।

जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने आदेश दिया कि वार्ड नंबर 191 (दादर वेस्ट-शिवाजी पार्क) में पार्षद की जो सीट पहले राउत के पास थी, उसे तब तक नहीं भरा जाएगा जब तक कि उनके जाति प्रमाण पत्र की वैधता को लेकर अपीलीय अथॉरिटी के सामने उनकी याचिका पर फैसला नहीं हो जाता।

कोर्ट ने आदेश दिया, "याचिकाकर्ता के पास पहले जो पार्षद की सीट थी, उसे न भरा जाए। अपीलीय अथॉरिटी लंबित अपील पर फैसला करे और इस दौरान वह विवादित आदेश से बिल्कुल भी प्रभावित न हो।"

Justice Vikram Nath and Justice Sandeep Mehta
Justice Vikram Nath and Justice Sandeep Mehta

राउत ने बॉम्बे हाई कोर्ट के 2 सितंबर के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। हाई कोर्ट ने उनकी उस रिट याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें उन्होंने BMC के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन एक्ट, 1888 की धारा 16(1C)(a) के तहत उनकी सीट को अपने आप खाली घोषित कर दिया गया था।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब पालघर जिला जाति जांच समिति ने 20 अगस्त, 2026 को राउत के 'कुनबी' OBC जाति प्रमाण पत्र को अमान्य घोषित कर दिया। अमान्य घोषित होने के बाद, म्युनिसिपल कमिश्नर ने राउत को सूचित किया कि वार्ड 191 से उनका चुनाव रद्द कर दिया गया है और राज्य सरकार से उन्हें छह साल के लिए चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित करने की सिफारिश की।

राउत की ओर से पेश होते हुए, सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने आज सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाई जाए और उनकी चुनावी प्रतिद्वंद्वी, शिवसेना की प्रिया सर्वंकर गुरव को सीट संभालने से रोका जाए, जबकि जाति प्रमाण पत्र से जुड़ी राउत की कानूनी अपील डिविजनल कमिश्नर के पास लंबित है।

जयसिंह ने दलील दी, "अपील की कार्यवाही पर रोक लगाई जाए। मेरी प्रतिद्वंद्वी उस पद पर बैठना चाहती हैं। इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती। सीट खाली रखी जानी चाहिए... उनकी कोशिश है कि मेरी अपील पर फैसला आने से पहले ही वे मेरी सीट पर कब्जा कर लें।"

Indira Jaising
Indira Jaising

हाईकोर्ट ने पहले कहा था कि जाति प्रमाण पत्र अमान्य होने पर पार्षद का चुनाव अपने आप, पिछली तारीख से और स्वतः ही रद्द माना जाएगा, भले ही कोई अपील लंबित हो।

सुप्रीम कोर्ट ने आज अपील सुनने वाले अधिकारी (डिविजनल कमिश्नर, कोंकण डिविजन) को निर्देश दिया कि वे राउत की लंबित कानूनी अपील पर जल्द से जल्द और उसके गुण-दोष के आधार पर फैसला करें। साथ ही, कोर्ट ने यह भी कहा कि जब तक फैसला नहीं हो जाता, तब तक उनकी पार्षद वाली सीट पर किसी और को नियुक्त न किया जाए।

प्रतिवादियों की ओर से सीनियर एडवोकेट के. परमेश्वर पेश हुए।

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Ex-Mumbai mayor moves Supreme Court against disqualification over invalid caste certificate

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