

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि फ़ुटपाथ सिर्फ़ पैदल चलने वालों के लिए होते हैं। कोर्ट ने उन झुग्गियों को गिराने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिन्हें सार्वजनिक फ़ुटपाथ पर कब्ज़ा करने वाली झुग्गियों के तौर पर चिह्नित किया गया था [लोहार बस्ती लाल बाग़ आज़ादपुर विकास समिति बनाम DDA और अन्य]।
जस्टिस जसमीत सिंह, दिल्ली में झुग्गी-बस्ती में रहने वाले लोगों के ग्रुप 'लोहार बस्ती लाल बाग़ आज़ादपुर विकास समिति' की एक याचिका पर सुनवाई कर रहे थे।
उन्होंने उस डिमोलिशन नोटिस (तोड़ने के आदेश) को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी बस्तियों को हटाने की बात कही गई थी।
हालांकि, कोर्ट ने उन्हें कोई तुरंत राहत देने से इनकार कर दिया, क्योंकि यह पाया गया कि ग्रुप ने फ़ुटपाथ पर बस्तियाँ/झुग्गियाँ बना ली थीं। कोर्ट ने कहा कि फ़ुटपाथ पर इस तरह के कब्ज़े की इजाज़त नहीं दी जा सकती।
कोर्ट ने कहा, "फ़ुटपाथ पैदल चलने वालों के लिए और सड़कों पर ट्रैफ़िक से बचने के लिए बनाए जाते हैं। फ़ुटपाथ पर कब्ज़ा नहीं किया जा सकता। इन्हीं वजहों से, मैं इस याचिका पर विचार करने का इच्छुक नहीं हूँ।"
याचिकाकर्ता समूह, पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD) द्वारा 7 अगस्त को जारी किए गए गिराने के नोटिस को रद्द करने की मांग कर रहा था। नोटिस में कहा गया था कि वहां रहने वालों ने सरकारी ज़मीन पर अवैध रूप से झुग्गियां बनाकर कब्ज़ा कर लिया है और वे वहां अलग-अलग तरह के कारोबार कर रहे हैं।
याचिकाकर्ता समूह ने बस्ती के निवासियों के पुनर्वास (rehabilitation) के लिए उनकी पात्रता तय करने के मकसद से एक सर्वे कराने की मांग की थी। उन्होंने पुनर्वास के उपाय किए जाने तक गिराने के नोटिस पर रोक लगाने के लिए अंतरिम निर्देश भी मांगे थे।
कोर्ट ने गिराने के नोटिस को रद्द करने से इनकार कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट को आदेश दिया है कि वह इस मामले पर याचिकाकर्ता की अर्ज़ी पर चार हफ़्ते के अंदर विचार करे।
कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता अपनी अर्ज़ी पर फ़ैसले के अलावा किसी और राहत का हकदार नहीं है।
DDA की ओर से स्टैंडिंग काउंसिल शोभना तकियार पेश हुईं।
दिल्ली सरकार की ओर से पैनल काउंसिल राघवेंद्र उपाध्याय और वकील पूर्णिमा जैन, मधुर, पुष्टि गुप्ता, गर्विल सिंह, प्रद्युम्न गौतम, कुलजीत सिंह, अनुज चतुर्वेदी, ऋचा धवन, यशिता जैन और साहिल भास्कर पेश हुए।
वकील पुष्टि गुप्ता ने DUSIB का प्रतिनिधित्व किया।
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Footpath strictly meant for walking, cannot be encroached upon: Delhi High Court